कॉकरोच जनता पार्टी के तीन नेता रिहा, एक साल शांति बनाए रखने का मुचलका भरा
अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका को रविवार को कार्यकारी दंडाधिकारी की सुनवाई के बाद छोड़ा गया। शनिवार को दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान से ही उन्हें हिरासत में लिया गया था।
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दिल्ली की सियासत में रविवार को अचानक हलचल तेज हो गई। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के शीर्ष नेता अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका को पुलिस हिरासत से रिहा कर दिया गया है। रविवार को कार्यकारी दंडाधिकारी की अदालत में सुनवाई हुई और उसके बाद तीनों को छोड़ा गया।
इन नेताओं को शनिवार को दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान उतरते ही हिरासत में लिया गया था। जंतर-मंतर पर CJP का विरोध प्रदर्शन तय था और उससे पहले दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था और आंदोलन पर पाबंदियों का हवाला देते हुए विमान के अंदर जाकर तीनों को एहतियातन हिरासत में ले लिया था। CJP आज दोपहर 2 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आगे की दिशा साफ करेगी।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 के तहत, जब किसी को एहतियातन हिरासत में रखा जाता है, तो उसे इसी शर्त पर कानूनी तौर पर छोड़ा जाता है कि वह ज्यादा से ज्यादा एक साल तक शांति भंग नहीं करेगा। इसी नियम के तहत तीनों नेताओं ने दंडाधिकारी के सामने निजी मुचलके पर दस्तखत किए और लिखित में भरोसा दिया कि वे एक साल तक शांति भंग नहीं करेंगे।
अगर वे यह शर्त तोड़ते हैं, तो उन्हें तय रकम भरनी पड़ती है या उनका बॉन्ड जब्त किया जा सकता है। इतना ही नहीं, दंडाधिकारी चाहें तो उस एक साल की बची हुई अवधि के लिए संबंधित व्यक्ति को फिर से जेल भी भेज सकते हैं।
पूरा मामला मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से जुड़ा है। साथ ही मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) में कथित 'वोट चोरी' के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी और कई छात्र-युवा संगठनों का आंदोलन अब और आक्रामक हो गया है।
शनिवार को राजधानी में हजारों प्रदर्शनकारियों को एक साथ हिरासत में लिया गया। शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारी के बावजूद CJP ने पीछे हटने से साफ इनकार कर दिया था।
पुलिस के नियमों के मुताबिक किसी भी व्यक्ति को बिना पूछताछ या सुनवाई के 24 घंटे से ज्यादा हिरासत में नहीं रखा जा सकता और उसे अदालत में पेश करना जरूरी होता है। इसी नियम का पालन करते हुए रविवार सुबह 9 बजे इन नेताओं को दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में कार्यकारी दंडाधिकारी के सामने पेश किया गया।
CJP की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने बताया था कि नेताओं पर BNSS की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की गई है। उनके मुताबिक वे खुद दूसरे वकीलों के साथ पुलिस स्टेशन में मौजूद रहने वाली थीं।
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