मनोज जरांगे पाटील बोले, पांच हजार रुपये की मदद किसानों के साथ मज़ाक
सूखे से परेशान किसानों को दिवाली से पहले पांच हजार रुपये की सरकारी मदद पर मनोज जरांगे पाटील ने सवाल उठाए और हेक्टेयर पीछे एक लाख रुपये की मांग की।
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इस साल राज्य में बारिश ने दगा दिया, जिससे किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। खरीफ सीज़न की फसलों को नुकसान पहुंचा है और किसान आर्थिक तंगी में फंस गए हैं। इसी बीच राज्य सरकार ने सूखाग्रस्त किसानों को दिवाली से पहले हर किसान को पांच हजार रुपये की मदद देने का ऐलान किया है। लेकिन मदद की इस रकम को लेकर अब राजनीतिक माहौल गरमा गया है। मराठा आरक्षण आंदोलन के कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटील ने भी सरकार की कड़ी आलोचना की है।
सोमठाणा गढ़ पर रेणुका माता के दर्शन करने के बाद मनोज जरांगे पाटील ने मीडिया से बात की और सरकार की मदद पर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि सूखे की वजह से किसानों का भारी नुकसान हुआ है, ऐसे में उन्हें हेक्टेयर पीछे एक लाख रुपये का अनुदान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस हालत में पांच हजार रुपये देना किसानों के ज़ख्म पर मरहम-पट्टी जैसा है।
जरांगे पाटील ने कहा कि दिवाली से पहले पांच हजार रुपये देने की घोषणा से किसानों की समस्याएं हल नहीं होंगी। उनके मुताबिक किसानों को जितना नुकसान हुआ है, उसके मुकाबले यह मदद कम है। इसलिए उन्होंने मांग की कि सरकार किसानों को हेक्टेयर पीछे एक लाख रुपये का अनुदान दे।
जरांगे पाटील ने यह आरोप भी लगाया कि सरकार ने जो मदद घोषित की है, वह किसानों का ध्यान आंदोलन और मोर्चों से हटाने की कोशिश है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसानों को मदद के लिए बैंकों के दरवाज़े पर खड़ा रहना पड़े, तो यह हालत ठीक नहीं है।
इस बीच, सरकार की मदद की घोषणा पर विपक्षी पार्टियों ने भी सवाल उठाए हैं। सूखे से हुए नुकसान के मुकाबले पांच हजार रुपये की मदद को कम बताते हुए हेक्टेयर पीछे एक लाख रुपये की मदद की मांग की जा रही है।
अब किसानों की नज़र इस पर है कि सूखाग्रस्त किसानों को असल में कितनी मदद मिलेगी, इसके लिए मापदंड क्या होंगे और पैसा कब खातों में जमा होगा।