नागपुर पदवीधर चुनाव में BJP की हार पर किसान संघ बोला, धान किसानों की नाराजगी बड़ी वजह
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भारतीय किसान संघ के नाना आखरे ने कहा कि धान उत्पादक किसानों और उनके पढ़े-लिखे बेटों की नाराजगी वोटिंग में दिखी।
विधान परिषद के नागपुर विभाग पदवीधर निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद संघ से जुड़े भारतीय किसान संघ ने अपना विश्लेषण सामने रखा है। संगठन का कहना है कि इस चौंकाने वाले नतीजे के पीछे एक बड़ी वजह धान उत्पादक किसानों और उनके पढ़े-लिखे बच्चों की सरकार से नाराजगी है।
किसान संघ के मुताबिक इस निर्वाचन क्षेत्र के छह जिलों में से पांच जिले धान उत्पादक हैं। भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय जैविक प्रमुख नाना आखरे ने इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठी पार्टियां यह याद रखें कि उनका जनाधार धीरे-धीरे कम हो रहा है।
आखरे के अनुसार किसानों की कई समस्याएं हैं, फिर भी पिछले कुछ सालों में किसानों के लिए ज्यादा कुछ नहीं हुआ, ऐसी भावना धान उत्पादक किसानों और उनके पढ़े-लिखे बेटों में है। उनका कहना है कि इसी वजह से भाजपा के खिलाफ नाराजगी परिषद के चुनाव की वोटिंग में दिखाई दी।
नाना आखरे ने यह भी कहा कि धान उत्पादक पट्टी के किसानों ने धान के बोनस के लिए राज्य सरकार से कई बार मांग की। उन्होंने निवेदन दिए, आंदोलन किए और मोर्चे निकाले। इसके बावजूद आखरे के मुताबिक मौजूदा राज्य सरकार ने धान के बोनस पर एक शब्द भी नहीं कहा।
आखरे ने कहा कि आज पूर्वी विदर्भ की धान उत्पादक पट्टी में हर किसान के घर में ग्रेजुएट बच्चे हैं और किसानों को लगता है कि सरकार उनके बारे में सोचती ही नहीं। उनके मुताबिक ये पढ़े-लिखे नौजवान खेती करने वाले अपने मां-बाप की दिक्कत समझते हैं। इसीलिए उनकी राय में नौजवानों की नाराजगी चुनाव के नतीजे में दिखाई दी।
आखरे का कहना है कि इन पढ़े-लिखे नौजवानों के किसान पिता ने जिस पार्टी को वोट दिया, बेटा भी उसी पार्टी को वोट दे, यह जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि किसान सरकार की प्राथमिकता में नहीं है। उनके शब्दों में फिलहाल अजीब कामकाज चल रहा है और इसी वजह से धान उत्पादक पट्टी के किसान परिवारों के हजारों पढ़े-लिखे नौजवान सरकार से नाराज हैं।
अंत में नाना आखरे ने इशारों में चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि मौजूदा सत्ताधारी अगर आगे भी सत्ता में रहना चाहते हैं तो उन्हें वक्त रहते सावधान हो जाना चाहिए।
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