सूखा प्रभावित इलाकों के छात्रों की परीक्षा फीस माफ, फीस ली तो कॉलेजों पर सख्त कार्रवाई
उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील ने सूखा प्रभावित इलाकों के छात्रों से परीक्षा फीस न लेने और ली जा चुकी फीस लौटाने के निर्देश दिए।
राज्य के सूखा प्रभावित इलाकों के छात्रों को राहत देने के लिए उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। अब इन इलाकों के किसी भी छात्र से परीक्षा फीस नहीं ली जाएगी और उसके परीक्षा फॉर्म बिना फीस के भरवाए जाएंगे। उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील ने साफ निर्देश दिया कि जिन छात्रों से फीस वसूली जा चुकी है, उन्हें वह रकम वापस की जाए। यूनिवर्सिटी और कॉलेज इन निर्देशों का पालन करें।
मंत्री पाटील ने चेतावनी भी दी कि अगर किसी कॉलेज में छात्रों से परीक्षा फीस वसूलने की बात सामने आई, तो उस कॉलेज पर सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि राज्य में सूखे के हालात को देखते हुए विभाग के तहत आने वाले सभी कॉलेज छात्रों से परीक्षा फीस न लें। इसमें इंजीनियरिंग कॉलेज, आर्ट्स कॉलेज और विभाग के अधीन बाकी कॉलेज भी शामिल हैं। फैसला इसलिए लिया गया है कि छात्रों पर आर्थिक बोझ न पड़े।
यह निर्देश सह्याद्री अतिथिगृह में हुई बैठक में दिए गए। मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील की अध्यक्षता में राज्य की सभी सार्वजनिक यूनिवर्सिटियों के कुलगुरुओं के साथ ऑनलाइन बैठक हुई। बैठक में सूखा प्रभावित इलाकों के छात्रों की परीक्षा फीस की समीक्षा के साथ यूनिवर्सिटियों की परीक्षा प्रक्रिया, पेपरफुटी रोकने के उपाय, नतीजों में एकरूपता, शैक्षणिक कैलेंडर, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल और छात्र चुनावों पर विस्तार से चर्चा हुई।
पेपरफुटी के बारे में मंत्री पाटील ने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना, पेपरफुटी जैसी गड़बड़ियां रोकना और नतीजों की प्रक्रिया में एकरूपता लाना जरूरी है। केंद्र सरकार ने पेपरफुटी और परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के लिए जो कानून बनाया है, उसके प्रावधान महाराष्ट्र में लागू करने के लिए जरूरी कार्यवाही पर भी बैठक में चर्चा हुई। संबंधित कानून के मुताबिक दोषियों को 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। इसलिए मंत्री ने यूनिवर्सिटियों से कहा कि वे परीक्षा व्यवस्था में जरूरी सावधानी बरतें और गड़बड़ियों पर रोक लगाने के प्रभावी उपाय करें।
मंत्री ने निर्देश दिया कि अगले शैक्षणिक साल से नतीजे घोषित होते ही छात्रों को उनके डिग्री सर्टिफिकेट डिजिलॉकर में तुरंत उपलब्ध कराए जाएं। इससे विदेश में उच्च शिक्षा के लिए जाने वाले छात्रों को एडमिशन प्रक्रिया और आगे की पढ़ाई के लिए सर्टिफिकेट समय पर मिलेंगे। उन्हें सर्टिफिकेट के लिए बार-बार यूनिवर्सिटी के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और उनका वक्त और मेहनत बचेगी।
शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से राज्य की सभी सार्वजनिक यूनिवर्सिटियों में एक जैसा शैक्षणिक कैलेंडर लागू करने को कहा गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत चौथे साल के 'ऑनर्स' डिग्री कोर्स की ठीक से रचना कर उसे असरदार ढंग से लागू करने की बात भी मंत्री ने कही। पुनर्परीक्षा और एटीकेटी के नियमों में एकरूपता के लिए राज्य की यूनिवर्सिटियों की एक समान नीति बनाने की जरूरत भी उन्होंने बताई, ताकि छात्रों को परीक्षा और नतीजों के नियमों पर स्पष्टता मिले।
छात्रों की समस्याएं जानने के लिए मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील 15 दिसंबर 2026 से 15 जनवरी 2027 के बीच राज्य की यूनिवर्सिटियों का दौरा करेंगे। इस दौरान एक दिन यूनिवर्सिटी के शैक्षणिक और प्रशासनिक कामकाज की समीक्षा होगी। रात में वे छात्रों के साथ हॉस्टल में रुकेंगे और वहां रहने, खाने, साफ-सफाई, पीने के पानी और दूसरी बुनियादी सुविधाओं का जायजा लेंगे। छात्रों से सीधी बातचीत कर उनकी दिक्कतें, उम्मीदें और सुझाव भी सुने जाएंगे।
यूनिवर्सिटी में छात्र चुनावों के बारे में दिवाली के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर बैठक में चर्चा हुई। मंत्री पाटील ने संबंधित अधिकारियों से कहा कि चुनाव किस तरीके से कराए जा सकते हैं, इस पर सब पहलुओं से विचार कर अंतिम रिपोर्ट पेश करें। उन्होंने कहा कि छात्रों के शैक्षणिक हित, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, डिजिटल सुविधाओं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी अमल और यूनिवर्सिटियों के कामकाज में एकरूपता के लिए राज्य सरकार कोशिश कर रही है।
बैठक में प्रधान सचिव रणजीत सिंह देओल, महाराष्ट्र राज्य तकनीकी शिक्षा मंडल के संचालक और तकनीकी शिक्षा विभाग के संचालक डॉ. प्रमोद नाईक, उपसचिव अमोल मुत्याल, उपसचिव प्रताप लुबाल, महाराष्ट्र राज्य कला संचालनालय के संचालक डॉ. किशोर इंगले, उच्च शिक्षा विभाग के उपसचिव अशोक मांडे, उच्च शिक्षा संचालक डॉ. शैलेंद्र देवलाणकर, सभी सार्वजनिक यूनिवर्सिटियों के कुलगुरु (ऑनलाइन) और संबंधित अधिकारी मौजूद थे।
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