गोंदिया के सभी आठ तालुके सूखाग्रस्त सूची में, किसानों को राहत की उम्मीद
राज्य सरकार के 14 अक्टूबर 2026 के आदेश में गोंदिया जिले के बाकी सात तालुके भी जुड़े, अब पूरा जिला सूखाग्रस्त सूची में है।
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सूखे की मार झेल रहे गोंदिया जिले के किसानों के लिए राहत की खबर है। महाराष्ट्र सरकार ने 14 अक्टूबर 2026 को जो आदेश जारी किया, उसमें राज्य के 305 तालुके सूखाग्रस्त घोषित किए गए हैं। इनमें गोंदिया जिले के सभी आठ तालुके शामिल हैं।
खरीफ सीजन 2026 में बारिश की कमी रही और बीच में लंबा अंतराल भी पड़ा। इसी वजह से शुरुआत में जिले का सिर्फ तिरोड़ा तालुका सूखाग्रस्त सूची में रखा गया था। बाकी सात तालुके उस वक्त सूची से बाहर थे। 14 अक्टूबर के आदेश के बाद गोंदिया, गोरेगांव, आमगांव, सालेकसा, देवरी, अर्जुनी मोरगांव और सड़क अर्जुनी भी इस सूची में जुड़ गए हैं।
इसके साथ जिले के आठों तालुके अब ट्रिगर-1 और ट्रिगर-2 में आ गए हैं। शुरुआत में राज्य के 265 तालुकों में सूखे की स्थिति को देखते हुए ट्रिगर-1 (पहला ट्रिगर) लागू किया गया था, जिसमें जिले का एक ही तालुका था। उसके बाद राज्य के 19 तालुके ट्रिगर-2 में लिए गए थे। अब सरकार ने 305 तालुकों में सूखे की स्थिति घोषित की है।
इस फैसले के पीछे विधायक विनोद अग्रवाल की मांग का जिक्र है। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर कहा था कि गोंदिया जिले के सभी तालुके सूखाग्रस्त घोषित किए जाएं और संकट में फंसे किसानों को आर्थिक राहत दी जाए। मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस मांग पर तुरंत ध्यान देते हुए संबंधित अधिकारियों को जांच करने के निर्देश दिए थे।
सरकारी आदेश के मुताबिक प्रभावित इलाकों में कई उपाय किए जाएंगे। इनमें राजस्व वसूली में छूट, फसल कर्ज की वसूली में छूट, खेती के पंपों के बिजली बिल में माफी, विद्यार्थियों की परीक्षा फीस माफी, रोजगार हमी योजना के तहत काम की उपलब्धता और पीने के पानी का इंतजाम शामिल हैं।
ट्रिगर-1 और ट्रिगर-2 वाले सूखाग्रस्त तालुकों के लिए सरकार ने विशेष मामले के तौर पर ये रियायतें लागू की हैं। जमीन राजस्व में छूट, फसल कर्ज का पुनर्गठन और खेती से जुड़े कर्ज की वसूली पर रोक इनमें अहम हैं। खेती के पंपों के चालू बिजली बिल में भी छूट दी जाएगी।
आदेश में जिलाधिकारियों से कहा गया है कि वे फसल नुकसान का पंचनामा तुरंत करवाएं और पूरा प्रस्ताव कृषि विभाग के जरिए सरकार को भेजें। अब किसानों को इंतजार है कि इन उपायों पर ठीक से अमल हो और मदद पात्र किसानों तक पहुंचे।
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