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नागपुर स्नातक चुनाव: कराले की दूसरी पसंद के वोटों से कांग्रेस के वंजारी जीते, कोहले हारे

नागपुर स्नातक चुनाव: कराले की दूसरी पसंद के वोटों से कांग्रेस के वंजारी जीते, कोहले हारे तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

नागपुर विभागीय स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने भाजपा के सुधाकर कोहले को हराया।

नागपुर, 28 अक्टूबर। नागपुर विभागीय स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने भाजपा के सुधाकर कोहले को हरा दिया। कांटे की टक्कर में वंजारी की जीत का सबसे अहम मोड़ निर्दलीय उम्मीदवार नितेश कराले उर्फ कराले गुरुजी के दूसरी पसंद के वोट बने।

मतगणना के शुरुआती दौर में पहली पसंद के वोटों की गिनती में भाजपा पिछड़ रही थी। बाद के राउंड में सुधाकर कोहले ने करीब 4,000 वोटों की बढ़त बना ली। 30 उम्मीदवारों की गिनती पूरी होने के बाद यह बढ़त बढ़कर लगभग 5,000 वोटों तक पहुंच गई थी।

फिर अंतिम तीन उम्मीदवारों के दूसरी पसंद के वोट गिने जाने लगे और तस्वीर बदलने लगी। कोहले की बढ़त घटकर करीब 1,200 वोटों पर आ गई। उस वक्त नितेश कराले के लगभग 14,000 वोटों की गिनती बाकी थी। कराले को वोट देने वाले मतदाताओं की दूसरी पसंद के वोट बड़े पैमाने पर कांग्रेस के अभिजीत वंजारी के पक्ष में गए। इससे कोहले की बढ़त खत्म हो गई और वंजारी जीत गए।

नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। गंगाधरराव फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितीन गडकरी जैसे नेताओं के राजनीतिक प्रभाव वाले इस क्षेत्र में पार्टी की हार ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

पिछले चुनाव में अनिल सोले को टिकट नहीं दिया गया था और उसके बाद भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। इस बार पार्टी ने कार्यकर्ताओं की नाराजगी के बावजूद सुधाकर कोहले को उम्मीदवार बनाया। इससे संगठन के भीतर असंतोष बना रहा।

अनिल सोले की नाराजगी और बगावती रुख को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को खुद उनके घर जाकर उन्हें मनाने की कोशिश करनी पड़ी। चुनाव में भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर थी। मुख्यमंत्री ने दो दिन नागपुर में रहकर शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों और व्यावसायिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें भी की थीं।

बढ़े हुए मतदान प्रतिशत को देखकर भाजपा को उम्मीद थी कि पहली पसंद के वोटों के सहारे पार्टी जीत जाएगी। लेकिन मतगणना के आखिरी चरण में दूसरी पसंद के वोटों ने पूरा समीकरण बदल दिया।

इस नतीजे से भाजपा के सामने संगठन के भीतर असंतोष और उम्मीदवार के चयन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कार्यकर्ताओं की नाराजगी के बावजूद उम्मीदवार पर कायम रहने का फैसला पार्टी को महंगा पड़ा या नहीं, इस पर अब राजनीतिक चर्चा तेज होने की संभावना है।

नितेश कराले के वोटों ने यह भी दिखाया कि स्नातक चुनाव जैसे मुकाबलों में सिर्फ शुरुआती बढ़त निर्णायक नहीं होती। दूसरी पसंद के वोट अंतिम नतीजे को पूरी तरह बदल सकते हैं। नागपुर में भाजपा के मजबूत राजनीतिक आधार के बावजूद कांग्रेस की इस जीत से साफ है कि चुनावी रणनीति, संगठन की एकजुटता और मतदाताओं की प्राथमिकताएं किसी भी मुकाबले का नतीजा बदल सकती हैं।

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