अभिजीत दीपके की हिरासत पर राज ठाकरे का मोदी और शाह पर हमला, बोले- आंदोलन का अधिकार न छीनें
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पर हुकूमशाही का आरोप लगाया।
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देशभर में आंदोलन चल रहा है। दिल्ली में पहले AISF ने और फिर INDIA गठबंधन ने जोरदार प्रदर्शन किया। शनिवार, 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन जंतर मंतर पर होना था, लेकिन उससे पहले ही दिल्ली पुलिस ने CJP के अभिजित दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास समेत दूसरे पदाधिकारियों को हिरासत में ले लिया। इस पर देशभर से प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं।
इसी बीच मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने इस पर बड़ी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पर टिप्पणी की। राज ठाकरे ने कहा, "मोदी और शाह की जोड़ी के मन और दिमाग में बेहद पराकाष्ठा की तानाशाही बैठी है।"
पोस्ट की शुरुआत राज ठाकरे ने भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के एक वाक्य से की, "No nation can be grateful at the cost of its liberty"। उन्होंने कहा कि अंबेडकर ने नवंबर 1949 में संविधान का मसौदा पेश करते हुए यह बात कही थी। राज ठाकरे के मुताबिक किसी नेता की अंधभक्ति या उसके मनमाने बर्ताव को बढ़ावा देने के लिए देश की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति जैसे मूल्य दांव पर नहीं लगने चाहिए।
राज ठाकरे ने कहा कि यह वाक्य आज फिर दोहराना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि इस तानाशाही के बल पर इस जोड़ी ने देश की सारी व्यवस्थाओं को काबू में करके सत्ता हासिल की, और यह सत्ता मुट्ठीभर उद्योगपतियों के हित में चलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि सत्ता के इस घमंड का विरोध करने और प्रदर्शन करने पर अगर आंदोलनकारियों को कुचला जाएगा और गिरफ्तार किया जाएगा, तो इस बेलगाम शासन को नीचे से ऊपर तक उखाड़ फेंकना चाहिए।
राज ठाकरे ने सवाल उठाया, "इस देश में आंदोलन करने ही नहीं हैं क्या? आपको सवाल पूछने ही नहीं हैं क्या? आंदोलन का अधिकार छीनने वाले आप कौन होते हैं?" उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 3 अक्टूबर से दिल्ली में आंदोलन चल रहे हैं। उनके मुताबिक सरकार दिल्ली पुलिस को साथ लेकर सिर्फ आंदोलनकारियों को ही नहीं कुचल रही थी, बल्कि आंदोलन को कवर करने वाली महिला पत्रकारों का भी उत्पीड़न कर रही थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि आज दिल्ली में आंदोलन होने के डर से मेट्रो सेवा बंद की गई, सड़कें रोकी गईं, इंटरनेट बंद किया गया और बस सेवा रोकी गई। राज ठाकरे के मुताबिक आंदोलनकारियों को विमान से उठाकर ले जाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश के 20-30 साल के युवा बेचैन हैं, उन्हें अपना भविष्य नहीं दिख रहा, इसलिए वे शांति से सड़क पर उतरकर आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने पूछा कि मोदी अब दुनिया भर में जाकर किस मुंह से कहेंगे कि हमारे देश में लोकतंत्र है।
चुनाव आयोग को लेकर राज ठाकरे ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि ज्ञानेश कुमार के लिए इतना प्यार क्यों है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वायत्त संस्था है और उसके प्रमुख ने कोई गड़बड़ी की हो तो उसका इस्तीफा होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पूरी चुनाव व्यवस्था ईमानदार और पारदर्शी होनी चाहिए, इस मांग में गलत क्या है। राज ठाकरे ने सवाल किया कि क्या दोनों को डर है कि ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना पड़ा और उन्होंने "वोट चोरी" के सूत्रधारों के नाम बता दिए तो अब तक की सत्ता का पूरा राज खुल जाएगा।
राज ठाकरे ने संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (क) और (ख) का हवाला देते हुए कहा कि नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि कल सर्वोच्च न्यायालय ने भी पूछा कि मक्खी मारने के लिए हथौड़ा क्यों इस्तेमाल कर रहे हैं। उनके मुताबिक महाराष्ट्र में पुलिस आमतौर पर आंदोलनकारियों को हिरासत में लेकर छोड़ देती है और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को ठेस न पहुंचे, इसका ध्यान रखती है। दिल्ली में आंदोलन कवर करने वाली महिला पत्रकारों की शिकायत है कि पुलिस ने हिरासत में उनका उत्पीड़न किया, और राज ठाकरे ने पूछा कि जब कवर करने वालों का उत्पीड़न हो रहा है तो आंदोलनकारियों से ठीक बर्ताव की क्या गारंटी है।
उन्होंने कहा कि देश के युवाओं ने आपको झुकाया और धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिवाया, यह गुस्सा अभी शांत नहीं हुआ दिखता है। राज ठाकरे के मुताबिक अन्ना हजारे के आंदोलन के वक्त मोदी-शाह गुजरात में आंदोलन होने दे रहे थे क्योंकि वे फायदे के थे, लेकिन सत्ता में रहते उसी गुजरात में उनकी सरकार के खिलाफ कई आंदोलन कुचले गए। उन्होंने कहा कि इससे साफ दिखता है कि ये दिखावटी और दोहरे चरित्र के हैं।
राज ठाकरे ने नेटफ्लिक्स की डॉक्यूमेंट्री "How to Become a Tyrant" का जिक्र करते हुए कहा कि शायद अमित शाह इसे रोज गंभीरता से देख रहे हैं। उन्होंने सलाह दी कि जिस गुजरात से आप आते हैं, वहीं के महात्मा गांधी के शांतिपूर्ण आंदोलनों और स्वतंत्रता आंदोलन के बारे में थोड़ा पढ़ें। उन्होंने कहा कि आज सत्ता में हैं तो हमेशा रहेंगे, यह उम्मीद न रखें, क्योंकि सत्ता का अमरपट्टा लेकर कोई पैदा नहीं हुआ। उनके मुताबिक आंदोलन करने वाले हर किसी को आंदोलन का अधिकार है और वह अबाधित रहना चाहिए।
राज ठाकरे की इस पोस्ट से SIR प्रक्रिया को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद को और धार मिली है। दिल्ली का आंदोलन, CJP पदाधिकारियों को हिरासत में लेने की घटना और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बढ़ने की संभावना है।
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