सूखे पर फडणवीस की बैठक में दोनों उपमुख्यमंत्री शिंदे और सुनेत्रा पवार नहीं आए
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई सूखा समीक्षा बैठक में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार मौजूद नहीं थे। न्योते को लेकर अब तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं आई है।
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महाराष्ट्र में इस साल उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं हुई, जिससे कई इलाकों में सूखे जैसे हालात बन गए हैं। बारिश की कमी से खेती की फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान हो रहा है और किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इसी हालात का जायजा लेने के लिए रविवार, 11 अक्टूबर को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) की अध्यक्षता में एक अहम बैठक हुई।
इस बैठक में राज्य के दोनों उपमुख्यमंत्री, एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार, मौजूद नहीं थे। उनकी गैरमौजूदगी को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। सवाल उठाया जा रहा है कि क्या दोनों उपमुख्यमंत्रियों को बैठक का न्योता ही नहीं दिया गया था। हालांकि न्योता दिया गया था या नहीं, इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
बैठक में मंत्री गिरीश महाजन, दत्तात्रय भरणे और मकरंद पाटील मौजूद थे। केंद्रीय सूखा निरीक्षण दल के प्रमुख, केंद्रीय संयुक्त सचिव मुक्तानंद अग्रवाल और दल के बाकी सदस्य भी बैठक में शामिल हुए। बैठक में राज्य में सूखे की तीव्रता, फसलों के नुकसान, पानी की किल्लत और मदद से जुड़े हालात पर चर्चा हुई।
केंद्र सरकार ने सूखे की तीव्रता को देखते हुए 11 सदस्यों वाला अंतर-मंत्रालयी दल महाराष्ट्र भेजा था। इस दल ने मराठवाड़ा, विदर्भ और पश्चिम महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित इलाकों का दौरा किया। दल की जांच में सोयाबीन, कपास और तुअर की फसलों को भारी नुकसान सामने आया। कुछ इलाकों में फसल की पैदावार लगभग शून्य पर पहुंचने की बात भी दर्ज की गई। पीने के पानी, मवेशियों के चारे और जलाशयों में घटते जलस्तर को लेकर भी चिंता जताई गई।
सूखा प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र के पास 17 हजार 500 करोड़ रुपये की अंतरिम मदद का प्रस्ताव भेजा है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिलकर मदद की मांग की थी। केंद्रीय दल की रिपोर्ट आने के बाद राज्य सरकार ज्यादा ब्योरे के साथ प्रस्ताव देगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर केंद्र से मिलने वाली आर्थिक मदद पर आगे फैसला होने की उम्मीद है।
दोनों उपमुख्यमंत्रियों के बैठक में न होने से महायुति सरकार के आपसी तालमेल पर सवाल उठे हैं। मगर उन्हें न्योता नहीं दिया गया था या वे नाराज हैं, इसकी अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए उनकी गैरमौजूदगी के आधार पर महायुति में मतभेद का नतीजा निकालना जल्दबाजी होगी। अब नजर इस पर है कि मुख्यमंत्री कार्यालय या संबंधित उपमुख्यमंत्रियों की तरफ से कोई सफाई आती है या नहीं।
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