जाटतरोडी बस्ती में गुंडों ने की फायरिंग
सच्चाई छूपाने में लगी रही पुलिस, चार दिन बाद हुआ खुलासा, एक माह में तीसरी वारदात
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
नागपुर.
सीएम सिटी में फायरिंग का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. इमामवाड़ा थाने के तहत जाटतरोडी बस्ती में सीताबर्डी के कुख्यात अपराधी मृणाल भजभिये और उसके साथियों ने फायरिंग करके हड़कंप मचा दिया. इस वारदात का पता चलने के बाद भी इमामवाड़ा पुलिस और उसके आला अधिकारी मौन बैठे रहे. क्राइम ब्रांच द्वारा संदिग्धों को हिरासत में लेने के बाद इमामवाड़ा पुलिस हरकत में आई जिसके बाद सच्चाई का पता चला. महज एक माह में फायरिंग की यह तीसरी वारदात है.
फायरिंग की यह वारदात 4 अक्टूबर की रात हुई. सूत्रों के अनुसार 20 वर्षीय अमेय अमृतलाल धुर्वे अपने दोस्त हिमांशू राय, संजित दिमाण, कुणाल कांबले, आकाश यादव और आयुष खंडाते के साथ शीतला माता मंदिर के पास बैठकर बातचीत कर रहा था. तभी अमेय धुर्वे का परिचित मृणाल गजभिये अपने साथी तक्कू के साथ काले रंग की कार में सवार होकर वहां आया. दोनों ने अमेय और उसके दोस्त हिमांशू को गालियां देते हुए वहां बैठने का कारण पूछा. विरोध करने पर मृणाल कथित तौर पर खुद को 'मैं नागपुर का भाई हूं' बोलकर धमकाने लगा. इसके बाद उसने अपनी कार से बंदूक निकाल ली. बंदूक को हवा में लहराते हुए फायरिंग करने लगा. बताया जाता है कि मृणाल ने दो से तीन राउंड फायर किए. फायरिंग की आवाज सुनकर बस्ती में खलबली मच गई. बंदूक देखकर अमेय, उसके दोस्तों और लोग भाग खड़े हुए. फायरिंग के बाद मृणाल और तक्कू भी कार से फरार हो गए. इस घटना से अमेय और उसके दोस्त भयभीत हो गए. उन्होंने पुलिस को भी सूचना नहीं दी. लेकिन, कुछ देर बाद ही इमामवाड़ा पुलिस को फायरिंग की भनक लग गई.
सूत्रों के अनुसार अधिकृत शिकायत नहीं आने से इमामवाड़ा पुलिस ने मौन साध लिया. फायरिंग की सच्चाई दब जाने का भरोसा करके वह शांत हो गई. इसी बीच क्राइम ब्रांच को घटना की भनक लग गई. उसने संदेह के आधार पर जाटतरोडी के कुछ युवकों को हिरासत में लिया. उन्होंने क्राइम ब्रांच को घटनाक्रम की जानकारी दी. क्राइम ब्रांच के हरकत में आने का पता चलते ही इमामवाड़ा पुलिस और जोन चार के अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए. इसके बाद आनन-फानन में 8 अक्तूबर को इमामवाड़ा पुलिस ने फायरिंग का मामला दर्ज कर लिया. फायरिंग का सूत्रधार मृणाल गजभिये सीताबर्डी के आनंद नगर का निवासी है. उसके खिलाफ फायरिंग, हत्या का प्रयास, हमले सहित कई मामले दर्ज है. उसके खिलाफ मकोका और एमपीडीए की कार्रवाई भी की गई है. कुख्यात अपराधी होने के बावजूद वह बंदूक लेकर शहर में घूम रहा था. इसका स्थानीय पुलिस और क्राइम ब्रांच को भी पता नहीं चल पाया.
फिसड्डी साबित हो रहे सभी कदम
अपराधियों पर अंकुश रखने के लिए आदान-प्रदान योजना लागु की गई है. इसके तहत अपराधियों को आला अधिकारियों के सामने पेश किया जाता है. मृणाल गजभिये बेखौफ होकर बंदूक लेकर घूम रहा था. ऐसे में आदान-प्रदान के साथ अपरधियों की निगरानी के लिए किए जा रहे शहर पुलिस के सभी कदम फिसड्डी साबित होने का पता चलता है.