नागपुर में 20 अक्टूबर को संघ का विजयादशमी उत्सव, धनखड़ और इजराइली वाणिज्य दूत को न्योता, कांग्रेस ने सरकार को घेरा
आरएसएस की विज्ञप्ति के मुताबिक नागपुर के रेशिमबाग मैदान में होने वाले विजयादशमी उत्सव में जगदीप धनखड़ और यानिव रेवाच को अतिथि के तौर पर बुलाया गया है; कांग्रेस ने मोदी सरकार को निशाने पर लिया है।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस इस साल अपना विजयादशमी उत्सव 20 अक्टूबर 2026 को नागपुर में मनाने जा रहा है। कार्यक्रम रेशिमबाग मैदान में होगा और सुबह 7:40 बजे से शुरू होगा। इस बार का उत्सव इसलिए भी खास है कि इसी के साथ संघ के शताब्दी वर्ष के जश्न का समापन होगा।
संघ की तरफ से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया गया है कि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और भारत में इजराइल के महावाणिज्य दूत यानिव रेवाच को मेहमान के तौर पर बुलाया गया है। रेवाच मुंबई में इजराइल के कॉन्सुल जनरल हैं। संघ ने कहा है कि शताब्दी वर्ष के समापन के गवाह बनने वाले इस उत्सव में बुलाए गए अतिथियों में ये दोनों नाम शामिल हैं, और उसके हिसाब से यह आयोजन संगठन के लिए मील का पत्थर होगा।
मंच पर इस बार दैनिक जागरण के प्रधान संपादक संजय गुप्ता मुख्य अतिथि की भूमिका में रहेंगे। संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत हमेशा की तरह लोगों को संबोधित करेंगे। परंपरा के मुताबिक उनके भाषण में देश के मौजूदा सामाजिक और राष्ट्रीय मसलों पर संघ की सोच रखी जाएगी। कार्यक्रम में संघ के पदाधिकारी, बुलाए गए गणमान्य लोग और बड़ी संख्या में स्वयंसेवक एक साथ जुटेंगे।
संघ के लिए विजयादशमी का उत्सव हर साल का सबसे अहम आयोजन माना जाता है। संघ की स्थापना 1925 में नागपुर में ही हुई थी, इसलिए सौ साल पूरे होने का यह समापन समारोह शहर के लिए भी बड़ी बात है।
धनखड़ के आने की खबर पर लोगों की नजर इसलिए भी है कि उन्होंने जुलाई 2025 में सेहत का हवाला देकर उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति का पद अचानक छोड़ दिया था। नागपुर के मंच पर उनकी मौजूदगी को लेकर लोगों में उत्सुकता रहने की उम्मीद है।
न्योते की खबर बाहर आते ही सियासी गलियारों में चर्चा गर्म हो गई। विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इस बहाने मोदी सरकार पर हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि यह मामला देश की व्यवस्था के अंतर्विरोधों को सामने लाता है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि एक तरफ आरएसएस ने पूर्व उपराष्ट्रपति को अपने इतने बड़े समारोह में बुलाया है, वहीं दूसरी तरफ मोदी सरकार ने उन्हें अब तक सरकारी आवास तक नहीं दिया। रमेश के मुताबिक पिछले साल जुलाई में अचानक इस्तीफा देने के बाद से धनखड़ इस आवास के हकदार हैं।
नियमों के हिसाब से पूर्व उपराष्ट्रपति को आवास मिलना चाहिए, पर इस्तीफे को इतना वक्त बीत जाने के बाद भी यह नहीं मिला है। कांग्रेस ने अब इसे राजनीतिक मुद्दा बना लिया है। इस बहस के बीच 20 अक्टूबर का नागपुर का यह उत्सव सुरक्षा, संगठन और विचारधारा, तीनों के लिहाज से अहम माना जा रहा है, और संघ के शताब्दी समापन पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं।