SIR पर घमासान के बीच 42 रिटायर्ड जजों और अफसरों का खुला पत्र, ज्ञानेश कुमार का समर्थन
देश के 42 रिटायर्ड जजों और वरिष्ठ अफसरों ने खुला पत्र जारी कर कहा है कि SIR प्रक्रिया कानूनी है और राजनीतिक दल आरोप लगाएं तो सबूत भी दें।
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग पर राजनीतिक पार्टियों के आरोपों के बीच देश के 42 रिटायर्ड जजों और रिटायर्ड वरिष्ठ अफसरों ने एक साथ आकर खुला पत्र जारी किया है। पत्र में गंभीर आरोप लगाया गया है कि संवैधानिक संस्थाओं की छवि खराब करने के लिए बिना किसी सबूत के मुहिम चलाई जा रही है।
इन पूर्व जजों और अफसरों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायपालिका और चुनाव आयोग जैसी स्वायत्त संवैधानिक संस्थाओं पर से जनता का भरोसा घटाने की कोशिशें लोकतंत्र के लिए खतरनाक हैं।
वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण, यानी SIR को लेकर इन दिनों पूरे देश में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं। इसी माहौल में पत्र के जरिए इस प्रक्रिया पर अपनी भूमिका साफ की गई है।
पत्र में दावा किया गया है कि SIR की प्रक्रिया 1950 के कानून के मुताबिक पूरी तरह वैध और कानूनी है। उसमें लिखा है कि इस प्रक्रिया का मकसद वोटर लिस्ट से मृत, फर्जी या दूसरी जगह जा चुके लोगों के नाम हटाना और पात्र नागरिकों के नाम जोड़ना है। पूर्व जजों और अफसरों के मुताबिक यह एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसे राजनीतिक साजिश का रंग देकर लोगों में भ्रम फैलाया जा रहा है।
पत्र में इस बात पर भी नाराजगी जताई गई है कि चुनाव आयोग और अदालतों के खिलाफ राजनीतिक मंचों से अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल हो रहा है। चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाने वाली पार्टियों से अपील की गई है कि वे अपनी बात अदालत में हलफनामे और सबूतों के साथ रखें।
EVM को लेकर राजनीतिक रुख पर भी पत्र में तंज कसा गया है। उसमें कहा गया है कि कोई पार्टी चुनाव हार जाए तो EVM पर सवाल उठाती है, लेकिन उसी EVM से जीत मिले तो उसे मान लेती है। पत्र के मुताबिक चुनाव आयोग या न्यायपालिका के खिलाफ आरोप लगाते वक्त राजनीतिक दलों को जिम्मेदारी से पेश आना चाहिए।
पत्र में चेतावनी दी गई है कि संवैधानिक संस्थाओं पर से जनता का भरोसा उठा तो देश में अराजकता के हालात बन सकते हैं और इसका फायदा देश विरोधी ताकतों को मिल सकता है। पूर्व जजों और अफसरों ने कहा है कि राजनीतिक पार्टियां जरूर चुनाव लड़ें, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को धूल में न मिलाएं। किसी को शिकायत हो तो वह सबूतों के साथ अदालत या चुनाव आयोग के सामने रखी जाए।
पत्र में मीडिया से भी कहा गया है कि बिना जांच-पड़ताल के सिर्फ राजनीतिक दावों या अफवाहों को खबर बनाकर आगे न बढ़ाया जाए। नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी राजनीतिक दावे पर आंख मूंदकर भरोसा न करें, तथ्यों की पड़ताल करें और वोट की ताकत पर यकीन रखें।