सूखे के लिए 36 और तालुकों का सर्वे, 18 तालुकों में 20 फीसदी ग्राउंड ट्रुथिंग: बावनकुले
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने नागपुर में बताया कि 265 तालुकों की सूची से बाहर के 36 और तालुकों का सर्वे होगा।
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राज्य में सूखे के हालात को देखते हुए 265 तालुकों की पुरानी सूची से बाहर के 36 और तालुकों का सर्वे करने का फैसला लिया गया है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मंजूरी से इसका सरकारी आदेश निकाल दिया गया है।
बावनकुले नागपुर एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने बताया कि सूखे के मापदंडों को लेकर जिन 18 तालुकों से पहले शिकायतें मिली थीं, वहां 20 फीसदी ग्राउंड ट्रुथिंग यानी मौके पर जाकर जांच की जाएगी। उसके बाद इन्हें सूखे की सूची में शामिल करने पर विचार होगा। इसके अलावा 18 और तालुकों की सूची आई है और उस पर रिपोर्ट मंगवाई गई है। रिपोर्ट आने के बाद वहां भी ग्राउंड ट्रुथिंग करके आगे का फैसला होगा। बावनकुले के मुताबिक जनप्रतिनिधियों ने किसानों के खेतों की मेड़ पर जाकर हालात देखे थे और उनके निवेदनों और सिफारिशों पर भी गौर किया गया है।
बावनकुले ने कहा कि केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र के सूखे का संज्ञान लेकर तुरंत टीमें भेजी हैं। ये टीमें राज्य के हालात का सर्वे करेंगी। केंद्र की टीम के साथ राज्य के अधिकारियों की बैठक हो चुकी है, जिसमें फसल नुकसान का पूरा प्रेजेंटेशन दिया गया। सोयाबीन, कपास, तूर, हल्दी और फलबागों के नुकसान की जानकारी टीम को दी गई है। सूखे से जुड़े सभी मापदंड और नुकसान की असलियत केंद्र के अधिकारियों के सामने रखी गई है। बावनकुले ने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराजसिंह चौहान की कोशिशों से महाराष्ट्र को केंद्र से बड़ी मदद मिलेगी।
विधान परिषद चुनाव की बगावत पर बावनकुले ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता बगावत न करें, इसके लिए पार्टी की कोशिशें जारी हैं। बगावत होने पर फैसला लेने का अधिकार प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र चव्हाण के पास है। भाजपा नेता अनिल सोले ने उम्मीदवारी का पर्चा भरा है, इस पर बावनकुले ने उनसे नाम वापस लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि पिछली बैठक में सोले से चर्चा हुई थी और उन्हें लगा था कि सोले पर्चा नहीं भरेंगे, लेकिन उन्होंने भर दिया। पार्टी ने सुधाकर कोहले को अधिकृत उम्मीदवार बनाया है, इसलिए सोले को अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ना चाहिए।
बावनकुले ने कहा, पार्टी मां जैसी होती है। राजनीति में कभी उम्मीदवारी मिलती है, कभी नहीं मिलती। उनके साथ भी ऐसा हुआ है। एक बार उन्हें रोका गया था, पर 2024 में पार्टी ने फिर उम्मीदवारी दी। इस बार सुधाकर कोहले को मौका दिया गया है। उन्होंने सोले को परिपक्व नेता बताया और कहा कि उनकी विनती है कि सोले पार्टी के खिलाफ रुख न अपनाएं। उन्हें उम्मीद है कि सोले दोपहर तीन बजे तक उम्मीदवारी वापस ले लेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि अमरावती और पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में महायुति के अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ भरे गए पर्चे वापस कराने की कोशिश चल रही है। जहां भाजपा, शिवसेना या राष्ट्रवादी कांग्रेस के उम्मीदवारों ने एक-दूसरे के खिलाफ पर्चे भरे हैं, वहां महायुति के नेता बातचीत कर रहे हैं।
अहिल्यानगर जिले में खेती महामंडल की जमीनें सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट समेत कई कामों के लिए किराए पर दिए जाने के बारे में बावनकुले ने बताया कि ये जमीनें अलग-अलग संस्थाओं और कंपनियों को पट्टे पर दी गई हैं। उनके मुताबिक निबे ग्रुप को करीब डेढ़ हजार एकड़, डीआरडीओ को डेढ़ हजार एकड़ और विश्वराज कंपनी को करीब बारह सौ एकड़ जमीन दी गई है। इनमें से ढाई हजार एकड़ जमीन किसानों के लिए रखी गई है, और मूल मालिक किसानों को जमीन लौटाई जा सकती है या नहीं, इस पर भी विचार चल रहा है।
नागपुर में पीने के पानी के बारे में बावनकुले ने लोगों से पानी किफायत से इस्तेमाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सूखे में कुछ मामलों में संयम रखना पड़ता है। सीमेंट रोड के काम बंद कर दिए गए हैं और पीने के पानी की बर्बादी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि निर्माण में पीने का पानी न लगाकर प्रोसेस किया हुआ पानी इस्तेमाल हो, और पीने के पानी का गैरजरूरी इस्तेमाल मिला तो संबंधित लोगों पर केस दर्ज होगा। उनके मुताबिक नागपुर में करीब 35 फीसदी पानी का ऑडिट नहीं होता, इसलिए पानी बर्बाद होता है। शहर में पानी पर्याप्त है, लेकिन तकनीकी दिक्कतों से कहीं-कहीं समस्या हो सकती है। नागपुर जिले के छह हजार से ज्यादा छोटे बांधों की मरम्मत से जलसंचय बढ़ सकता है, और ऐसा काम हर जिले में करने की सरकार की कोशिश है।
फसल कर्जमाफी के लिए ई-केवाईसी न होने से जो किसान लाभ से छूटे हैं, उनके लिए गांव के हिसाब से सूची बनेगी, यह बावनकुले ने बताया। जिनके आवेदन मंजूर हो चुके हैं, उनके घर जाकर पटवारी और ग्राम सेवक ई-केवाईसी पूरी करेंगे। पात्र किसानों की सूचियां चरणबद्ध तरीके से आ रही हैं, पर ई-केवाईसी अधूरी होने से कुछ को लाभ में दिक्कत आ रही है, इसलिए विशेष मुहिम चलेगी। उन्होंने कहा कि नेटवर्क न होने पर अपलोड की गई जानकारी नेटवर्क आने के बाद सिस्टम में अपडेट हो जाएगी।
मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर बावनकुले ने कांग्रेस की आलोचना की। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की सफाई सही तरीके से होना जरूरी है, और कमियां हों तो उन्हें सुधारने का समय है। उनके मुताबिक महाराष्ट्र में चुनाव आयोग ने सुधार के लिए समय बढ़ा दिया है। उनकी राय थी कि एसआईआर और ईवीएम के मुद्दों पर चुनाव आयोग को निशाना बनाने के बजाय सूची की कमियां दूर करने पर जोर दिया जाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग संवैधानिक संस्था है और उस पर आरोप लगाते समय तथ्यों का ध्यान रखना जरूरी है। सचिन वाझे मामले में हाईकोर्ट की टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर बावनकुले ने कहा कि कोर्ट के सामने कुछ बातें आई होंगी, इसलिए उसने सवाल उठाया होगा।