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02:27 IST

वर्धा की 209 करोड़ की जलापूर्ति योजना मंजूरी के इंतज़ार में अटकी, 14 गांव भी शामिल

महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण की बनाई योजना अक्टूबर 2025 से वरिष्ठ स्तर पर लंबित है।

वर्धा की 209 करोड़ की जलापूर्ति योजना मंजूरी के इंतज़ार में अटकी, 14 गांव भी शामिल तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

वर्धा शहर और आसपास के गांवों में आबादी बढ़ रही है और पानी की मांग भी। इसी को देखते हुए महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण ने एक नई जलापूर्ति योजना तैयार की थी, लेकिन फिलहाल उसे ब्रेक लग गया है। यह प्रस्ताव अक्टूबर 2025 में मंजूरी के लिए वरिष्ठ स्तर पर भेजा गया था और अब तक लंबित है। आने वाले 30 साल की पानी की जरूरत को ध्यान में रखकर बनी इस बड़ी योजना की मंजूरी को लेकर अभी तक कोई साफ तस्वीर नहीं है।

इस योजना में वर्धा शहर के साथ पिपरी (मेघे) और 14 अन्य गांव शामिल किए गए थे। योजना का कुल प्रस्तावित खर्च 209 करोड़ 65 लाख 87 हजार रुपये है। इसके तहत 205 किमी लंबी नई वितरण जलवाहिनी बिछाने का नियोजन था। साथ ही पुरानी प्रादेशिक जलापूर्ति योजना के अलग-अलग कामों की मरम्मत भी होनी थी।

योजना इसलिए बनाई गई थी कि वर्धा शहर में शहरीकरण बढ़ रहा है, शैक्षणिक संस्थाओं की संख्या बढ़ रही है और करीब साढ़े चार लाख आबादी को लंबे समय तक पानी देना है। इसका मुख्य मकसद 2057 तक की पानी की जरूरत पूरी करना और आगे आने वाले संभावित जलसंकट को टालना था।

भविष्य में वर्धा शहर की सीमा बढ़ने की संभावना को देखते हुए प्रस्ताव में कुछ सुधार करने की सूचना दी गई थी। बताया जाता है कि उसके मुताबिक जरूरी बदलाव कर भी दिए गए। लेकिन अब जानकारी है कि शहर की हद बढ़ाने का मुद्दा ही योजना की मंजूरी में रुकावट बन गया है। सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि शहर से सटी कुछ ग्राम पंचायतों ने हद बढ़ाने का विरोध किया है। इसी वजह से योजना की अंतिम मंजूरी का सवाल बना हुआ है और यह कब आगे बढ़ेगी, इस पर अनिश्चितता है।

प्रस्तावित कामों में येळाकेळी में हेडवर्क्स शामिल है, यानी पुराने हेडवर्क्स की मरम्मत और नए हेडवर्क्स का निर्माण। हनुमान टेकडी के जलशुद्धीकरण केंद्र इलाके में पुराने केंद्र की मरम्मत होनी थी और 29 एमएलडी क्षमता का नया जलशुद्धीकरण केंद्र बनना था। इसके अलावा 14 नई पानी की टंकियां प्रस्तावित हैं, यानी शामिल 14 गांवों में अलग-अलग क्षमता की एक-एक टंकी। शहर और आसपास के इलाके में 205 किमी लंबी नई जलवाहिनी डाली जानी थी। पुरानी प्रादेशिक जलापूर्ति योजना की मरम्मत और जरूरी तकनीकी व पूरक काम भी इसमें शामिल हैं।

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