गुरूवार, 8 अक्टूबर 2026

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17:57 IST

बारिश नहीं होने से सूखी खड़ी फसलें, वाई तालुका को सूखाग्रस्त घोषित करने की कांग्रेस की मांग

वाई तालुका कांग्रेस कमेटी ने बुधवार को उपविभागीय अधिकारी और तहसीलदार को ज्ञापन देकर तालुका को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की।

बारिश नहीं होने से सूखी खड़ी फसलें, वाई तालुका को सूखाग्रस्त घोषित करने की कांग्रेस की मांग तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

सातारा जिले के वाई तालुका में बारिश कम होने से खड़ी फसलें सूख गई हैं। कुओं का जलस्तर भी नीचे चला गया है, जिससे किसान परेशानी में पड़ गए हैं। इसी हालत को देखते हुए वाई तालुका कांग्रेस कमेटी ने मांग की है कि वाई को सूखाग्रस्त तालुका घोषित किया जाए।

कमेटी की ओर से बुधवार, 7 अक्टूबर को वाई के उपविभागीय अधिकारी और तहसीलदार को इस बारे में ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में कहा गया है कि कम बारिश की वजह से तालुके में खड़ी फसलें जल गईं और किसानों का नुकसान हुआ है। कुओं में पानी तली तक पहुंच गया है, इसलिए फसलों को पानी देने का सवाल खड़ा हो गया है।

ज्ञापन में यह बात भी उठाई गई है कि वाई तालुका में धोम जैसा बड़ा बांध है, फिर भी उसका पानी खंडाला, फलटण, बारामती और कोरेगांव की तरफ जाता है। वहीं तालुके के किसानों को पानी की किल्लत झेलनी पड़ रही है।

सरकार ने सूखाग्रस्त तालुकों की जो सूची जारी की है, उसमें वाई का नाम नहीं है। कांग्रेस कमेटी का कहना है कि तालुके के हालात देखते हुए यह किसानों के साथ अन्याय है। इसलिए ज्ञापन में मांग की गई कि सरकार वाई तालुका को सूखाग्रस्त सूची में शामिल करे।

ज्ञापन देते समय वाई तालुका कांग्रेस के अध्यक्ष विलास पिसाल, महाराष्ट्र प्रदेश युवक कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष जयदीप शिंदे, सातारा जिला सेवा दल के अध्यक्ष प्रताप देशमुख, तालुका उपाध्यक्ष संतोष गायकवाड और दूसरे कार्यकर्ता मौजूद थे।

उधर, सातारा जिले के कुछ तालुकों में सूखा घोषित हो चुका है, लेकिन कराड तालुका के मसूर पूर्व इलाके के कई गांवों में भी सूखे जैसे हालात बन गए हैं। बारिश नहीं होने से खरीफ फसलों का बड़ा नुकसान हुआ है। खेती के पानी के साथ पीने के पानी का सवाल भी दिन-ब-दिन गंभीर होता जा रहा है।

मसूर इलाके के रिसवड, अंतवडी, गायकवाडवाडी, घोलपवाडी, हनबरवाडी, निगडी, खोडजाईवाडी, चिखली, किवळ, बानुगडेवाडी, गोसावेवाडी और हेळगांव का पूर्वी हिस्सा हमेशा पानी की किल्लत से जूझता रहता है। पुणे-बेंगलुरु हाईवे के किनारे और नदी किनारे का इलाका हरा-भरा दिखता है, इसलिए मान लिया जाता है कि पूरे इलाके के हालात एक जैसे हैं। नतीजा यह है कि पहाड़ी और सूखी खेती वाले गांवों को सूखा राहत के उपायों का पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा।

इस इलाके के कुछ गांवों में गर्मियों में पीने के पानी की जरूरत पूरी करने के लिए टैंकर लगाना पड़ता है। इस साल बारिश का हाल खराब रहा, इसलिए पानी की किल्लत का संकट और गहरा गया है। खेती के लिए काफी पानी नहीं होने से किसानों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

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