मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:26 IST

राज ठाकरे की मांग: महाराष्ट्र में SIR रद्द हो, चुनाव बैलेट पेपर पर कराए जाएं

मुंबई के गर्जना मोर्चे के बाद सभा में राज ठाकरे ने SIR रद्द करने और बैलेट पेपर से चुनाव की मांग रखी।

राज ठाकरे की मांग: महाराष्ट्र में SIR रद्द हो, चुनाव बैलेट पेपर पर कराए जाएं
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

मुंबई में चुनाव आयोग के कामकाज के खिलाफ 'गर्जना मोर्चा' निकाला गया। मोर्चे की अगुवाई राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने की। मेट्रो सिनेमा से मुंबई महापालिका मुख्यालय तक निकले इस मोर्चे में कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी दलों के नेता भी शामिल हुए।

मोर्चे के बाद हुई सभा में राज ठाकरे ने वोटर लिस्ट में हुए बदलाव, विशेष सघन पुनरीक्षण यानी SIR और पूरी चुनाव प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग की कड़ी आलोचना की। उनके भाषण में लगाए गए आरोपों और रखी गई मांगों से महाराष्ट्र की राजनीति में चुनाव प्रक्रिया का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

राज ठाकरे ने अपने भाषण में आरोप लगाया कि देश के चुनावों में 'वोट चोरी' हो रही है। उन्होंने बताया कि वे 2017 से यह मुद्दा उठा रहे हैं। इसी सिलसिले में उन्होंने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी से मुलाकात का जिक्र भी किया।

2024 के चुनाव का हवाला देते हुए राज ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र में जैसा जश्न दिखना चाहिए था, वैसा नहीं दिखा। उनके मुताबिक लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान वोटरों की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ। ये आंकड़े और इनके पीछे की वजहें राज ठाकरे की अपनी बातें हैं, और इन पर चुनाव प्रक्रिया की आधिकारिक जानकारी से अलग से मिलान जरूरी है।

चुनाव आयोग के मुद्दे के साथ राज ठाकरे ने सरकार के कामकाज पर भी बात की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ उद्योगपतियों को प्रोजेक्ट, बंदरगाह और दूसरे संसाधन दिए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के दौर में कई उद्योगपति थे, जबकि आज मुख्य रूप से एक ही उद्योगपति का नाम सामने आता है।

सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं की स्वायत्तता पर भी उन्होंने सवाल उठाए। राज ठाकरे ने दावा किया कि देश के संस्थागत ढांचे में बदलाव हो रहा है, और कहा कि यह मोर्चा इसी के खिलाफ है।

राज ठाकरे ने भाषण में दो मुख्य मांगें रखीं। पहली, महाराष्ट्र में SIR की प्रक्रिया रद्द की जाए। दूसरी, आगे के चुनाव बैलेट पेपर पर कराए जाएं।

राज ठाकरे ने कहा कि बैलेट पेपर पर चुनाव हुए तो चुनाव प्रक्रिया को लेकर 'दूध का दूध और पानी का पानी' हो जाएगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि सत्ता में चाहे जो भी पार्टी आए, वह सही और पारदर्शी रास्ते से आनी चाहिए।

इस बीच, चुनाव आयोग SIR प्रक्रिया की कानूनी वैधता और प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं पर अपना पक्ष रख चुका है। इसलिए राज ठाकरे के आरोपों को उनके राजनीतिक रुख के हिस्से के तौर पर देखना जरूरी है।

राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे का साझा मोर्चा इस आंदोलन का एक और अहम राजनीतिक पहलू रहा। दोनों नेताओं ने पार्टी के झंडे की जगह हाथ में तिरंगा लेकर शामिल होने की अपील की थी।

अब राजनीतिक हलकों की नजर इस पर है कि मोर्चे के बाद ठाकरे बंधु आगे क्या रुख अपनाते हैं, SIR और चुनाव प्रक्रिया को लेकर आंदोलन की अगली दिशा क्या होती है और उनकी मांगों पर चुनाव आयोग का रुख क्या रहता है।

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