शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026

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नागपुर स्नातक सीट पर कांग्रेस के वंजारी जीते, दूसरी पसंद के वोटों से पलटा नतीजा

नागपुर स्नातक सीट पर कांग्रेस के वंजारी जीते, दूसरी पसंद के वोटों से पलटा नतीजा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीट बरकरार रखी। पहली पसंद की गिनती में आगे रहे भाजपा के सुधाकर कोहले दूसरी पसंद के वोटों के बाद पीछे रह गए।

नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीट कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने बरकरार रखी है। अंतिम गिनती में वंजारी को 67,231 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले के खाते में 63,960 वोट आए। निर्दलीय उम्मीदवार नितेश कराले को पहली पसंद के 24 हजार से ज्यादा वोट मिले थे।

पहली पसंद की गिनती में तस्वीर अलग थी। उस दौर में कोहले को 61,660 और वंजारी को 57,615 वोट मिले थे, यानी भाजपा आगे चल रही थी। जीत का कोटा किसी के पास नहीं पहुंचा, इसलिए दूसरी पसंद के वोट गिने गए और वहीं नतीजा पलट गया। कहा जा रहा है कि वंजारी को दूसरी पसंद के इतने वोट मिले, जिसकी उम्मीद कांग्रेस को भी नहीं थी।

2020 के चुनाव से तुलना करें तो कोहले का पहली पसंद का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा। तब पहले राउंड में वंजारी को 55,947 और भाजपा के संदीप जोशी को 41,540 वोट मिले थे, यानी वंजारी 14,407 वोटों से आगे थे। उस बार भी कोटा किसी को नहीं मिला था। दूसरी पसंद की गिनती में वंजारी को 61,701 और जोशी को 42,791 वोट मिले थे।

इस हार के बाद भाजपा के भीतर चर्चा है कि अब भाजपा ही भाजपा को हराने लगी है। नागपुर जिले की राजनीति में कांग्रेस के बारे में कहा जाता रहा है कि उसे कांग्रेस ही हराती है, और यह कहावत पार्टी की आपसी गुटबाजी को लेकर थी। नागपुर आरएसएस का मुख्यालय है, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का गृहनगर है और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गढ़ भी, इसलिए यह नतीजा और भी मायने रखता है।

भाजपा में उम्मीदवार घोषित होते ही स्थानीय संगठन कई खेमों में बंट गया था। कोई दबी जुबान में नाराजगी जता रहा था, तो कोई खुलकर विरोध पर उतर आया। पूर्व विधायक अनिल सोले और गिरीश व्यास ने खुली बगावत की थी। पार्टी की अपील के बाद भी सोले ने नामांकन वापस नहीं लिया। फिर मुख्यमंत्री को उनके घर जाकर बात करनी पड़ी, तब सोले ने मैदान से हटने और अधिकृत उम्मीदवार के समर्थन में काम करने की घोषणा की। उस समय कयास थे कि नेता भले पीछे हट गए हों, उनके समर्थक कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर हुई हो, यह जरूरी नहीं। कांग्रेस नेताओं ने भी दावा किया था कि भाजपा के नाराज कार्यकर्ता वरिष्ठ नेताओं के कामकाज के खिलाफ जाएंगे और फायदा उनके उम्मीदवार को होगा।

कोहले ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। वे करीब सवा साल से इस सीट पर मतदाता पंजीयन के प्रभारी थे। दावा किया गया कि भाजपा की ओर से 1.50 लाख से ज्यादा स्नातक मतदाताओं का पंजीयन कराया गया। प्रचार की कमान फडणवीस और गडकरी ने भी संभाली।

बैलेट पेपर पर कोहले के नाम के सामने गोले में 2 लिखने का जो पैटर्न दिखा, वैसा पहले के चुनावों में कभी नहीं देखा गया। ये हजारों वोट अवैध घोषित हो गए। कहा जा रहा है कि यही दूसरी पसंद की गिनती में भाजपा के लिए भारी पड़ा। यह भी चर्चा है कि भाजपा से नाराज मतदाताओं ने कांग्रेस को दूसरी पसंद का वोट दे दिया। यह कितना सच है, कहना मुश्किल है, लेकिन भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच ही इस तरह की बातें हो रही हैं।

कांग्रेस में भी आपसी खींचतान और नाराजगी नई बात नहीं है, और इस बार भी माहौल कुछ ऐसा ही था। एक नेता मंच पर होता तो दूसरा दूरी बनाए रखता। शुरुआत में कुछ नेताओं ने नाराजगी भी जताई। आखिरी चरण में सभी प्रमुख नेताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में मोर्चा संभाल लिया। भले ही वे हर वक्त साथ नजर नहीं आए, पर किसी ने दूसरे के काम में दखल या विरोध नहीं किया। नेताओं ने अपने क्षेत्रों और समाजों में बैठकें लेकर मतदाताओं से समर्थन मांगा।

इनमें विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय बडेट्टीवार, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले, पूर्व मंत्री नितिन राऊत, सुनील केदार और राजेंद्र मुलक, विधायक विकास ठाकरे, शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रफुल्ल गुडधे और जिला अध्यक्ष अश्विन बैस शामिल हैं। सभी ने अपने स्तर पर चुनावी रणनीति बनाई और सीट पर कब्जा बनाए रखने में कामयाब रहे।

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