नागपुर पदवीधर सीट: वंजारी 3,271 वोट से जीते, कराले की दूसरी पसंद ने पलटा नतीजा
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कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने भाजपा के सुधाकर कोहले को 3,271 मतों से हराया। चुनावी हलफनामे में उनके खिलाफ 18 आपराधिक मामले और 16.21 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति दर्ज है।
नागपुर विभाग पदवीधर (स्नातक) निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की है। उन्होंने भाजपा के सुधाकर कोहले को 3,271 वोट से हराया। पहली और दूसरी पसंद के वोट जोड़ने के बाद वंजारी के खाते में 67,231 वोट रहे और कोहले के खाते में 63,960। करीब दो दिन चली गिनती में कभी वंजारी आगे दिखे, कभी कोहले, और आखिर में फैसला निर्दलीय उम्मीदवार नितेश कराले उर्फ कराले गुरुजी के वोटों की दूसरी पसंद ने किया। कराले को कुल करीब 25,900 वोट मिले (किसी रिपोर्ट में 25,908 और किसी में 25,909 का आंकड़ा है)।
चुनाव निर्णय अधिकारी और विभागीय आयुक्त विजयलक्ष्मी बिदरी ने वंजारी को जीत का प्रमाणपत्र सौंपा। गिनती के दौरान चुनाव निरीक्षक डॉ. हर्षदीप कांबले और सभी जिलों के कलेक्टर, यानी सहायक निर्वाचन अधिकारी, मौजूद रहे। भारत निर्वाचन आयोग ने कार्यक्रम 22 सितंबर को घोषित किया था, अधिसूचना 29 सितंबर को जारी हुई और वोट 23 अक्टूबर को सुबह 8 से शाम 4 बजे तक पड़े। आयोग ने पूरी प्रक्रिया 31 अक्टूबर तक निपटाने का समय तय किया था।
इस सीट पर 2,55,603 मतदाता दर्ज थे और 1,65,672 ने वोट डाला। जिलों में सबसे ज्यादा मतदान चंद्रपुर में 73.05 प्रतिशत रहा। गढ़चिरौली में 72.95, गोंदिया में 71.29, वर्धा में 68.35 और भंडारा में 67.07 प्रतिशत वोट पड़े। नागपुर जिले में सबसे कम, 60.35 प्रतिशत मतदान हुआ। कुल 445 मतदान केंद्रों की 788 मतपेटियों से 1,65,705 मतपत्र निकले। इनमें 204 वैध पोस्टल बैलेट जुड़कर 1,65,909 वोट गिनने को थे। मैदान में 38 उम्मीदवार थे।
गिनती मंगलवार, 27 अक्टूबर की सुबह 8 बजे मानकापुर के विभागीय क्रीड़ा संकुल में 84 टेबल पर शुरू हुई। पहले मतपेटियों से पत्र निकालकर 25-25 के बंडल बनाए गए, और असली गिनती दोपहर करीब 2 बजे शुरू हुई। कुल 39 डिब्बे रखे गए थे, यानी हर उम्मीदवार के लिए एक और संदिग्ध मतपत्रों के लिए एक। सबसे पहले 238 पोस्टल बैलेट खुले, जिनमें से 34 अवैध निकले। बाकी 204 में वंजारी को 101, कोहले को 86 और बाकी उम्मीदवारों को मिलाकर कुछ ही वोट मिले। यानी डाक मतों में वंजारी 15 वोट आगे रहे। पूरी गिनती 41 घंटे से ज्यादा चली, हालांकि कुछ रिपोर्टों में इसे 45 घंटे और कुछ में 40 घंटे से ऊपर बताया गया है।
शुरुआत में गैर-आधिकारिक आंकड़े आए थे कि वंजारी को 28,536, कोहले को 27,751 और कराले को 14,243 वोट मिले हैं। फिर आधिकारिक शीट आई। पहले राउंड में 84,003 वोट गिने गए, जिनमें 76,875 वैध और 7,128 अवैध थे। इसमें वंजारी को 28,998, कोहले को 28,071 और कराले को 14,708 पहली पसंद के वोट मिले, यानी वंजारी 927 वोट आगे रहे। संजय थुल को 1,762, मंगेश वानखेडे को 642, धनंजय बोरकर को 612, अतुल देशमुख को 576 और सुमेध गडपायले को 521 वोट मिले। शाम को सोशल मीडिया पर कभी कोहले के 6,000 से आगे होने की और कभी वंजारी के 7,000 से आगे होने की अफवाहें उड़ीं, जबकि प्रशासन ने कोई घोषणा नहीं की। आधी गिनती के वक्त कांग्रेस के लिए सात-आठ हजार की बढ़त की बात भी चली थी। कराले ने तो दावा किया था कि पहले ही दौर में उन्हें 40 से 45 हजार वोट मिलेंगे।
रात साढ़े नौ बजे के करीब बाकी 81,909 वोटों की गिनती शुरू हुई और बुधवार तड़के तक चली। दूसरे राउंड में कोहले को 32,853 वोट मिले, वंजारी को 27,632 और कराले को 9,541। इस तरह दो राउंड के बाद कोहले के कुल 60,924, वंजारी के 56,630 और कराले के 24,249 वोट हुए। कोहले करीब 4,294 वोट आगे निकल गए (कुछ रिपोर्टों में यह फर्क 4,291 बताया गया)। उस वक्त कुल पड़े वोट 1,65,906 थे, जिनमें 15,032 अवैध और 1,50,874 वैध निकले। इसी से जीत का कोटा 75,438 बना। कोहले को कोटा छूने के लिए 14,514 और वंजारी को 18,808 वोट चाहिए थे। थुल के कुल 3,091, गडपायले के 1,096, वानखेडे के 1,029, देशमुख के 921 और बोरकर के 849 वोट हुए। यह भी माना गया कि कराले के वोट का बड़ा हिस्सा दूसरे राउंड में कोहले की तरफ गया था।
