राहुल गांधी को हिरासत में लेने के विरोध में मुंबई युवक कांग्रेस का वांद्रे रिक्लेमेशन पर रास्ता रोको
मुंबई युवक कांग्रेस ने दिल्ली में राहुल गांधी को हिरासत में लेने के विरोध में रात को वांद्रे रिक्लेमेशन पर सड़क रोकी।
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दिल्ली में चुनाव आयोग के दफ्तर में मुलाकात के लिए निकले लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और विपक्ष के दूसरे नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसके विरोध में मुंबई में युवक कांग्रेस आक्रामक हो गई। मुंबई युवक कांग्रेस की तरफ से रात में बांद्रा रिक्लेमेशन पर रास्ता रोको आंदोलन किया गया।
यह आंदोलन मुंबई युवक कांग्रेस की अध्यक्ष झीनत शबरीन की अगुवाई में हुआ। इसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। रात करीब 11 बजे कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए और उन्होंने ट्रैफिक रोक दिया। इस दौरान मोदी सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की गई।
युवक कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता को लेकर सवाल उठाए। आंदोलन करने वालों का आरोप है कि राहुल गांधी और विपक्ष के नेताओं को हिरासत में लेना लोकतंत्र की आवाज दबाने की कोशिश है।
आंदोलन में मुंबई युवक कांग्रेस के महासचिव तेजस चंदूरकर, जिलाध्यक्ष प्रज्ञा ढवले, अजय मिश्रा, शादाब अन्सारी, शिवा यादव, अब्दुल समद और पंकज चौधरी समेत कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे।
इस मौके पर बोलते हुए झीनत शबरीन ने केंद्र और अलग-अलग राज्यों की भाजपा सरकारों पर गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि "वोट चोरी" के मुद्दे पर पूरे देश में गुस्सा है।
शबरीन का आरोप है कि राहुल गांधी करीब 300 सांसदों के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलने जा रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। उन्होंने इसे मोदी सरकार की दबंगई बताया। उन्होंने चेतावनी भी दी कि जब-जब मोदी सरकार राहुलजी की आवाज दबाने की कोशिश करेगी, तब-तब हम राहुलजी के समर्थन में सड़क पर उतरकर संघर्ष करेंगे।
इस बीच युवक कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मुंबई का आंदोलन दबाने की कोशिश में पुलिस ने महिला कार्यकर्ताओं के साथ धक्कामुक्की और मारपीट की। संगठन का यह भी दावा है कि कुछ महिला कार्यकर्ताओं को बाल पकड़कर खींचते हुए पुलिस वैन में डाल दिया गया।
पुलिस की इस कथित दबंगई का मुंबई युवक कांग्रेस ने कड़ा विरोध किया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता के लिए आंदोलन जारी रहेगा।