मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:26 IST

SIR के तहत मतदार सूची से नाम हटाने पर रोक से मुंबई हाई कोर्ट का इनकार

मुंबई हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र में SIR प्रक्रिया के तहत मतदाताओं के नाम हटाने पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया।

SIR के तहत मतदार सूची से नाम हटाने पर रोक से मुंबई हाई कोर्ट का इनकार
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

महाराष्ट्र में चुनाव आयोग (ECI) 'स्पेशल इंटेन्सिव्ह रिव्हिजन' यानी SIR की प्रक्रिया चला रहा है। इसके तहत मतदार सूची से नाम हटाए जाने पर मुंबई हाई कोर्ट ने फिलहाल रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया। कोर्ट ने इस मामले में कोई भी अंतरिम आदेश देने से मना किया। खंडपीठ ने कहा कि वह 'ज्यूडिशियल प्रोप्राइटी' का पूरी तरह पालन करेगी।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की खंडपीठ ने की। खंडपीठ ने ध्यान दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में ही एक विशेष आदेश जारी किया था। उस आदेश में हाई कोर्टों को SIR प्रक्रिया की कानूनी वैधता या उससे जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करने से रोका गया था।

सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की तरफ से ज्येष्ठ वकील आशुतोष कुंभकोणी पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि देश के कई हाई कोर्ट SIR प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई से पहले ही मना कर चुके हैं। उनके मुताबिक कुछ अदालतों ने याचिकाकर्ताओं से कहा है कि ज्यादा स्पष्टता के लिए वे सुप्रीम कोर्ट जाएं।

मुख्य न्यायमूर्ति ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का मनाही का हुक्म पहले से मौजूद है, इसलिए मुंबई हाई कोर्ट में समानांतर सुनवाई (पैरेलल लिटिगेशन) चलाने का कोई मतलब नहीं बनता। उन्होंने कहा, "इस मामले में पहले से सुप्रीम कोर्ट के रोक के आदेश हैं... इसलिए समानांतर याचिका चलाकर कोई मकसद पूरा नहीं होगा। पहले सुप्रीम कोर्ट को इस विषय पर सुनवाई पूरी करने दीजिए।"

हाई कोर्ट का यह रुख देखने के बाद याचिकाकर्ताओं ने एक और गुजारिश की। उन्होंने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अंतिम सुनवाई होने तक चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए कि कम से कम महाराष्ट्र की मतदार सूचियों से एक भी मतदाता का नाम न हटाया जाए।

मुख्य न्यायमूर्ति ने यह गुजारिश भी पूरी तरह ठुकरा दी। उन्होंने कहा, "नहीं, नहीं, नहीं। हम ऐसा कोई आदेश नहीं देंगे। हम ज्यूडिशियल प्रोप्राइटी का सख्ती से पालन करेंगे।"

हाई कोर्ट को बताया गया कि यह पूरा मामला आने वाली 8 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के सामने सुनवाई के लिए आएगा। इन सब बातों को दर्ज करते हुए मुंबई हाई कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 3 हफ्ते के लिए टाल दी है।

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