सूखे में किसानों को सहारा: अगस्त 2027 तक का पानी पहले पीने के लिए रिजर्व, फडणवीस का फैसला
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने केंद्रीय सूखा निरीक्षण दल के साथ बैठक में बताया कि पीने के पानी, चारे और रोजगार का इंतजाम किया जा रहा है।
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महाराष्ट्र में सूखे की हालत को देखते हुए किसानों, खेत मजदूरों और गांव के लोगों को अगले छह से आठ महीने और ज्यादा मदद की जरूरत पड़ने वाली है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यह बात केंद्रीय सूखा निरीक्षण दल के साथ हुई बैठक में कही। बैठक मुख्यमंत्री के 'वर्षा' निवास पर हुई। उन्होंने बताया कि रोजगार पैदा करने, जरूरतमंदों तक अनाज पहुंचाने, पीने के पानी का इंतजाम करने और जानवरों के लिए चारा-पानी उपलब्ध कराने की बारीक प्लानिंग चल रही है।
फडणवीस के मुताबिक केंद्रीय टीम ने बहुत बड़ा दौरा करके जमीन तक जाकर हालात देखे। इससे लोगों को लगा कि उनकी तकलीफ समझी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि टीम के इस संवेदनशील निरीक्षण से सूखे की गंभीरता केंद्र सरकार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि मानसून के पहले दो महीनों में अच्छी बारिश हुई थी, इसलिए रिकॉर्ड पैदावार की उम्मीद थी। लेकिन फसलें फूल आने की हालत में थीं, तभी करीब दो महीने बारिश नहीं हुई। इससे कई जगह सोयाबीन को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। कपास, अरहर और गन्ने की फसल भी प्रभावित हुई है। पानी न होने से रबी की बुवाई की संभावना कम है और गर्मी की फसलों के लिए भी गुंजाइश नहीं बची। यानी खरीफ का नुकसान रबी या गर्मी की फसल से पूरा करने का मौका इस बार किसानों को नहीं मिलेगा। जो छोटे किसान खेती के साथ मजदूरी भी करते हैं, उनके सामने गुजर-बसर का संकट खड़ा हो गया है। फडणवीस ने साफ किया कि रोजगार और अन्न सुरक्षा की योजनाओं के जरिए प्लानिंग करके मदद दी जाएगी।
पानी को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहरों को कुछ दिन की बारिश से फायदा हुआ, लेकिन बाकी महाराष्ट्र में, खासकर गांवों में पानी के स्रोत सूख गए हैं। इन इलाकों में बड़े पैमाने पर टैंकर लगाने पड़ेंगे। राज्य सरकार टैंकर से पानी की सप्लाई में तकनीक का इस्तेमाल करके हर गांव तक पारदर्शी और सोचे-समझे तरीके से पानी पहुंचाने का खाका तैयार कर रही है। अगस्त 2027 तक उपलब्ध पानी का पहला आरक्षण पीने के लिए किया गया है। इसमें लोगों और जानवरों के लिए जरूरी पानी की अलग व्यवस्था है, और उसके बाद ही दूसरे इस्तेमाल के लिए पानी दिया जाएगा। इस आरक्षण पर सख्ती से अमल होगा।
जलस्रोतों के लिए केंद्र और राज्य की अलग-अलग योजनाओं से गाद निकालने, मरम्मत और नई जान डालने के काम बड़े पैमाने पर होंगे। फडणवीस ने बताया कि पहले 25 हजार गांवों में हुए कामों की वजह से 15 से 17 प्रतिशत पानी की कमी के बावजूद उन इलाकों को राहत मिली थी। इन कामों पर सॉफ्टवेयर और ऐप के जरिए पारदर्शी तरीके से अमल होगा।
जानवरों के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग-अलग जिलों में चारे का स्टॉक 90 से 120 दिन तक का है। जिन जलग्रहण इलाकों की मिट्टी में नमी है, वहां चारे का उत्पादन बढ़ाया जाएगा। मौजूद चारा सरकार के तय किए दाम पर खरीदकर उसके स्टोरेज का इंतजाम किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो जिन राज्यों में अच्छी बारिश हुई है, वहां से भी चारा मंगाने पर विचार होगा। जरूरत के हिसाब से चारा छावनी और पशु छावनी भी खोली जाएंगी। जल संरक्षण के कामों में गांव के लोगों को शामिल किया जाएगा। माथा से पायथा की सोच के तहत मौजूदा संरचनाओं की मरम्मत और नई संरचनाओं का निर्माण लोगों की भागीदारी से होगा, जिससे गांवों में रोजगार भी बनेगा।
फडणवीस ने बताया कि राज्य सरकार केंद्र के मापदंडों के हिसाब से आंकड़ों पर आधारित विस्तृत और सटीक ज्ञापन देगी। केंद्रीय कृषि मंत्री ने पहले से ज्ञापन देने के लिए संपर्क किया था और वह दे दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री ने अंतर-मंत्रालयीन समूह की बैठक जल्दी बुलाकर मदद की प्रक्रिया तेज करने का आश्वासन दिया है। फसल बीमा का कवच अपेक्षाकृत कम है, फिर भी जिन किसानों ने बीमा लिया है, उन्हें इसका फायदा जल्दी दिलाने के लिए राज्य सरकार केंद्र के सहयोग से कोशिश करेगी।
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