SIR पर ठाकरे बंधुओं के मोर्चे के बाद रविंद्र चव्हाण ने विपक्ष से पूछे तीन सवाल
ठाकरे बंधुओं के 'विराट गर्जना मोर्चा' के बाद भाजपा के महाराष्ट्र प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने SIR का विरोध करने वालों से घुसपैठियों, दोहरे मतदान और मृत लोगों के नामों पर जवाब मांगा है।
महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों SIR प्रक्रिया को लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। मुंबई में ठाकरे बंधुओं ने SIR और चुनाव प्रक्रिया के मुद्दे पर 'विराट गर्जना मोर्चा' निकाला। इसके बाद भाजपा के महाराष्ट्र प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने विपक्ष पर निशाना साधा है।
रविंद्र चव्हाण ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया। इसमें शाह ने संसद में SIR प्रक्रिया पर अपनी बात रखी थी। इसी का हवाला देते हुए चव्हाण ने SIR का विरोध करने वाले नेताओं और पार्टियों से कुछ सीधे सवाल पूछे हैं। उनके इस कदम से SIR को लेकर महाराष्ट्र का सियासी माहौल और गरम होने की संभावना है।
चव्हाण ने पूछा कि देश का प्रधानमंत्री और राज्य का मुख्यमंत्री कौन बने, क्या यह घुसपैठिए तय करेंगे? उन्होंने यह भी पूछा कि ऐसा हुआ तो क्या लोकतंत्र सुरक्षित रहेगा। SIR के जरिए मतदाता सूचियों की समीक्षा का मुद्दा अभी राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। ठाकरे बंधुओं के मोर्चे में भी SIR प्रक्रिया रद्द करने की मांग उठी। राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।
चव्हाण का दूसरा सवाल दोहरे मतदान पर है। उन्होंने पूछा कि क्या एक मतदाता को एक से ज्यादा जगह वोट डालने की छूट होनी चाहिए। भाजपा की ओर से कहा जा रहा है कि मतदाता सूचियों की सटीकता और पात्र मतदाताओं का पंजीकरण SIR प्रक्रिया का अहम मुद्दा है। दूसरी तरफ विपक्ष SIR के अमल और उसके असर पर आपत्ति जता रहा है। इसी वजह से सत्ताधारी पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव चल रहा है।
तीसरे सवाल में चव्हाण ने पूछा कि क्या मर चुके लोगों के नाम मतदाता सूची में रहने चाहिए। उन्होंने SIR का विरोध करने वाली पार्टियों और नेताओं से ऐसी प्रविष्टियों पर अपनी भूमिका साफ करने को कहा है। ये सवाल उन्होंने अमित शाह के संसद में रखे गए पक्ष का हवाला देकर उठाए हैं। चव्हाण का कहना है कि SIR पर आपत्ति जताने से पहले इन सवालों के जवाब दिए जाएं।
चव्हाण ने सीधी अपील की है कि SIR का विरोध करने वाले नेता और पार्टियां पहले इन सवालों के जवाब दें, उसके बाद ही विरोध करें। इस बीच 4 अक्टूबर को राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने मुंबई में मिलकर 'विराट गर्जना मोर्चा' निकाला। यह मोर्चा मेट्रो सिनेमा से मुंबई महानगरपालिका के मुख्यालय तक गया। मोर्चे में SIR प्रक्रिया रद्द करने के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका के खिलाफ भी मांगें रखी गईं।
इस तरह एक तरफ ठाकरे बंधु SIR प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ भाजपा ने मतदाता सूची में घुसपैठियों, दोहरे मतदान और मृत लोगों की प्रविष्टियों का मुद्दा आगे रखा है। SIR के बहाने महाराष्ट्र में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और धार मिल गई है।