सूखाग्रस्त इलाकों के छात्रों की परीक्षा फीस माफ, डिग्री मिलेगी सीधे डिजिलॉकर पर
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने सूखाग्रस्त क्षेत्रों के विद्यार्थियों से परीक्षा शुल्क न लेने के निर्देश दिए हैं।
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महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाकों के विद्यार्थियों को परीक्षा फीस नहीं भरनी पड़ेगी। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने इस बारे में निर्देश दिए हैं। जिन विद्यार्थियों से पहले ही फीस ली जा चुकी है, उन्हें वह रकम तत्काल वापस करनी होगी। नियम तोड़ने वाले कॉलेजों पर कार्रवाई की जाएगी।
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने इन क्षेत्रों के विद्यार्थियों को शैक्षणिक राहत देने के लिए यह फैसला लिया है। मंत्री पाटिल ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से कहा है कि इन निर्देशों का सख्ती से पालन हो। अगर किसी विद्यार्थी से परीक्षा फीस वसूलने की शिकायत मिलती है, तो संबंधित कॉलेज के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
यह फैसला मुंबई के सह्याद्री अतिथिगृह में हुई एक बैठक में सामने आया। मंत्री पाटिल की अध्यक्षता में राज्य के सार्वजनिक विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ यह बैठक ऑनलाइन हुई। परीक्षा फीस के अलावा पेपर लीक रोकने, नतीजों में एकरूपता, राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने और विद्यार्थी चुनावों जैसे मुद्दों पर भी बात हुई।
पेपर लीक के मामले में बैठक में जोर दिया गया कि परीक्षा प्रणाली पारदर्शी बने और ऐसी घटनाओं पर रोक लगे। केंद्र सरकार के उस कानून के प्रावधानों को, जो परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक रोकने के लिए है, महाराष्ट्र राज्य में लागू करने की दिशा में जरूरी कार्रवाई पर भी चर्चा हुई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस कानून में दोषी पाए जाने पर 10 वर्ष तक की कैद और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। मंत्री ने विश्वविद्यालयों से कहा कि परीक्षा व्यवस्था में सतर्कता बरतें और गड़बड़ियां रोकने के लिए जरूरी कदम उठाएं।
शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से राज्य के सभी सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में एक जैसी शैक्षणिक समय सारिणी लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। मकसद है कि विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक कामकाज में एकरूपता आए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत चार वर्षीय ऑनर्स डिग्री पाठ्यक्रम का ढांचा तैयार कर उसे असरदार ढंग से लागू करने पर भी जोर दिया गया। पुनर्परीक्षा और एटीकेटी से जुड़े नियमों में एकरूपता के लिए समान नीति बनाने की जरूरत भी बताई गई।
विद्यार्थी चुनावों को लेकर बैठक में चर्चा हुई कि राज्य के विश्वविद्यालयों में चुनाव कराने की प्रक्रिया दिवाली के बाद आगे बढ़ाई जाए। संबंधित अधिकारियों से कहा गया कि चुनाव कराने के तरीके और प्रक्रिया पर व्यापक विचार-विमर्श करके अंतिम रिपोर्ट पेश करें।
मंत्री चंद्रकांत पाटिल 15 दिसंबर से 15 जनवरी के बीच राज्य के अलग-अलग विश्वविद्यालयों का दौरा करेंगे। इस दौरान शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था, विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं और छात्रावासों की हालत की समीक्षा होगी। दौरे में मंत्री एक दिन विश्वविद्यालय के कामकाज की समीक्षा करेंगे और रात में विद्यार्थियों के साथ छात्रावास में रुकेंगे। वहां आवास व्यवस्था, खाना, स्वच्छता, पीने का पानी और दूसरी बुनियादी सुविधाओं का सीधे जायजा लिया जाएगा।
डिग्री को लेकर भी राहत की बात है। विद्यार्थियों को डिग्री प्रमाणपत्र के लिए बार-बार विश्वविद्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें, इसलिए निर्देश दिए गए हैं कि नतीजे घोषित होते ही प्रमाणपत्र डिजिलॉकर पर उपलब्ध करा दिए जाएं। इससे विद्यार्थियों का समय और खर्च बचाने में मदद मिलेगी।