गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026

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विधान परिषद चुनाव: 5 में से 3 सीटें महाआघाड़ी को, महायुति के हिस्से 2; नागपुर-पुणे में बीजेपी हारी

विधान परिषद चुनाव: 5 में से 3 सीटें महाआघाड़ी को, महायुति के हिस्से 2; नागपुर-पुणे में बीजेपी हारी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

महाराष्ट्र विधान परिषद की 5 सीटों की मतगणना में महायुति को 2 और महाआघाड़ी को 3 सीटें मिलीं। नागपुर और पुणे में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा।

महाराष्ट्र विधान परिषद की 5 सीटों के नतीजे सत्तारूढ़ महायुति के लिए बड़ा झटका लेकर आए। बुधवार को देर रात तक चली मतगणना के बाद बीजेपी, शिंदे सेना और अजीत गुट की राकां को सिर्फ 2 सीटें मिलीं। कांग्रेस और पवार गुट की अगुवाई वाली विपक्षी महाआघाड़ी ने 3 सीटें जीत लीं और लोकसभा चुनाव के नतीजों की याद ताजा कर दी।

कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि ग्रैजुएट सीट का मतलब पढ़े-लिखे वोटरों की भागीदारी होता है। उनके मुताबिक बीजेपी के मकड़जाल से मुक्ति के लिए पढ़े-लिखे वोटरों की बगावत की शुरुआत महाराष्ट्र से हो गई है। महाराष्ट्र की तीनों ग्रैजुएट सीटों में से बीजेपी 2 पर लड़ी और दोनों हार गई, जबकि अजीत गुट को अपनी इकलौती सीट पर हार मिली।

नागपुर विभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र को महाराष्ट्र की सबसे प्रतिष्ठित सीटों में गिना जाता है। यहां कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने एक बार फिर कब्जा जमाया। यह सीट किसी समय केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के कब्जे में थी और बीजेपी करीब 52 साल तक इसे जीतती रही। पिछले चुनाव में वंजारी ने बीजेपी के संदीप जोशी को हराया था। इस बार उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी सुधाकर कोहले को हराकर संघ मुख्यालय वाले शहर में कांग्रेस का परचम लहरा दिया।

इस सीट का अंतिम नतीजा 48 घंटे से ज्यादा बीत जाने के बाद भी घोषित नहीं हुआ था। 35वें एलिमिनेशन राउंड के बाद सुधाकर कोहले ने हार मान ली और वंजारी को जीत की बधाई दी। कोटा पूरा नहीं हुआ, फिर भी सबसे ज्यादा वोट मिलने के आधार पर वंजारी को गुरुवार को विजयी घोषित किया जाएगा।

पुणे स्नातक सीट पर भी बीजेपी की साख को बड़ा धक्का लगा। यहां महाआघाड़ी की प्रत्याशी हर्षदा देशमुख ने बीजेपी की स्मिता योगेश जाधव को हराया। नागपुर के बाद अब पुणे भी बीजेपी के लिए अभेद्य गढ़ के तौर पर उभर रहा था। ऐसे में शरद पवार की जीत उसका आगे का गणित बिगाड़ सकती है।

विदर्भ की अमरावती टीचर सीट पर शिंदे गुट के मौजूदा विधायक किरण सरनाईक ने फिर जीत दर्ज की। अंतिम मतगणना में उन्हें 16,663 वोट मिले। कांग्रेस की अदिति पोहरे 8,636 वोट लेकर दूसरे नंबर पर रहीं।

चुनाव की घोषणा के बाद से ही महायुति और महाविकास आघाड़ी, दोनों गठबंधनों में सीट बंटवारे को लेकर आपसी विवाद चलता रहा। कहीं बागी अपनी ही पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ मैदान में उतर गए, तो कहीं मित्र धर्म को छोड़कर सहयोगी दल के प्रत्याशी के खिलाफ ही ताल ठोक दी गई।

पुणे स्नातक सीट से बीजेपी के कौस्तुभ गावड़े के खिलाफ शिंदे सेना के समर्थन में सचिन सानप ने चुनाव लड़ा। संभाजीनगर में राकां (एसपी) के प्रताप सिंह पाटिल के सामने ठाकरे सेना के दिलीप घुगे उतरे। पुणे स्नातक सीट पर राकां (एसपी) की हर्षदा देशमुख को ठाकरे सेना के सुनील मोदी ने चुनौती दी। अमरावती शिक्षक सीट पर शिंदे गुट के किरण सरनाईक और श्रीकांत देशपांडे निर्दलीय के तौर पर आमने-सामने रहे। अमरावती में बीजेपी सांसद अनिल बोंडे की बहन ने भी पार्टी से बगावत कर चुनाव लड़ा था।

2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने महाराष्ट्र में जैसा प्रदर्शन किया था, कमोबेश वैसे ही नतीजे इस विधान परिषद चुनाव में भी दिखे। तब विदर्भ की 10 सीटों में से कांग्रेस ने 4 पर जीत हासिल की थी।

राकां (सुनेत्रा पवार गुट) को भी इन नतीजों से बड़ा झटका लगा। छत्रपति संभाजी नगर और पुणे की सीटें हाथ से जाने के बाद पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल पटेल ने कहा कि विधान परिषद चुनाव के नतीजे हमारे लिए खतरे की घंटी हैं। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को आत्ममंथन की नसीहत दी। मराठवाड़ा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में तीन बार के विधायक और पार्टी उम्मीदवार सतीश चव्हाण हार गए। सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में राकां ने पांच में से सिर्फ मराठवाड़ा स्नातक सीट लड़ी थी। रील स्टार रविराज साबले ने करीब 20 हजार वोट काटे।

इन नतीजों को साफ चेतावनी बताते हुए प्रफुल पटेल ने सोशल नेटवर्किंग साइट 'एक्स' पर लिखा कि भरोसा दोबारा जीतने, प्राथमिकताएं तय करने और संगठन मजबूत करने के लिए आत्ममंथन जरूरी है। उन्होंने लिखा कि संगठन को मजबूत करने के लिए नेतृत्व को अपनी प्राथमिकताओं में तुरंत सुधार करना होगा।

चर्चा है कि उनका इशारा सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार की ओर है। पिछले चुनाव में एक भी सीट न जीत पाने वाली बीजेपी को इस बार 2 सीटों का फायदा हुआ। शिंदे सेना को एक सीट मिली, जबकि राकां सुनेत्रा पवार गुट के हाथ निराशा लगी। महाविकास आघाड़ी में कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) को करारी हार का सामना करना पड़ा।

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