विदर्भ में सूखे की पकड़ और कसी, 13 और तालुके सूखाग्रस्त सूची में जुड़े
राज्य सरकार ने विदर्भ के 13 और तालुकाओं को सूखाग्रस्त इलाकों की सूची में जोड़ा है, जिससे क्षेत्र में ऐसे तालुकाओं की कुल संख्या 108 हो गई है।
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नागपुर: विदर्भ में सूखे की पकड़ और कसती जा रही है। राज्य सरकार ने क्षेत्र के 13 और तालुकाओं को सूखाग्रस्त इलाकों की सूची में जोड़ दिया है, और इसके साथ पूरे विदर्भ में सूखाग्रस्त तालुकाओं की कुल संख्या 108 पर पहुंच गई है। इस ताजा बढ़ोतरी से और इलाके सूखे के आकलन के दायरे में आ गए हैं, जिससे खेती को हुए नुकसान और किसानों के सामने खड़ी परेशानियों को लेकर चिंता बढ़ी है।
नई बढ़ोतरी के बाद नागपुर डिवीजन में सूखाग्रस्त तालुकाओं की संख्या 39 से बढ़कर 52 हो गई है। दूसरी तरफ अमरावती डिवीजन में सूखाग्रस्त तालुकाओं की संख्या 56 बनी हुई है। यानी नागपुर डिवीजन में यह संख्या करीब एक तिहाई बढ़ी है, और यह इलाके की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सामने खड़ी चुनौती के बढ़ते पैमाने को दिखाती है।
नए जोड़े गए तालुके नागपुर डिवीजन के चार जिलों में फैले हुए हैं। वर्धा जिले से एक तालुका, करंजा, इस सूची में जोड़ा गया है। भंडारा जिले से दो तालुके, मोहाडी और तुमसर, सूची में आए हैं।
सबसे बड़ा हिस्सा गोंदिया जिले का है, जहां से सात तालुके सूखाग्रस्त श्रेणी में शामिल किए गए हैं। ये हैं गोंदिया, आमगांव, देवरी, सालेकसा, अर्जुनी मोरगांव, सडक अर्जुनी और गोरेगांव। इसके अलावा चंद्रपुर जिले के तीन तालुके, ब्रह्मपुरी, जिवती और बल्लारपुर, भी नई सूची में शामिल हैं।
यह बढ़ोतरी बताती है कि विदर्भ में सूखे से जुड़ी चिंताओं का भौगोलिक दायरा लगातार फैलता जा रहा है। अब जब ज्यादा तालुके आधिकारिक सूची में आ गए हैं, तो ध्यान फसलों को हुए नुकसान का आकलन करने और प्रभावित किसानों को मिलने वाली मदद तय करने पर रहेगा।
हालांकि किसी तालुका के सूखाग्रस्त सूची में आने भर से मुआवजे की रकम तय नहीं हो जाती और न ही तुरंत राहत की गारंटी मिलती है। किसानों को मिलने वाली मदद लागू सरकारी आदेशों, फसल नुकसान के आकलन और तय पात्रता शर्तों पर निर्भर करेगी।
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