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21:13 IST

सीजेआई सूर्यकांत ने विपक्ष की मुलाकात की मांग ठुकराई, चिट्ठी भेजकर बताईं वजहें

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इंडिया गठबंधन के नेताओं से मिलने से इनकार किया और पत्र में कारण बताए।

सीजेआई सूर्यकांत ने विपक्ष की मुलाकात की मांग ठुकराई, चिट्ठी भेजकर बताईं वजहें तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने विपक्ष के इंडिया गठबंधन के नेताओं से मुलाकात की मांग मंजूर नहीं की। गठबंधन के मोर्चे से पहले राहुल गांधी और दूसरे विपक्षी नेताओं ने उनसे मिलने का वक्त मांगा था। सीजेआई ने इसका जवाब चिट्ठी के जरिए दिया और उसमें मुलाकात न हो पाने की वजहें साफ की हैं।

आज के आंदोलन से पहले मीडिया से बात करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, "कल मुझे विपक्षी पार्टियों से मिलने की गुजारिश वाला एक पत्र मिला। मैंने कल रात ही उसका जवाब दे दिया है, जिसमें मैंने बताया है कि मैं क्यों नहीं मिल पाऊंगा। सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सबके लिए खुले हैं। किसी भी आम नागरिक या जनप्रतिनिधियों के किसी भी सदस्य की याचिका का स्वागत है। हर भारतीय नागरिक को अदालत में इंसाफ मांगने का हक है। हम उनकी बात सुनेंगे और कानून के हिसाब से जो ठीक होगा, वही करेंगे।"

खबर के मुताबिक लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सीजेआई को पत्र लिखकर सोमवार शाम 4 से 5 बजे के बीच मिलने की गुजारिश की थी। वे उन्हें एक ज्ञापन सौंपना चाहते थे। इस ज्ञापन में "वोट चोरी" रोकने, मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूचियों की विशेष गहन समीक्षा (एसआईआर) रोकने और मतपत्र प्रणाली पर लौटने की मांग की गई थी।

इससे पहले भी सीजेआई सूर्यकांत ने "वोट चोरी" के आरोपों को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मिलने से इनकार किया था। एसआईआर और चुनाव आयोग के कामकाज में गड़बड़ी के मुद्दे पर इंडिया गठबंधन की ओर से मुलाकात मांगी गई थी। सीजेआई ने तब कहा था कि ऐसे मामले पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। इसी वजह से यह कहा जा रहा है कि मामला अदालत में विचाराधीन होने के कारण प्रशासनिक स्तर पर मुलाकात मुनासिब नहीं है।

इसी बातचीत में सीजेआई सूर्यकांत से "एक देश, एक चुनाव" से जुड़ी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के सुप्रीम कोर्ट दौरे को रद्द करने के बारे में भी पूछा गया। उन्होंने कहा, "इस मामले में तुलनात्मक रूप से ज्यादा वजहें हैं, क्योंकि उस मुद्दे पर (एक देश, एक चुनाव की जेपीसी बैठक को लेकर) अदालत में हितों के संभावित टकराव की स्थिति बन गई थी। इसकी वजह से हमें प्रशासनिक मामलों पर चर्चा करनी पड़ी। मेरे वरिष्ठ न्यायिक साथियों और मेरी सामूहिक राय थी कि हमें किसी भी तरह के हितों के टकराव से बचना चाहिए।"

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