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21:13 IST

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष का सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च, दिल्ली में भारी भीड़

विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया से सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया।

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष का सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च, दिल्ली में भारी भीड़ तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

दिल्ली का राजनीतिक माहौल सोमवार को गरम रहा। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष ने सख्त रुख अपनाया। चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितता और विशेष सघन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए विपक्षी दलों के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च निकाला। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई प्रमुख नेता इसमें शामिल हुए। मार्च की वजह से राजधानी की कई सड़कों पर आंदोलनकारियों की भारी भीड़ दिखी और सुरक्षा के लिहाज से पुलिस ने बंदोबस्त बढ़ा दिया।

विपक्ष के इंडिया गठबंधन ने इस आंदोलन को 'चलो दिल्ली - मार्च फॉर डेमोक्रेसी' नाम दिया है। इस मार्च के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है। इस महीने लगभग रोज विपक्षी दल चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन करते दिख रहे हैं। सोमवार को विपक्ष सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने की कोशिश में था, इसलिए इस आंदोलन की अहमियत और बढ़ गई।

मार्च से पहले दिल्ली के इंडिया क्लब में विपक्षी नेताओं की बैठक हुई। उसमें आंदोलन की आगे की दिशा और चुनाव प्रक्रिया की कथित अनियमितता के खिलाफ क्या कदम उठाए जाएं, इस पर चर्चा हुई। बैठक के बाद राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की अगुवाई में नेता कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया से बाराखंबा रोड होते हुए सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़े। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत अलग-अलग विपक्षी दलों के नेता भी साथ थे। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा प्रियंका गांधी के साथ चलती दिखीं। सोशल मीडिया पर आई तस्वीरों के मुताबिक कनॉट प्लेस से मंडी हाउस तक के इलाके में आंदोलनकारियों की बड़ी भीड़ जमा थी।

समाजवादी पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी मार्च में शामिल हुए। उन्होंने केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की आलोचना की। अखिलेश यादव ने कहा कि लोकतंत्र को बचाना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने भाजपा पर चुनाव प्रक्रिया में हेराफेरी का आरोप लगाया और दावा किया कि भाजपा सत्ता में बनी रहना चाहती है और चुनाव आयोग के साथ मिलकर संविधान और लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। उनके मुताबिक भाजपा को सत्ता से हटाए बिना देश की हिफाजत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के कामकाज के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रहेगी और चुनाव आयोग को हटाने की मांग भी की।

मार्च आगे बढ़ा तो खबर आई कि दिल्ली पुलिस ने उसे रोक दिया। पहले बैरिकेड के पास राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को भी रोका गया। इस पर आंदोलन में शामिल कार्यकर्ताओं ने विरोध किया और कुछ देर अफरातफरी का माहौल रहा। सूत्रों ने बताया कि विपक्षी दलों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है।

मार्च से पहले राहुल गांधी ने कहा था कि यह मार्च भगवान शिव की बारात जैसा है और किसी भी विचारधारा का व्यक्ति इसमें शामिल हो सकता है। उन्होंने लोकतंत्र और चुनाव प्रक्रिया के मुद्दे पर सबको साथ आने की अपील की।

सूत्रों के मुताबिक विपक्षी दलों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में 3 याचिकाएं दाखिल होंगी, जो अधिवक्ता प्रसन्ना के वकालतनामे के साथ लगेंगी। बताया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने 5 से 10 नेताओं को उनके वकीलों के साथ परिसर के फाइलिंग काउंटर पर याचिका दाखिल करने की सहमति दी है। सूत्रों की जानकारी के मुताबिक यह काउंटर हाई सिक्योरिटी जोन के बाहर है, इसलिए वहां जाने के लिए खास पास की जरूरत नहीं है। यह भी बताया गया कि भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस पर सहमति जताई है।

कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि यह सिर्फ विरोध मार्च नहीं, बल्कि सिद्धांतों की लड़ाई है। कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर सवालों की झड़ी लगाई और दावा किया कि विपक्ष के सवाल वाजिब हैं। उन्होंने पूछा कि फॉर्म 6 को आधिकारिक मंजूरी किसने दी, फॉर्म 7 बड़े पैमाने पर छापने का आदेश किसने दिया और पहले से छपे फॉर्म किसने उपलब्ध कराए। प्रियांक खरगे ने यह भी पूछा कि ज्ञानेश कुमार कहां हैं और कहा कि संवैधानिक संस्था का प्रमुख ही सामने न आए तो उससे सवाल पूछना जरूरी है।

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