कोटा किसी का पूरा नहीं हुआ, इसलिए उम्मीदवारों को एक-एक कर बाहर करने और दूसरी पसंद के वोट गिनने का सिलसिला शुरू हुआ। 28 उम्मीदवारों के बाहर होने के बाद कोहले के 61,029 और वंजारी के 56,785 वोट थे, यानी कोहले 4,244 आगे। इसी बीच भाजपा के बागी, पूर्व विधायक अनिल सोले के वोट गिने गए। सोले ने नाम वापसी की आखिरी तारीख को नामांकन वापस नहीं लिया था, इसलिए मतपत्र पर उनका नाम बना रहा। बाद में 12 अक्टूबर को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस उनके घर गए और सोले ने मैदान से हटकर कोहले को समर्थन देने की बात कही। फिर भी उन्हें 267 वोट और 7 पोस्टल वोट, कुल 274 मिले। इनमें दूसरी पसंद के 88 कोहले को, 41 वंजारी को और 10 कराले को गए।
उसके बाद गिनती में 30 उम्मीदवारों के निपटने तक कोहले की बढ़त लगभग 5,000 तक पहुंची। जब आखिरी तीन उम्मीदवारों के दूसरी पसंद के वोट गिने गए तो बढ़त घटकर करीब 1,200 रह गई, जबकि कराले के लगभग 14,000 वोट अभी गिनने बाकी थे। बुधवार शाम और रात में कराले के मतपत्रों की दूसरी पसंद खुली और वह बड़े पैमाने पर वंजारी के हक में निकली। चार हजार से पीछे चल रहे वंजारी एक-दो घंटे में आगे आ गए। उधर नतीजे से पहले ही नागपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जश्न शुरू कर दिया और भाजपा के खिलाफ नारे लगाए, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया और भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। गिनती के दौरान आधी रात को दोनों दलों के युवा कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए और हाथापाई की नौबत आते-आते पुलिस ने उन्हें हटाया। एक और दृश्य यह रहा कि वंजारी गिनती केंद्र पहुंचे तो भाजपा विधायक प्रवीण दटके ने उन्हें आवाज देकर गले लगाकर स्वागत किया। कराले ने एक मतपेटी से 8 वोट ज्यादा निकलने का आरोप लगाया था और कुछ निर्दलीयों ने सुबह धरना देकर गिनती पर आपत्ति जताई थी।
कोहले ने हार तय होने से पहले मानने से इनकार किया था। उन्होंने कहा था, "कांग्रेस ने जश्न शुरू कर दिया है, लेकिन हमने हार नहीं मानी है।" उनका कहना था कि 36वें राउंड तक वे तीन हजार वोट से आगे थे और भाजपा के करीब नौ हजार वोट अवैध हो गए, जिसकी वजह से वे पिछड़े। उनके मुताबिक भाजपा के जिन मतदाताओं ने उनके नाम के आगे 1 की जगह 2 लिखा, उनसे उनकी अपील है कि लोकतंत्र के लिहाज से ऐसा वोट देना ठीक नहीं। एक और रिपोर्ट में उन्होंने कोटे को लेकर अपनी बात रखी, कई वोट गलत ढंग से अवैध ठहराने की शिकायत की और अवैध वोटों की दोबारा जांच मांगी। उन्होंने कोर्ट जाने की चेतावनी भी दी थी। नतीजे के बाद उनका कहना सिर्फ इतना रहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता हार का विश्लेषण करेंगे। अवैध वोटों के आंकड़े अलग-अलग बताए जा रहे हैं। कहीं 9 हजार, कहीं 6 से 7 हजार, कहीं 3 हजार से ज्यादा का दावा है। एक जगह अवैध वोटों का कुल आंकड़ा 15,106 बताया गया। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस पर साजिश की आशंका भी जताई गई। संघ से जुड़े रहे रवि वाघमारे ने इसे सोची-समझी योजना बताया, यह कहते हुए कि चुनाव में नोटा नहीं था। उनके मुताबिक भाजपा ने जातीय गणित से बचने के लिए कुणबी समाज के कोहले को उतारा, पर यह हिसाब गलत निकला।
कराले गुरुजी ने कहा, "भाजपा ने दो नंबर का वोट मांगा नहीं, यह उनके लिए घातक साबित हुआ।" उनके मुताबिक भाजपा के खिलाफ नाराजगी थी, इसलिए दूसरी पसंद वंजारी को मिली। भाजपा के अंदाजे में कराले को पहली पसंद के लगभग 15,000 वोट मिलने थे, पर उन्हें पिछली बार से साढ़े तीन गुना यानी करीब 25 हजार मिले।
