हेल्दी फूड के चक्कर में भुखे रह गए पुलिस कर्मी
18 घंटे दीक्षा भूमि पर किया बंदोबस्त, भुखे कर्मियों के लिए आधी रात को बुलाया गया कढ़ी-चावल
नागपुर.
आला अधिकारियों के निर्देश पर हेल्दी फूड खिलाने के चक्कर में दीक्षा भूमि बंदोबस्त के लिए तैनात 700 कर्मियों को खाने के लाले पड़ गए. 18 घंटों तक धम्म चक्र प्रवर्तन बंदोबस्त करने के बाद पुलिस कर्मियों ने साथी अधिकारियों की मदद से भोजन का प्रबंध किया. इस प्रकरण से पुलिस कर्मियों में तीव्र रोष है. अनुशासित विभाग होने से पुलिस कर्मी बात करने से बच रहे है.
14 अक्तूबर को धम्म चक्र प्रवर्तन दिवस के उपलक्ष्य में दीक्षा भूमि पर लाखों की संख्या में देश भर से श्रद्धालु आते है. तड़के से ही श्रद्धालुओं का तांता लगना आरंभ हो जाता है. इस बंदोबस्त के लिए अधिकारी सहित 700 कर्मियों की तैनाती की गई थी. उन्हें सुबह 8 बजे ही दीक्षा भूमि पर तैनात किया गया था. इस तरह के बंदोबस्त में पुलिस कर्मियों को हमेशा ही विभाग की ओर से भोजन के तौर पर पैक्ड थाली उपलब्ध कराई जाती है. पैक्ड थाली में रोटी, सब्जी, दाल, चावल, पापड़,अचार और स्विट दिया जाता है जिसकी कीमत करीब 170 रुपए बताई जाती है. सूत्रों के अनुसार आला अधिकारियों ने पैक्ड थाली की बजाय हेल्दी फूड देने के निर्देश दिए. इस निर्देश के आधार पर बंदोबस्त में तैनात अधिकारी-कर्मियों को लंच में एक आलु का पराठा, दो रोल, सलाद के तौर पर सिमित मात्रा में स्प्राउड और सॉस का पाउच दिया जबकि डीनर में दो पाव और वेज सोया कीमा परोसा गया. भोजन के साथ छांछ और पैक्ड पानी की बोतल भी दी गई. दोपहर का लंच बॉक्स देखते ही पुलिस कर्मियों ने अधिकारियों के पास अपना विरोध जताया. उनका कहना था कि एक आलु का पराठा और दो रोल पूरे भोजन की जगह नहीं ले सकता है. कई कर्मियों ने भोजन करने के लिए बाहर जाने की इच्छा जाहीर की. बंदोबस्त का हवाला देकर अधिकारियों ने रात के भोजन में सुधार करने का आश्वासन देकर मामले को शांत किया.
डीनर बॉक्स रात 8.30 बजे पहुंचे. उसमें भी दो पाव और वेज सोया कीमा देखकर पुलिस कर्मियों का पारा ठनक गया. उन्हें पता था कि जिन अधिकारियों के सामने दोपहर को विरोध जताया था वह भी 'साहब' के आदेश के 'गुलाम' है. कड़ी धूप में जनसमूह के बीच सतत खड़े रहने से कर्मियों की अवस्था पहले ही खराब हो गई है. लिहाजा वह पाव और वीज सोया कीमा पर टूट पड़े. भुख से बिलखते कुछ मजबूर कर्मियों ने दो-दो डीनर बॉक्स चट कर दिए. जिसके चलते देखते ही देखते डीनर बॉक्स खत्म हो गए. जिन कर्मियों को पाव और वेज सोया कीमा भी नसीब नहीं हुआ वह हत्थे से ही उखड़ गए. उन्होंने रात 10.30 बजे भोजन को लेकर बवाल मचा दिया. जिसके बाद बजाज नगर थाने के अधिकारियों ने कल्याण विभाग के अधिकारी से संपर्क किया. उन्हें कर्मियों के भुखे होने का हवाला देकर तत्काल भोजन उपलब्ध कराने को कहा. कल्याण विभाग के अधिकारी ने भुगतान करने का आश्वासन देते भोजन मंगाने की सलाह दी. बजाज नगर थाने के अधिकारियों ने रात 11 बजे ठेकेदार और अन्य लोगों से संपर्क किया. इसके बाद रात 12 बजे कढ़ी-चावल पहुंचने पर भुखे पुलिस कर्मियों ने भोजन किया. हेल्दी फूड पॉलिसी का दूसरों पर प्रयोग किए जाने से पुलिस कर्मी संतप्त है. उनका कहना है कि आला अधिकारी जिन सुविधाओं में रहते है वहां इस तरह का प्रयोग किया जाना चाहिए. कड़ी धूप में 18 का घंटे का बंदोबस्त करके ही अधिकारियों को उनकी अवस्था का पता चल सकता है. बताया जाता है कि हेल्दी फूड की थाली 200 रुपए की दर से खरीदी गई थी.
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चाय भी नहीं हुई नसीब
हेल्दी फूड पॉलिसी के तहत पुलिस कर्मियों को चाय की जगह ब्लैक कॉफी दी गई. ब्लैक कॉफी स्वास्थ्य के लिए बेहतर है लेकिन अधिकांश पुलिस कर्मी चाय के शौकिन है. दोपहर 4 बजे चाय की जगह ब्लैक कॉफी देखकर भी पुलिस कर्मियों ने अपना विरोध जताया. लंच में पर्याप्त भोजन नहीं देने की वजह से बजाज नगर थाने के अधिकारियों ने अपने स्तर पर चाय का प्रबंध किया.