अमरावती में शिंदे बोले, हिम्मत न करता तो महाराष्ट्र 15-20 साल पीछे जाता
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में शिवसेना उम्मीदवार किरण सरनाईक के प्रचार में शिवसेना की बगावत का जिक्र किया।
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उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अमरावती में शिवसेना की बगावत का जिक्र करते हुए महाविकास अघाड़ी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "मैंने हिम्मत नहीं की होती तो महाराष्ट्र 15-20 साल पीछे चला गया होता।" यह बात उन्होंने अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के प्रचार में दिए भाषण में कही। भाषण में उन्होंने शिवसेना ठाकरे गुट और महाविकास अघाड़ी का भी नाम लिया।
राज्य में अभी विधान परिषद चुनाव का माहौल है। इसी सिलसिले में शिंदे अमरावती पहुंचे। वे अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से लड़ रहे शिवसेना के उम्मीदवार किरण सरनाईक के प्रचार के लिए आए थे।
बगावत की बात करते हुए शिंदे ने अपने फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा, "मैंने हिम्मत नहीं की होती, तो महाराष्ट्र 15-20 साल पीछे चला गया होता।" उन्होंने विरोधियों को याद दिलाया कि शिवसेना से अलग रुख लेने के बाद राज्य में सत्ता का समीकरण बदल गया और महाविकास अघाड़ी की सरकार गिर गई।
शिंदे ने अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से खड़ी निर्दलीय उम्मीदवार प्रीती रेवने का शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। उन्होंने बताया कि सरनाईक के प्रचार को समर्थन देते हुए यह चुनाव महायुति के तौर पर लड़ा जा रहा है।
शिक्षकों की मांगों पर शिंदे ने कहा कि पुरानी पेंशन योजना और दूसरे सवाल हल करने के लिए सरकार कटिबद्ध है। उनके शब्द थे, "मैं दिया हुआ वचन निभाने वाला आदमी हूं। एक बार कमिटमेंट दे दी, तो उसे पूरा करने की कोशिश करता हूं।" उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षक हर किसी की जिंदगी में अहम होता है, किरण सरनाईक शिक्षकों के काम आगे बढ़ाएंगे और जरूरी फंड की कमी नहीं पड़ने दी जाएगी।
राज्य के सूखे के हालात पर शिंदे ने कहा कि सूखा राहत के लिए फंड कम नहीं पड़ने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि किसानों को दिवाली से पहले पांच हजार रुपये दिए जाएंगे। उसके बाद पात्र किसानों को दूसरी रियायतें भी दी जाएंगी, ऐसा आश्वासन उन्होंने दिया।
अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव इन दिनों चर्चा में है। महायुति की तरफ से किरण सरनाईक को उम्मीदवारी मिली है, लेकिन शिवसेना के बागी नेता श्रीकांत देशपांडे मैदान में डटे हुए हैं। इस वजह से इलाके के राजनीतिक समीकरण अहम हो गए हैं।
शिंदे की सभा में शिक्षकों के सवाल, पुरानी पेंशन, किसानों की मदद और शिवसेना की बगावत जैसे मुद्दों पर जोर रहा। अब राजनीतिक हलकों की नजर इस पर है कि इस चुनाव में मतदाता किसे चुनते हैं।