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22:32 IST

आकाशवाणी भवन के बाहर 8 घंटे धरना, राहुल और प्रियंका गांधी पुलिस हिरासत में

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर इंडिया गठबंधन के मार्च को पुलिस ने रोका, राहुल और प्रियंका गांधी को हिरासत में लिया गया।

आकाशवाणी भवन के बाहर 8 घंटे धरना, राहुल और प्रियंका गांधी पुलिस हिरासत में
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

दिल्ली में मंगलवार को विपक्ष के धरने से सियासी माहौल गरमा गया। इंडिया (INDIA) गठबंधन का महामार्चा भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के मुख्यालय की तरफ जा रहा था, जिसे पुलिस ने बीच में रोक दिया। इसके बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा आकाशवाणी भवन के बाहर 8 घंटे से ज्यादा वक्त तक धरने पर बैठे रहे।

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के तुरंत इस्तीफे की मांग कर रहे राहुल और प्रियंका गांधी को आखिर में दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। स्रोत के मुताबिक पुलिस ने इसके लिए बल का इस्तेमाल किया। राहुल गांधी को घसीटकर बस में बैठाए जाने का एक वीडियो सामने आया है। इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने मोदी सरकार को सीधी चेतावनी दी कि "सब कुछ याद रखा जाएगा, लोकतंत्र बचाने की लड़ाई जारी रहेगी।"

इंडिया गठबंधन के नेताओं ने मंगलवार को संसद भवन से ईसीआई मुख्यालय तक मार्च निकाला था। उनकी मांगें थीं: ज्ञानेश कुमार को हटाया जाए, एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पूरी तरह रद्द हो और आने वाले चुनाव ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से हों। पुलिस ने सुरक्षा का हवाला देकर जंतर-मंतर, आकाशवाणी भवन और ईसीआई मुख्यालय की तरफ जाने वाले रास्ते बंद कर दिए और कई इलाकों में धारा 144 लागू कर दी।

इसी दौरान एनएसयूआई (NSUI) के सैकड़ों कार्यकर्ता आकाशवाणी भवन के आसपास पहुंच गए। कार्यकर्ताओं ने भवन में घुसने की कोशिश की तो पुलिस और उनके बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई। इसी हंगामे में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग और पवन खेड़ा समेत कई बड़े नेताओं को पुलिस ने बस में बैठाकर हिरासत में ले लिया।

आकाशवाणी भवन के पास मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने कहा, "नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने पूरे देश को हाईजैक कर लिया है और हम सिर्फ संविधान की रक्षा करने की कोशिश कर रहे हैं। हमें चुनाव आयोग के दफ्तर जाने से क्यों रोका जा रहा है? ज्ञानेश कुमार से निष्पक्ष चुनाव कराने की उम्मीद है, मगर वे आरएसएस और भाजपा के इशारे पर नाचकर लोकतंत्र खत्म करने का काम कर रहे हैं।"

जंतर-मंतर पर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए राहुल ने पुलिस से पूछा, "अगर पुलिस हमें यहां से हटा रही है, तो हम कहां बैठें? जंतर-मंतर, इंडिया गेट या सीधे सड़क पर?"

कांग्रेस ने आयोग से बातचीत का रास्ता खुलवाने के लिए आधिकारिक चिट्ठी भेजकर मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों से साझा मुलाकात मांगी थी। कांग्रेस सूत्रों की जानकारी के मुताबिक प्रियंका गांधी वाड्रा इस मामले में गृह सचिव से लगातार तालमेल बैठा रही थीं। प्रियंका गांधी ने साफ किया था कि जब तक चुनाव आयोग मिलने का वक्त नहीं देता, उनका आंदोलन चलता रहेगा।

कांग्रेस की शर्त थी कि आयोग सिर्फ 4-5 नेताओं से न मिले, बल्कि इंडिया गठबंधन के सभी 300 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल से एक साथ मिले। राहुल गांधी ने साफ किया था कि अगर आयोग अगले 1-2 दिन में इन सभी सांसदों से मिलने का भरोसा दे, तभी आंदोलन वापस लिया जाएगा। लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने कार्रवाई करके सभी नेताओं को हिरासत में ले लिया।

समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग स्वायत्त संस्था नहीं रहा, बल्कि सीधे भाजपा की शाखा की तरह काम कर रहा है। राहुल गांधी को बस में ले जाते वक्त खिड़की से बाहर देखते हुए का दृश्य कैमरे में कैद हुआ। इसके बाद देशभर में कांग्रेस कार्यकर्ता आक्रामक हैं, और इंडिया गठबंधन के नेताओं ने लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की यह लड़ाई तेज करने का इरादा जताया है।

चुनाव आयोग ने अपनी सफाई में कहा कि आज दोपहर 4 बजे के बाद सांसदों की बैठक के प्रस्ताव पर वह विचार कर ही रहा था कि दिल्ली पुलिस के उपायुक्त (DCP) ने उसे बताया कि इस प्रस्तावित बैठक में 240 सांसदों का समूह शामिल होना था और बैठक 'संसद भवन एनेक्सी' (Parliament House Annexe) में होनी थी। आयोग को यह अनुरोध असामान्य और अस्वीकार्य लगा, क्योंकि तय प्रक्रिया के मुताबिक ऐसी बैठकें भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के परिसर में ही होनी चाहिए। आयोग ने सांसदों से ज्ञापन लेने के लिए अपना सबसे वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी बैठक की जगह भेजने का प्रस्ताव दिया। आयोग के मुताबिक ऐसा कदम उठाना अपने आप में अभूतपूर्व होता, लेकिन सांसदों ने यह प्रस्ताव भी ठुकरा दिया। आयोग ने कहा कि कोई भी राजनीतिक पार्टी कभी भी बैठक का अनुरोध कर सकती है और आयोग अपनी सुविधा से ऐसी बैठक की तारीख और वक्त तय कर सकता है। यह एक तय प्रक्रिया है, ऐसा चुनाव आयोग ने कहा।

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