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20:32 IST

पढ़ाई में AI बंदूक जैसी: सही इस्तेमाल से फायदा, गलत से नुकसान, डॉ. विनोद शर्मा

डॉ. विनोद शर्मा के मुताबिक AI न पूरी तरह फायदेमंद है, न नुकसानदेह। असर इस पर टिका है कि बच्चे इसका इस्तेमाल कैसे करते हैं।

पढ़ाई में AI बंदूक जैसी: सही इस्तेमाल से फायदा, गलत से नुकसान, डॉ. विनोद शर्मा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

आज के दौर में AI पढ़ाई का अहम हिस्सा बन गया है। विद्यार्थी इससे जानकारी जुटाते हैं, लेख तैयार करवाते हैं, अलग-अलग विषय समझते हैं और रिसर्च करते हैं। इससे कई काम आसान हो जाते हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या AI पर निर्भरता बच्चों की सोचने, याद रखने और किसी विषय को समझने की ताकत को कमजोर कर सकती है? क्या तैयार जवाब मिलने से बच्चे खुद सोचने की आदत खो सकते हैं?

इन सवालों पर डॉ. विनोद शर्मा कहते हैं कि AI अपने आप में न पूरी तरह फायदेमंद है और न नुकसानदेह। उसका असर इस बात पर टिका है कि उसका इस्तेमाल कैसे हो रहा है। पढ़ाई में AI एक अच्छा साधन बन सकता है, लेकिन बच्चों को उसका सही इस्तेमाल सिखाना जरूरी है।

डॉ. शर्मा के मुताबिक पढ़ाई में AI काफी मदद कर सकता है। इससे अलग-अलग जानकारी जुटाई जा सकती है, नए आइडिया डेवलप किए जा सकते हैं और भी कई तरह के काम किए जा सकते हैं।

उन्होंने AI की तुलना बंदूक से की। उनके मुताबिक बंदूक खतरे के लिए भी इस्तेमाल हो सकती है और हिफाजत के लिए भी। यह इस पर निर्भर है कि उसे कौन और किस मकसद से इस्तेमाल कर रहा है। इसी तरह AI का सही इस्तेमाल फायदा देता है, जबकि गलत इस्तेमाल नुकसान पहुंचा सकता है।

क्रिटिकल थिंकिंग का मतलब कोई भी बात जैसी है वैसी मान लेना नहीं है। इसका मतलब है उसके पीछे का तर्क समझना, सवाल पूछना और अलग-अलग पहलुओं को परखना। इसमें आम जवाबों से आगे जाकर विषय को अच्छी तरह समझने और सही नतीजे तक पहुंचने की कोशिश की जाती है। डॉ. शर्मा के मुताबिक बच्चों में क्रिटिकल थिंकिंग डेवलप करने के लिए खुद सीखने और सोचने की आदत जरूरी है।

अगर बच्चे हर सवाल का जवाब सीधे AI से लेने लगें, तो उन्हें खुद सोचने और विषय का विश्लेषण करने का मौका नहीं मिलेगा। उन्होंने बताया कि जब किसी को कुछ लिखना होता है और AI तैयार लेख दे देता है, या किसी सवाल का जवाब फौरन मिल जाता है, तो इंसान की सोचने की जरूरत कम हो जाती है। ऐसे में क्रिटिकल थिंकिंग डेवलप करना मुश्किल हो सकता है।

डॉ. विनोद शर्मा के मुताबिक याद रखने की प्रक्रिया एक कसरत की तरह काम करती है। जैसे शारीरिक हलचल बंद करने से शरीर पर असर पड़ता है, वैसे ही याद करने का अभ्यास छोड़ने से याददाश्त की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है। उन्होंने समझाया कि कोई भी जानकारी याद रखने में कई चीजें अहम भूमिका निभाती हैं, जैसे दिलचस्पी, भावनात्मक और दृश्य जुड़ाव, रचनात्मकता और तर्क। इसी प्रक्रिया से जानकारी दिमाग से जुड़ती है और याद रखने में मदद मिलती है।

अगर बच्चों को हर सवाल का जवाब पहले से तैयार मिल जाए और उन्हें खुद जानकारी याद रखने या दोहराने की जरूरत न पड़े, तो याद रखने का अभ्यास भी घट जाएगा। ऐसे में AI पर गैरजरूरी निर्भरता उनकी कुदरती याददाश्त पर असर डाल सकती है।

पढ़ाई के दौरान ध्यान भटकना भी विद्यार्थियों के सामने बड़ी समस्या है। अक्सर बच्चे कार्टून या टीवी देखते समय देर तक ध्यान लगाए रखते हैं, लेकिन पढ़ते वक्त छोटी सी आवाज से भी उनका ध्यान टूट जाता है। डॉ. शर्मा के मुताबिक कंसंट्रेशन का रिश्ता इससे भी है कि बच्चे को सामने के विषय में कितनी दिलचस्पी है। जिस चीज में रुचि होती है, उस पर वे ज्यादा ध्यान लगाते हैं, और जिस विषय में रुचि नहीं होती, उस पर ध्यान लगाना मुश्किल होता है। उन्होंने कहा कि अगर AI की मदद से पढ़ाई को मजेदार बनाया जाए और बच्चों को दिलचस्प कंटेंट मिले, तो इससे उनका ध्यान लगाने में मदद हो सकती है। यानी AI का इस्तेमाल पढ़ाई को ज्यादा रोचक बनाने के लिए भी किया जा सकता है।

डॉ. शर्मा का कहना है कि बच्चों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन माध्यमों का इस्तेमाल जरूरी है। इनसे जानकारी पाने और सीखने में मदद मिल सकती है। हालांकि इन माध्यमों का सही और गलत, दोनों तरह से इस्तेमाल हो सकता है। उन्होंने कहा कि AI के साथ-साथ बच्चों में अपनी समझ और व्यावहारिक बुद्धि डेवलप करना भी जरूरी है। बच्चों का स्मार्ट बनने के साथ-साथ समझदार बनना भी अहम है। अगर वे टेक्नोलॉजी पर पूरी तरह निर्भर हो गए, तो इसका असर उनके सीखने की प्रक्रिया पर पड़ सकता है। इसलिए AI या डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल समझदारी से होना चाहिए।

डॉ. शर्मा के मुताबिक पढ़ाई के कुछ बुनियादी काम ऐसे हैं जो बच्चों को खुद करने चाहिए। इनमें विषय को पढ़ना, जानकारी याद रखना, उसका विश्लेषण करना और व्यावहारिक ढंग से सोचना शामिल है। बच्चों को खुद लिखने, समझने और अपनी कल्पनाशक्ति का इस्तेमाल करने का मौका मिलना चाहिए। पढ़ाई में जानकारी हासिल करने के साथ-साथ उसे समझना और अपने ज्ञान का हिस्सा बनाना भी जरूरी है। दूसरी तरफ AI और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल रिसर्च करके जानकारी पाने और विषय समझने में मदद के तौर पर किया जा सकता है।

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