सुनील तटकरे बोले, किसानों को 5 हजार की मदद कम है, बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री से मिलेंगे
राष्ट्रवादी कांग्रेस के सांसद सुनील तटकरे ने कहा कि किसानों को दी जा रही 5 हजार रुपये की अग्रिम मदद अपर्याप्त है और वे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलेंगे।
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महाराष्ट्र के किसानों के लिए जाहिर की गई आर्थिक मदद को लेकर अब राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यह मदद घोषित की, उसके बाद राजनीतिक गलियारों से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं। 5 हजार रुपये की मदद को लेकर विपक्ष पहले ही सरकार को घेर रहा था, और अब महायुती सरकार के भीतर से भी आवाज उठी है। राष्ट्रवादी कांग्रेस के सांसद सुनील तटकरे ने इस पर टिप्पणी की है।
सुनील तटकरे ने कहा है कि किसानों को दी जा रही पांच हजार रुपये की अग्रिम मदद अपर्याप्त है। उन्होंने साफ किया कि इस मदद को बढ़ाने के लिए वे मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे। तटकरे ने यह बात धाराशिव में मीडिया से बातचीत के दौरान कही।
तटकरे ने यह भी कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस की मांग है कि राज्य का वित्त खाता उसे मिले। उनके मुताबिक दिवंगत अजित पवार जब वित्त मंत्री थे, तब उन्होंने वित्त खाते को अनुशासन के साथ संभाला था। तटकरे ने कहा कि आपदा के समय अजित पवार ने आर्थिक अनुशासन बनाए रखते हुए किसानों को तुरंत आर्थिक मदद दी थी।
इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है कि तटकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास मौजूद वित्त खाते के कामकाज पर परोक्ष रूप से सवाल उठाया है।
राज्य सरकार ने दिवाली से पहले किसानों को तुरंत आर्थिक मदद के तौर पर प्रति किसान पांच हजार रुपये देने की घोषणा की है। हालांकि किसानों के नुकसान और उनकी जरूरतों को देखते हुए यह रकम कम होने की आलोचना हो रही है। इसी पृष्ठभूमि में सुनील तटकरे ने मदद की रकम बढ़ाने की मांग की है। इस वजह से किसान मदद के मुद्दे पर सत्ताधारी महायुती के घटक दलों में भी चर्चा होने की संभावना है।
राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किसानों को दिवाली से पहले प्रति किसान पांच हजार रुपये की तुरंत मदद देने की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया था कि इस साल सूखे से जुड़े फैसले और मदद की प्रक्रिया जल्दी शुरू कर दी गई है।
अब इस मदद की रकम बढ़ाने की मांग सामने आई है। सुनील तटकरे के बयान से किसानों को दी जाने वाली मदद के साथ-साथ यह मुद्दा भी चर्चा में आ गया है कि राज्य के वित्त खाते की जिम्मेदारी किसके पास होनी चाहिए।