रामदास कदम का आरोप: उद्धव ठाकरे अपनी नाकामी छिपाने को चुनाव आयोग को बदनाम कर रहे हैं
शिवसेना शिंदे गुट के नेता रामदास कदम ने ४ अक्टूबर के संयुक्त मोर्चे से पहले उद्धव और राज ठाकरे पर निशाना साधा।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर महाराष्ट्र की सियासत गरमाई हुई है। राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ४ अक्टूबर को मुंबई में संयुक्त मोर्चा निकालने वाले हैं। इस मोर्चे में दूसरी पार्टियों से भी शामिल होने की अपील की गई है। कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस शरद पवार ने मोर्चे में शामिल होने का रुख जाहिर किया है।
इसी बीच शिवसेना शिंदे गुट के नेता रामदास कदम ने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की आलोचना की। कदम का आरोप है कि अपनी नाकामी छिपाने के लिए चुनाव आयोग को बदनाम किया जा रहा है। उनका कहना है कि उद्धव ठाकरे को आत्मपरीक्षण करना चाहिए।
कदम ने सवाल उठाया कि ठाकरे बंधू मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन क्या उद्धव ठाकरे को लगता है कि जब कांग्रेस के ज्यादा सांसद चुनकर आए, तब ज्ञानेश कुमार ने गड़बड़ी नहीं की थी? कदम ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग को बदनाम करने की इस प्रवृत्ति का वे निषेध करते हैं।
कदम ने कहा कि उद्धव ठाकरे ने जनता की अदालत में जाने की बात कही थी, तो उन्हें चुनाव में जनता का दिया फैसला भी ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "बूंद से जाती है, वो हौद से नहीं आती", यह उद्धव ठाकरे याद रखें। कदम ने उद्धव ठाकरे को यह भी सलाह दी कि वे सोचें कि उनके करीबी लोग उन्हें छोड़कर क्यों चले गए। कदम का यह भी आरोप है कि राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र का मनोरंजन कर रहे हैं और नौटंकी के जरिए लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।
विद्यार्थियों के आंदोलन पर भी रामदास कदम ने बात की। उनके मुताबिक राजनीतिक मुद्दों में विद्यार्थियों को शामिल करना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने ही सवाल उठाएं और उसके लिए वे उनके साथ रहेंगे। कदम ने आरोप लगाया कि विद्यार्थियों के कंधे पर बंदूक रखकर महाराष्ट्र को बदनाम करने की राजनीतिक चाल चली जा रही है।
कदम ने पर्यावरण मंत्री रहते हुए मिठी नदी पर किए गए कामों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि नदी के दोनों किनारों पर सड़कें, अनधिकृत निर्माण पर कार्रवाई, नदी की गहराई और चौड़ाई बढ़ाने के साथ सीवेज ट्रीटमेंट प्रोजेक्ट का प्रस्ताव तैयार किया गया था। कदम का आरोप है कि उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने के बाद पर्यावरण विभाग की जिम्मेदारी आदित्य ठाकरे को दी गई और तब उनके फैसले रोक दिए गए।
४ अक्टूबर के मोर्चे से पहले SIR प्रक्रिया को लेकर लगे आरोपों और आयोग के रुख पर सियासी विवाद जारी है। आयोग इससे पहले स्पष्ट कर चुका है कि फैसले की प्रक्रिया में मतभेदों के बावजूद अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।
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