नागपुर स्नातक सीट पर कांग्रेस के अभिजीत वंजारी की जीत, भाजपा की हार के 10 कारण
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी ने भाजपा के सुधाकर कोहले को हराया। भाजपा के गढ़ में हुई इस हार के 10 कारण गिनाए जा रहे हैं।
नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार अभिजीत वंजारी ने जीत दर्ज की है। भाजपा और आरएसएस के इस मजबूत गढ़ में कांग्रेस की कामयाबी को हैरान करने वाला माना जा रहा है। वजह यह भी है कि नागपुर मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री और नितिन गडकरी जैसे बड़े नेताओं का गृह क्षेत्र है। इस जीत के साथ वंजारी ने भाजपा के उस "कलंक" को धो दिया है, जिसका वह अब तक मजाक उड़ाती रही थी।
विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक सीटों के नतीजों पर सबकी नजर थी। शुरुआत में भाजपा इस बात से उत्साहित थी कि कांग्रेस का खाता नहीं खुला था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री फडणवीस ने सोशल मीडिया पर तंज भी कसे। लेकिन नागपुर में अभिजीत वंजारी ने कांग्रेस की लगातार हार का सिलसिला तोड़ दिया, और इसके बाद भाजपा खेमे में सन्नाटा छा गया।
अब सवाल यह है कि भाजपा से चूक कहां हुई। जो कारण गिनाए जा रहे हैं, उनमें पहला उम्मीदवार का चयन है। भाजपा प्रत्याशी सुधाकर कोहले नागपुर की सक्रिय राजनीति से लगभग बाहर माने जा रहे थे। विधानसभा चुनाव हारने के बाद वे संगठन में ज्यादा सक्रिय नहीं रहे, इसलिए मतदाताओं को उनसे दूरी महसूस हो रही थी।
दूसरा कारण पार्टी की अंदरूनी कलह है। कोहले के नाम का ऐलान होते ही पार्टी के वरिष्ठ और मेहनती नेता अनिल सोले नाराज हो गए, और चुनाव की शुरुआत में ही भाजपा दो गुटों में बंट गई। वरिष्ठ नेता गिरीश व्यास ने अनिल सोले को समर्थन दिया, तो नाराज खेमा और मजबूत हो गया। भाजपा नेतृत्व ने बाद में समझौता कराने की कोशिश की, पर तब तक काफी देर हो चुकी थी।
चौथा कारण यह बताया जा रहा है कि भाजपा के समर्पित मतदाताओं ने जोश के साथ वोट नहीं डाला। साथ ही कई वोट अवैध भी पाए गए। पांचवें कारण के तौर पर दूसरी पसंद के वोटों की अनदेखी गिनाई जा रही है। पहली पसंद की गिनती में सुधाकर कोहले करीब 4,000 से ज्यादा वोटों से आगे चल रहे थे। लेकिन पार्टी ने दूसरी पसंद वाले वोटों पर पूरा ध्यान नहीं दिया, जो बड़ी रणनीतिक चूक साबित हुई।
छठा कारण निर्दलीय उम्मीदवार नितेश कराले हैं। उन्होंने मजबूती से चुनाव लड़ा, और उनके ज्यादातर दूसरी पसंद के वोट अभिजीत वंजारी को मिले। यह चुनाव का गेमचेंजर साबित हुआ। सातवां कारण छोटे दलों की उपेक्षा है। भाजपा ने उन्हें साथ लेने पर ध्यान नहीं दिया, तो उनकी दूसरी और तीसरी पसंद के वोट भी वंजारी के खाते में चले गए।
आठवां कारण कांग्रेस की सोची-समझी रणनीति है। प्रचार के दौरान अभिजीत वंजारी ने दूसरे प्रत्याशियों के समर्थकों से योजना बनाकर दूसरी पसंद के वोट मांगे। नौवां कारण पारंपरिक वोट बैंक की नाराजगी माना जा रहा है। ब्राह्मण उम्मीदवार को मैदान में न उतारने से आरएसएस और भाजपा के कई पुराने मतदाता नाखुश थे, और इसे हार की एक बड़ी वजह कहा जा रहा है।
दसवां कारण अवैध वोटों का नुकसान है। प्रत्याशी सुधाकर कोहले के मुताबिक करीब 9,000 मतदाताओं ने मतपत्र पर गलत तरीके से अंक 2 लिख दिया। इससे उनके वोट खारिज हो गए और कोहले पिछड़ गए।
नागपुर जैसे मजबूत गढ़ में यह हार भाजपा के लिए गंभीर चेतावनी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और चंद्रशेखर बावनकुले जैसे बड़े नेताओं ने सीधे प्रचार किया था, फिर भी पार्टी हारी। अगर वक्त रहते सुधार के कदम नहीं उठाए गए, तो राज्य की राजनीति में बड़े उलटफेर दिख सकते हैं।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।