ठाकरे बंधुओं का मोर्चा जनता के लिए नहीं, पिकनिक था: परिणय फुके
भाजपा विधायक डॉ. परिणय फुके ने ठाकरे बंधुओं के मोर्चे पर निशाना साधा और इसे अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाने की कोशिश बताया।
नागपुर: भाजपा विधायक डॉ. परिणय फुके ने कहा कि ठाकरे बंधुओं ने आज जो मोर्चा निकाला, वह जनता के सवालों को लेकर आंदोलन नहीं था। उनके मुताबिक यह सिर्फ रविवार की पिकनिक थी, जिसके जरिए मीडिया की चर्चा में बने रहने और अपना खत्म हो चुका राजनीतिक अस्तित्व बचाने की बेचारी कोशिश की गई।
मीडिया से बात करते हुए फुके ने कहा, "आज का ठाकरे बंधुओं का मोर्चा आम नागरिकों की आंखों में धूल झोंकना है। अपनी खत्म हो चुकी राजनीतिक दुकानदारी को बचाने के लिए यह मोर्चा निकाला गया था।"
डॉ. फुके ने मतदाता सूची का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद विपक्ष की तरफ से मतदाता सूचियों पर गंभीर आपत्तियां उठाई गई थीं। राहुल गांधी ने मतदाता सूचियों में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। शरद पवार और उद्धव ठाकरे ने भी सूची की कथित गलतियां चुनाव आयोग के सामने रखी थीं। दोहरे और तिहरे नामों की शिकायतें भी की गईं। डॉ. फुके का दावा है कि इन्हीं को देखते हुए चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया शुरू की।
फुके ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों से सहयोग करने और BLO नियुक्त करके प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अपील की थी। उनके मुताबिक मनसे और उबाठा गुट ने एक भी BLO नियुक्त नहीं किया। डॉ. फुके ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने BLO नियुक्त किए, लेकिन उन्होंने भी उम्मीद के मुताबिक काम नहीं किया।
उन्होंने कहा, "जंतरमंतर के आंदोलन के बाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग हुई और उसके बाद विपक्ष को अचानक जाग आई। विपक्ष की भूमिका अब दीपके निभा रहे हैं, यह जनता के ध्यान में आ गया है।"
डॉ. फुके ने आरोप लगाया कि ठाकरे बंधु दीपके के आंदोलन से बड़ा आंदोलन खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "आज के मोर्चे में किराए पर लाए गए लोग भी थे। भीड़ जमा करके राजनीतिक ताकत दिखाने की यह कोशिश थी।"
राज ठाकरे के MPSC आंदोलन में शामिल होने पर भी फुके ने सवाल उठाए। डॉ. फुके ने मनसे की राजनीतिक ताकत पर सवालिया निशान लगाया। उन्होंने कहा, "राज ठाकरे की पार्टी में अब उंगलियों पर गिनने लायक ही कार्यकर्ता बचे हैं। इसलिए वे अपनी ताकत पर कहीं भी बड़ा आंदोलन खड़ा नहीं कर पाते।"
फुके ने कहा कि मुंबई में मनसे को उबाठा गुट के साथ मिलकर आंदोलन करना पड़ रहा है। उनके मुताबिक महाराष्ट्र के बाकी हिस्सों में मनसे के पास काफी कार्यकर्ता नहीं हैं, इसलिए वह दूसरी पार्टियों के आंदोलनों में शामिल होकर अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाने की कोशिश कर रही है।
आखिर में विधायक डॉ. परिणय फुके ने तंज कसते हुए कहा, "अपनी राजनीतिक दुकान चलाते रहने के लिए दूसरी पार्टियों के आंदोलन में शामिल होना बेचारी कोशिश है।"
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