हार के कारणों पर खूब चर्चा है। गिनाई जा रही वजहों में उम्मीदवार का चयन, कोहले का विधानसभा चुनाव हारने के बाद कम सक्रिय रहना, अनिल सोले और गिरीश व्यास की बगावत और कार्यकर्ताओं की नाराजगी शामिल हैं। साथ ही पारंपरिक मतदाताओं का उदासीन रहना, पहली पसंद की बढ़त पर जरूरत से ज्यादा भरोसा, दूसरी पसंद के वोटों की अनदेखी और ब्राह्मण उम्मीदवार न उतारने की नाराजगी भी गिनाई गई, पर इनके आधिकारिक आंकड़े नहीं हैं। विधानसभा चुनाव में शहर की दो सीटों पर हार का जिक्र भी हुआ, जिनमें पश्चिम नागपुर से कोहले विकास ठाकरे से हारे थे। उधर वंजारी ने दूसरे उम्मीदवारों के समर्थकों से दूसरी और तीसरी पसंद मांगी। मुख्यमंत्री फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और चंद्रशेखर बावनकुले ने प्रचार किया था। फडणवीस दो दिन नागपुर में रहे और सोले को मनाया। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र चव्हाण समीक्षा में जुटे हैं और 2 नवंबर को अमित शाह से मिलने की जानकारी है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आईं। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि RSS मुख्यालय, फडणवीस और गडकरी के शहर में कांग्रेस ने भाजपा को लगातार दूसरी बार हराया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि आखिर भ्रम का गुब्बारा फूट गया। कांग्रेस ने जीत से चार राज्यों की विधान परिषद सीटों में अपना खाता खोला। एक रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी ने 28 सीटों पर 12 उम्मीदवार उतारे थे और सिर्फ एक जीता। मोदी ने नतीजों में कांग्रेस के प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए ट्वीट किया था। रोहित पवार ने X पर लिखा, "जीते हुए उम्मीदवार अभिजीत वंजारी को बधाई, वोट के रूप में आशीर्वाद देने वाले ग्रेजुएट मतदाताओं का शुक्रिया।" उन्होंने फडणवीस के डिलीट किए ट्वीट पर भी चुटकी ली। भाजपा विधायक परिणय फुके ने कहा कि शिंदे की शिवसेना के वोट भाजपा को नहीं मिले, और कांग्रेस पर ईवीएम को लेकर तंज कसा।
राज्य की पांच सीटों में महाविकास आघाड़ी को तीन और महायुति को दो सीटें मिलीं। भाजपा के कौस्तुभ गवाडे ने पुणे शिक्षक सीट और शिंदे शिवसेना की किरण सरनाईक ने अमरावती शिक्षक सीट जीती। शरद पवार गुट की हर्षदा देशमुख-जाधव ने पुणे पदवीधर सीट और डॉ. प्रतापसिंह पाटील ने छत्रपति संभाजीनगर पदवीधर सीट जीती।
वंजारी का जन्म 10 मई 1973 को नागपुर में हुआ। वे वकील हैं। उनके पिता गोविंदराव मारोतराव वंजारी दक्षिण नागपुर से दो बार कांग्रेस के विधायक रहे। राजनीति उन्होंने छात्र संगठन से शुरू की। 1998 से 2002 तक वे NSUI महाराष्ट्र के महासचिव रहे, फिर युवक कांग्रेस के सचिव बने, जिला कांग्रेस में महामंत्री और प्रवक्ता रहे, और उत्तर प्रदेश व बिहार में पर्यवेक्षक की भूमिका भी निभाई। वे राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय से BA और LLB हैं, सिनेट और प्रबंधन परिषद के सदस्य रहे हैं और 10 कॉलेज चलाने वाले अमर सेवा मंडल के सचिव हैं। पत्नी स्मिता वंजारी अंग्रेजी की प्रवक्ता और सिनेट सदस्य हैं। उन्होंने 2005 का दक्षिण नागपुर उपचुनाव और 2014 का पूर्व नागपुर विधानसभा चुनाव भी लड़ा था। दिसंबर 2020 में उन्होंने भाजपा के संदीप जोशी को 18,919 वोट से हराया था (61,701 बनाम 42,791)। 1978 के बाद यह कांग्रेस की पहली जीत थी।
हलफनामे के मुताबिक वंजारी पर 18 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें मारपीट, दंगा, अपहरण, धमकी, सरकारी काम में बाधा और अनाधिकृत प्रवेश जैसी धाराएं हैं। उनमें से किसी में वे दोषी नहीं ठहराए गए। कुल संपत्ति 16.21 करोड़ रुपये से ऊपर है। इसमें 12.34 करोड़ की अचल और 3.87 करोड़ की चल संपत्ति है, जबकि देनदारी 3.17 करोड़ रुपये से ज्यादा है।
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