मीरा-भाईंदर: सरनाईक का आरोप, आयुक्त के घर भीड़ ने दबाव बनाया
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परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने आरोप लगाया है कि मीरा-भाईंदर महानगरपालिका के आयुक्त के निवास पर एक भीड़ ने घुसकर उन पर दबाव बनाया। सरनाईक का कहना है कि यह सब महानगरपालिका के पत्रकारों और जागरूक नागरिकों पर कथित हमलों के बाद हुआ। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
सरनाईक का दावा है कि पत्रकारों और नागरिकों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 353 के तहत गुनाह दर्ज कराने के लिए आयुक्त पर दबाव डाला गया। उन्होंने मांग की है कि मामले की गहरी जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। यह मांग उन्होंने राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक और मीरा-भाईंदर के पुलिस आयुक्त से की है।
हाल की घटनाओं पर नाराजगी जताते हुए सरनाईक ने शहर की लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर चिंता जताई। उनके मुताबिक, 17 साल के विधायक कार्यकाल में उन्होंने ऐसी घटनाएं पहले कभी नहीं देखीं। उन्होंने कहा कि जनता ने भाजपा को बड़ा बहुमत दिया है, लेकिन उस बहुमत का इस्तेमाल लोकतांत्रिक मूल्यों के दायरे में ही होना चाहिए। उनका कहना है कि बहुमत मिलने से किसी को दादागिरी का अधिकार नहीं मिल जाता।
सरनाईक ने महानगरपालिका सभागार के हंगामे, पत्रकारों पर कथित हमलों और जागरूक नागरिकों की पिटाई को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हैं। उनका दावा है कि उन्होंने ऐसे वीडियो देखे हैं जिनमें कुछ पार्षद पत्रकार कक्ष और नागरिक कक्ष में मारपीट करते दिख रहे हैं।
सरनाईक के आरोप के मुताबिक, घटना की रात देर से पत्रकारों के फोन आए तो उन्होंने आयुक्त के निवास पर हुई बात की जानकारी ली। फिर उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को भी मौके पर भेजा। उनका आरोप है कि उस वक्त विधायक नरेंद्र मेहता और कुछ पार्षदों के साथ करीब 250 से 300 लोगों की भीड़ आयुक्त के घर गई थी।
सरनाईक ने बताया कि उन्होंने पुलिस उपायुक्त, महानगरपालिका आयुक्त और अतिरिक्त आयुक्त से बात करके पूछा कि यह धारा किस आधार पर लगाई जाएगी। उनके मुताबिक, आयुक्त और अतिरिक्त आयुक्त ने शुरू में कहा था कि ये लोग सिर्फ एक पत्र देने आए थे। लेकिन सरनाईक का आरोप है कि इसके बाद दबाव में सुबह तड़के गुनाह दर्ज किया गया।
सरनाईक ने आयुक्त के परिवार की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उनके मुताबिक, घटना के वक्त आयुक्त की पत्नी और छोटे बच्चे घर पर थे। उन्होंने कहा कि अगर किसी प्रशासनिक अधिकारी के घर जाकर भीड़ ने दबाव डालने की कोशिश की है, तो यह बेहद गंभीर बात है। निवास पर असल में क्या हुआ, यह जांच से ही साफ होगा।
सरनाईक ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अगर आयुक्त के निवास में गैरकानूनी तरीके से घुसना या दबाव डालना साबित हो, तो संबंधित लोगों पर गुनाह दर्ज हों। उन्होंने राज्यपाल से यह भी मांग की है कि आरोपित जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई हो और उनका पार्षद पद रद्द करने पर विचार किया जाए।
सरनाईक ने कहा, "मीरा-भाईंदर में हो रही ये घटनाएं लोकतंत्र पर कलंक लगाने वाली हैं। बहुमत मिला है, इसलिए किसी को दादागिरी करने का अधिकार नहीं मिल जाता। कानून का राज बना रहे, इसके लिए दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।"
अब नजर इस पर है कि आरोपों की सच्चाई परखने के लिए राज्य सरकार और पुलिस क्या रुख अपनाती हैं। विधायक नरेंद्र मेहता और संबंधित पार्षदों की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी नहीं मिली है, इसलिए उनका पक्ष सामने आना भी अहम होगा। जांच के बाद ही असली स्थिति साफ होगी।