संजय राऊत का दावा: छह महीने में गिरेगी मोदी सरकार, सूखे पर फडणवीस सरकार को घेरा
ठाकरे गुट के सांसद संजय राऊत ने कहा कि अगले छह महीने में केंद्र की मोदी सरकार गिरेगी। उन्होंने महाराष्ट्र के सूखे और चुनावी खर्च पर राज्य सरकार पर भी आरोप लगाए।
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देश का सियासी माहौल इन दिनों गरमाया हुआ है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया गठबंधन आंदोलन की तैयारी कर रही है। इसी बीच ठाकरे गुट के सांसद संजय राऊत ने केंद्र की मोदी सरकार को लेकर बड़ा दावा किया है।
चर्चा है कि विपक्ष के नेताओं की तरफ से कहा जा रहा है कि अगले छह महीने में मोदी सरकार गिर जाएगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जगह नया नेतृत्व आएगा। संजय राऊत ने इस दावे का समर्थन करते हुए अपनी बात रखी है। उनके बयान से राजनीतिक गलियारों में हलचल मची है। खबर में कहा गया है कि देशभर में विपक्षी पार्टियां और दूसरे विद्यार्थी संगठन भी केंद्र सरकार पर कड़ा ऐतराज जता रहे हैं।
मोदी की जगह कौन प्रधानमंत्री बनेगा, यह सवाल संजय राऊत से पूछा गया। इस पर उन्होंने इशारों में कहा कि वे नाम बता सकते हैं, लेकिन अभी नहीं बताएंगे। उन्होंने कहा, "रेजीम चेंज यानी रेजीम चेंज।" इस बयान से केंद्र में नेतृत्व बदलने की चर्चा को और हवा मिली।
इसके बाद राऊत ने महाराष्ट्र के सूखे के हालात पर राज्य सरकार की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा, "हमने 1972 का सूखा देखा है। तब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं। आज के हालात उससे भी गंभीर हैं।" राऊत ने यह भी कहा कि कोंकण में पहले कभी सूखा घोषित नहीं हुआ था, और इसी से हालात की गंभीरता समझी जा सकती है।
राऊत का दावा है कि सूखे से निपटने के लिए राज्य को करीब 50 हजार करोड़ रुपये की जरूरत है। उनका आरोप है कि किसानों के हाथ में सिर्फ पांच हजार रुपये रखे जा रहे हैं।
चुनावों में पैसे के इस्तेमाल पर भी राऊत ने सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों में बड़े पैमाने पर पैसा खर्च किया जा रहा है और इसमें भाजपा, शिंदे गुट और सुनेत्रा पवार की राष्ट्रवादी का नाम लिया। राऊत ने दावा किया कि सोमेश्वर सहकारी चीनी कारखाने के चुनाव में 25 से 30 करोड़ रुपये खर्च हुए। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावों में तोहफे और पैसे बांटे जाते हैं।
राऊत ने मांग की कि सत्ता पक्ष के पास इतना पैसा कहां से आता है, इसका खुलासा मुख्यमंत्री करें। उन्होंने ठेकेदारों के जरिए राज्य को लूटे जाने का आरोप भी लगाया। एक तरफ केंद्र में नेतृत्व बदलने की चर्चा और दूसरी तरफ सूखे पर राज्य सरकार पर हमले, इन दोनों मुद्दों की वजह से राऊत के बयानों की राजनीतिक गलियारों में चर्चा हो रही है।
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