नागपुर पदवीधर सीट पर कांग्रेस के अभिजीत वंजारी 3271 वोट से जीते, भाजपा के कोहळे हारे
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में दूसरी पसंद के वोटों ने नतीजा पलट दिया।
नागपुर पदवीधर निर्वाचन क्षेत्र के कड़े मुकाबले में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने भाजपा के सुधाकर कोहळे को हरा दिया। मंगलवार सुबह आठ बजे वोटों की गिनती शुरू हुई थी और यह करीब 45 घंटे चली। देर रात वंजारी को 3271 वोट से विजयी घोषित किया गया।
गिनती के पहले दौर में, यानी मंगलवार को, कांग्रेस के वंजारी आगे थे। बुधवार तड़के दूसरा दौर पूरा होने तक भाजपा के कोहळे ने करीब चार हजार वोट की बढ़त बना ली थी और काफी देर तक यह बढ़त उनके पास रही। लेकिन बुधवार शाम के बाद तस्वीर अचानक बदल गई और दूसरी पसंद के वोटों के दम पर वंजारी कोहळे से आगे निकल गए।
वंजारी को पहली और दूसरी पसंद के कुल 67 हजार 231 वोट मिले। उनके प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सुधाकर कोहळे को 63 हजार 960 वोट मिले। निर्दलीय उम्मीदवार नितेश कराळे को कुल 25 हजार 909 वोट पड़े।
नागपुर की इस हार को भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। जानकारी सामने आई है कि इस चुनाव में भाजपा के दो अंदाज़े गलत निकले, हालांकि उनमें से एक कुछ हद तक सही साबित हुआ। भाजपा के शुरुआती सर्वे में अंदाज़ा था कि निर्दलीय नितेश कराळे 15000 के आसपास वोट लेंगे। मगर कराळे ने इससे बेहतर प्रदर्शन किया और 25 हजार 909 वोट हासिल किए। सुधाकर कोहळे ने खुद कहा कि कराळे को इतने वोट मिलना समझ से परे है।
दूसरी पसंद के वोटों के आधार पर नतीजा तय करना पड़े तो इससे किसे फायदा होगा, इसका अंदाज़ा किसी भी राजनीतिक पार्टी को नहीं था। यही बात निर्णायक साबित हुई। पहले दो दौर के बाद भाजपा के कोहळे आगे थे। लेकिन बुधवार शाम को निर्दलीय कराळे के दूसरी पसंद के वोटों की गिनती शुरू हुई तो पूरी तस्वीर बदल गई। कराळे के दूसरी पसंद के ज़्यादातर वोट कांग्रेस के अभिजीत वंजारी को मिले। नतीजा यह हुआ कि 4000 वोट से पीछे चल रहे वंजारी एक-दो घंटे में ही आगे आ गए और आखिर में 3271 वोट से जीत गए।
इस चुनाव में कांग्रेस का अंदाज़ा सही निकला। नागपुर में पदवीधर चुनाव के लिए 60 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि चंद्रपुर, गोंदिया और गडचिरोली इलाके में 71 प्रतिशत से ज़्यादा वोट पड़े थे। इन इलाकों में कांग्रेस का दबदबा होने से पार्टी को भरोसा था कि इसी मतदान के दम पर पदवीधर चुनाव में उसे जीत मिल सकती है। वंजारी की जीत के बाद कांग्रेस का यह अंदाज़ा हूबहू सही साबित होता दिख रहा है।
वंजारी की जीत में कराळे के दूसरी पसंद के वोटों का बड़ा हिस्सा रहा, फिर भी पहले दौर में वंजारी को पहली पसंद के वोट बड़ी संख्या में मिले थे। उस दौर में उन्होंने बढ़त भी ली थी।
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