आयकर विभाग के नाम पर हुई करोड़ों की हफ्ता वसूली
अधिकारी-कर्मियों की लिप्तता का संदेह, कई व्यापारी-बिल्डर हुए है शिकार, जेल पहुंचा ब्लैकमेलर भागचंदानी
नागपुर.
ब्लैकमेलर प्रमोद भागचंदानी आयकर विभाग के अधिकारी्-कर्मियों की मदद से भी हफ्ता वसूली करता था. व्यापारी और बिल्डर को ब्लैकमेल करके भागचंदानी ने करोड़ों की संपत्ति जुटाई है. इस दिशा में भी जांच करके भागचंदानी के साथी आयकर विभाग के अधिकारी-कर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई किए जाने की मांग हो रही है.
सूत्रों के अनुसार भागचंदानी की सवार्धिक कमाई आयकर और जीएसटी के नाम पर ब्लैकमेल करके हुई थी. उसे दलालों के माध्यम से जरीपटका, सदर, इतवारी तथा महाल में होनेवाले बड़े सौदों की जानकारी मिल जाती थी. अधिकांश बड़े सौदों में संपत्ति की असल कीमत उजागर नहीं की जाती है. इस सच्चाई से वाकिफ भागचंदानी व्यापारी तथा बिल्डर को ब्लैकमेल करता था. वह आटीआई के माध्यम से सौदे के रजीस्ट्री की कॉपी हासिल करता था. इसके बाद अपने गुर्गों के माध्यम से खरीददार को आयकर विभाग में शिकायत करने की धमकी देता था. मुंह बंद रखने के बदले में मोटी राशि की डिमांड करता था. यह डिमांड पूरी होने पर शांत हो जाता था. उगाही नहीं होने पर आयकर विभाग के अधिकारी-कर्मी को सौदे की जानकारी देता था. वह संबंधित व्यापारी अथवा बिल्डर को भागचंदानी की शिकायत का हवाला देकर कार्रवाई करने का भय दिखाते. इसके बाद व्यापारी अथवा बिल्डर भागचंदानी से सुलह करने के लिए मजबूर हो जाता. इस तरह से भागचंदानी रैकेट ने शहर के कई व्यापारी और बिल्डर से करोड़ों रुपए हजम किए है. कई पीड़ित पुलिस से शिकायत करने के इच्छुक है लेकिन संपत्ति की खरीद-फरोख्त उजागर होने की चिंता से वह शांत है. भागचंदानी को 2009 में सबसे पहले फर्जी आयकर अधिकारी बनकर ही प्रख्यात चिकित्सक से 10 लाख रुपए की उगाही करते हुए ही पकड़ा गया था. इसके बाद से वह ब्लैकमेलिंग में लिप्त है.
भागचंदानी की ब्लैकमेलिंग को लेकर रोज नए-नए खुलासे हो रहे है. भागचंदानी के रैकेट में आठ से दस सदस्य है. यह उसे जानकारी देने, पीड़ितों को फर्जी नोटिस जारी करने, उगाही में मदद करने और उसके द्वारा दी गई जानकारी को अखबार अथवा यूट्यूब पर प्रकाशित करने का काम करते थे. इसमें कुछ ऐसे सफेदपोश भी लिप्त है जो शहर के बड़े अखबार में काम करते है जबकि कुछ आठवी फेल यूट्यूबर्स है जिनके पास पत्रकारिता की डिग्री की बजाय 'क्राइम रिकार्ड' है. यह लोग ही पीड़ितों में दहशत निर्माण करके भागचंदानी से सुलह करने के लिए मजबूर करते थे. जानकारों के अनुसार साथियों के उजागर होने पर ही भागचंदानी रैकेट ध्वस्त हो सकता है. पुलिस ने भी इस दिशा में जांच की आगे बढ़ाई है. भागचंदानी को तहसील पुलिस ने गारमेंट व्यापारी हरीष केवलरमानी से दो लाख रुपए की उगाही करने के आरोप में गिरफ्तार किया था. वह चार दिनों से पुलिस की हिरासत में था. हिरासत खत्म होने पर शनिवार को उसे अदालत में पेश किया गया. अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया. अब सोमवार को जरीपटका में दर्ज मामलों में उसकी गिरफ्तारी की जाएगी.