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03:11 IST

जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने पर हिरासत: CJP के अभिजीत दिपके ने केंद्र से पूछे सवाल

नागपुर में कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने जेन-जी आंदोलन की विदेशी फंडिंग की जांच की मांग की और केंद्र व राज्य सरकार पर सवाल उठाए।

जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने पर हिरासत: CJP के अभिजीत दिपके ने केंद्र से पूछे सवाल तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने मांग की है कि जेन-जी आंदोलन को विदेशी फंडिंग मिलने के आरोपों की गहरी जांच हो। दिपके का कहना है कि अगर इस बात के कोई सबूत हैं कि आंदोलन को विदेशी निधि मिली, तो उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने रखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक उन सबूतों की जांच करके उचित कार्रवाई होनी चाहिए, और सिर्फ आरोप लगा देने से बात नहीं बनती।

दिपके ने यह चुनौती दिल्ली रवाना होने से पहले नागपुर में दी। वहां उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार दोनों पर निशाना साधा। राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विपक्ष पर पाकिस्तान की भाषा बोलने का आरोप लगाया था। दिपके ने इस आरोप पर आपत्ति जताई।

दिपके ने कहा कि पाकिस्तान, चीन और अमेरिका का जिक्र करने की जगह सरकार को राज्य की सूखे जैसी हालत और किसानों की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। धम्मचक्र प्रवर्तन दिन के मौके पर वे दीक्षाभूमि पहुंचे और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर को नमन किया।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के मामले में CJP के 2 नेताओं को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। इस पर दिपके ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल किया कि क्या देश में अघोषित आपातकाल चल रहा है।

दिपके ने कहा कि अगर आपातकाल लगाना ही है, तो सरकार को उसका औपचारिक ऐलान करने की हिम्मत दिखानी चाहिए। उनका कहना था कि जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने की वजह से अगर 5 दिन न्यायिक हिरासत में रहना पड़ रहा है, तो इस व्यवस्था को लोकतंत्र कैसे कहा जाए। उन्होंने कहा कि आपातकाल के समय भी ऐसी स्थिति नहीं थी।

उन्होंने पूछा कि क्या अब देश में तिरंगा फहराना ही सबसे बड़ा अपराध बन गया है। दिपके ने कहा कि देश पर कोई विचारधारा थोपने की कोशिश की जा सकती है, लेकिन भारत डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों और संविधान के रास्ते पर ही चलेगा।

इंडिया गठबंधन को लेकर दिपके ने कहा कि वह एक स्वतंत्र दबाव समूह के रूप में काम करता है। उनके मुताबिक स्वतंत्र राजनीतिक भूमिका लेने का मतलब इंडिया गठबंधन के खिलाफ होना नहीं है।

दिपके ने साफ किया कि राजनीतिक दलों में फूट, चुनाव चिह्न सीज किए जाने और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने जैसे मामलों में उन्हें सर्वोच्च न्यायालय से उचित भूमिका की उम्मीद है।

बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे का हवाला देते हुए उन्होंने सरकार की भूमिका की आलोचना की। उन्होंने कहा कि अगर मतदाताओं को इस बार वोट डालने का मौका नहीं मिला और वे अगली बार वोट डालें, तो क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अगला चुनाव लड़ने से मना किया जाएगा।

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