नागपुर ग्रेजुएट चुनाव में हार पर ओमप्रकाश यादव बोले, सीएम के क्षेत्र में गुटबाजी से हुआ नुकसान
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ओमप्रकाश यादव ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम नागपुर में कुछ नेताओं की वजह से वोटर रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका। उन्होंने किसी नेता का नाम नहीं लिया।
नागपुर ग्रेजुएट कंस्टीट्यूएंसी के चुनाव में बीजेपी की हार के बाद पार्टी के ओमप्रकाश यादव ने इसकी वजह पर अपनी राय रखी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के खास भरोसेमंद बताए जाने वाले यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री के दक्षिण-पश्चिम नागपुर विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के छोटे कार्यकर्ताओं के मन में गहरी नाराजगी थी।
स्रोत के मुताबिक, क्षेत्र के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने अपने स्वार्थ के लिए जूनियर कार्यकर्ताओं को ग्रेजुएट वोटरों की रजिस्ट्रेशन करने में कई अड़चनें खड़ी कीं। कई जगह तो रजिस्ट्रेशन करने ही नहीं दिया गया। नतीजा यह रहा कि जिस क्षेत्र में कम से कम 50 हजार ग्रेजुएट वोटर जुड़ने की संभावना थी, वहां बीजेपी सिर्फ 24000 ग्रेजुएट वोटरों का रजिस्ट्रेशन करा सकी। यादव का कहना है कि इसका नुकसान चुनाव में उठाना पड़ा।
यादव ने कहा कि क्षेत्र के कुछ बीजेपी नेताओं ने "मैं नहीं तो कोई नहीं" की जिद में न खुद वोटर रजिस्ट्रेशन का काम किया और न दूसरे कार्यकर्ताओं को करने दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस नेता की गुटबाजी की वजह से पार्टी को ग्रेजुएट चुनाव में उम्मीद के मुताबिक वोट नहीं मिल सके। यादव ने उस नेता को पार्टी से निकालने की मांग की है।
जब उनसे पूछा गया कि वह नेता कौन है, तो यादव ने मीडिया के सामने नाम लेने से मना कर दिया। उनका दावा है कि इस बारे में जरूरी जानकारी वह पार्टी के सही फोरम पर दे चुके हैं। यादव ने यह भी कहा कि उस नेता के दबाव की वजह से पार्टी के कई नाराज कार्यकर्ता अपनी तकलीफ वरिष्ठों, यानी मुख्यमंत्री तक, नहीं पहुंचा पाते। उनके मुताबिक यह सारी स्थिति मुख्यमंत्री के ध्यान में लाई जा चुकी थी।
यादव के शब्दों में, मुख्यमंत्री के क्षेत्र में चार लाख वोटर हैं और उनमें से कम से कम 50 प्रतिशत ग्रेजुएट थे, लेकिन बीजेपी सिर्फ 24000 का रजिस्ट्रेशन कर पाई। उन्होंने कहा कि इसी वजह से बीजेपी ग्रेजुएट चुनाव हारी। उनका कहना था कि मुख्यमंत्री ने दक्षिण-पश्चिम नागपुर में ग्रेजुएटों के रजिस्ट्रेशन के निर्देश दिए थे, पर समय कम होने से वह खुद इस काम पर नजर नहीं रख सके। यादव के मुताबिक कुछ नेताओं के भरोसे काम छोड़ा गया और गड़बड़ी वहीं हुई।
यादव ने कहा कि वह किसी का नाम नहीं लेंगे, पर क्षेत्र में कई स्थानीय नेता ऐसे हैं जिन्हें लगता है कि अगर मुझे नहीं मिला तो किसी को नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोग खुद समझ लें कि वह किसके बारे में बोल रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि पार्टी हमेशा नाराज रहकर दूसरों को काम न करने देने वाले उस नेता पर कार्रवाई करे।
यादव ने अवैध वोटों का मुद्दा भी उठाया। उनके मुताबिक नागपुर ग्रेजुएट क्षेत्र में 9000 वोटरों ने एक ही तरीके से सुधाकर कोहले के नाम के आगे '2' लिखकर अपना वोट अवैध कर लिया। यादव ने कहा कि इसके पीछे कोई न कोई बड़ी साजिश जरूर है और पार्टी श्रेष्ठियों को पता लगाना चाहिए कि यह किसने करवाया। उन्होंने कहा कि वह छोटे कार्यकर्ता हैं, इसलिए किसी का नाम नहीं लेंगे, लेकिन पार्टी नेतृत्व को इस पर सोचना चाहिए।
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