आठवले की सीजेपी को सलाह: ज्ञानेश कुमार के बजाय छात्रों के मुद्दों पर आंदोलन करें
केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने कॉकरोच जनता पार्टी से कहा कि वह छात्रों के सवालों पर लौटे, जबकि विपक्ष सुप्रीम कोर्ट तक मार्च की तैयारी में है।
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केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) को सलाह दी है कि वह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन करने के बजाय छात्रों के सवालों पर ध्यान दे। आठवले का कहना है कि नीट परीक्षा में पेपरफुटी के मुद्दे पर बनी इस पार्टी को शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और छात्रों की समस्याओं के लिए आंदोलन करना चाहिए।
रविवार को मीडिया से बात करते हुए आठवले ने सीजेपी के आंदोलन की भूमिका पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पार्टी छात्रों के सवालों के लिए बनी थी और उसके कार्यकर्ताओं को अपने असली मकसद पर टिके रहना चाहिए। आठवले ने कहा, "नीट परीक्षा के पेपर लीक का मुद्दा उठाने के लिए आपकी पार्टी बनी थी। आपने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। अब ज्ञानेश कुमार के मामले में पड़ने की क्या जरूरत है?" उन्होंने सुझाव दिया कि छात्रों को अच्छी शिक्षा मिले, परीक्षाएं पारदर्शी तरीके से हों और शिक्षा नीति में जरूरी सुधार हों, इन मांगों को लेकर आंदोलन किया जाए।
आठवले ने ज्ञानेश कुमार का बचाव भी किया। मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के दौरान बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के मुद्दे पर उन्होंने चुनाव आयोग का पक्ष रखा। उनके मुताबिक हटाए गए नामों में प्रवासी मतदाता, दोहरी पंजीकरण वाले मतदाता और दूसरी वजहों से जांच की जरूरत वाली प्रविष्टियां शामिल हैं। आठवले ने 13 करोड़ मतदाताओं के नामों का जिक्र करते हुए दावा किया कि इनमें से छह करोड़ प्रवास से और एक करोड़ दोहरे पंजीकरण से जुड़े हैं।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के "वोट चोरी" के आरोपों पर भी आठवले ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के लोकसभा सदस्यों की संख्या 42 से बढ़कर 99 हो गई। आठवले ने पूछा कि जब कांग्रेस को चुनाव में कामयाबी मिली, तब क्या यह कहा जाए कि भाजपा के वोट चोरी हो गए थे? उनका कहना था कि सरकार जनता के फैसले से बनती है, इसलिए हर नतीजे पर वोट चोरी का आरोप लगाना ठीक नहीं। आठवले ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग वाले आंदोलन को बेबुनियाद बताया और आरोप लगाया कि विपक्ष चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन करके देश में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहा है।
दूसरी तरफ कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों पर सवाल उठाए हैं। चुनाव आयोग ने प्रक्रिया को निष्पक्ष बताते हुए आरोपों को खारिज किया है।
सीजेपी ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए आंदोलन के दौरान पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। इनमें सीजेपी के नेता अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका भी थे। रिहाई के बाद पार्टी नेताओं ने आंदोलन जारी रखने का इरादा जताया है। सीजेपी ने जंतर मंतर पर शांतिपूर्ण आंदोलन के लिए फिर इजाजत मांगने की बात कही है और इजाजत न मिलने पर आगे की दिशा घोषित करने की चेतावनी दी है।
सोमवार, 12 अक्टूबर को कांग्रेस की अगुआई में विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च की तैयारी की। इसके चलते दिल्ली के छह मेट्रो स्टेशन बंद किए गए और कुछ रास्तों पर ट्रैफिक पर पाबंदी लगाई गई।
नीट परीक्षा की गड़बड़ियों और पेपरफुटी के खिलाफ आंदोलन के बाद 25 जुलाई 2026 को धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। राष्ट्रपति ने इस्तीफा स्वीकार किए जाने की आधिकारिक घोषणा की थी। इसके बाद प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई।
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