सोमेश्वर कारखाना चुनाव: सुनेत्रा पवार के पैनल को सभी 21 सीटों पर जीत के संकेत
बारामती तालुका के श्री सोमेश्वर सहकारी चीनी कारखाने की मतगणना में उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाला पैनल सभी 21 सीटों पर आगे है।
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बारामती तालुका के श्री सोमेश्वर सहकारी चीनी कारखाने के चुनाव में उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाला 'सोमेश्वर विकास पुरुष अजितदादा पवार पैनल' एकतरफा जीत की ओर बढ़ता दिख रहा है। सोमवार (12 तारीख) शाम छह बजे तक आए नतीजों के हिसाब से 21 की 21 सीटों पर जीत के संकेत हैं। अगर यही रुझान आखिर तक कायम रहा तो कारखाने पर इस पैनल का बेरोकटोक दबदबा हो जाएगा।
दूसरी तरफ कारखाने के मौजूदा अध्यक्ष पुरुषोत्तम जगताप के नेतृत्व वाला 'लोकनेते अजित दादा पवार सोमेश्वर विकास पैनल' और युगेंद्र पवार की अगुवाई वाला 'श्री सोमेश्वर विकास पैनल' काफी पिछड़ गए हैं। इससे जगताप के परिवर्तन के दावे को बड़ा झटका लगा है।
मतगणना की शुरुआत 'ब' वर्ग संस्था प्रतिनिधि निर्वाचन क्षेत्र से हुई। यहां राष्ट्रवादी समर्थित पैनल के संग्राम सोरटे को 133 में से 93 वोट मिले और उन्होंने एडवोकेट महेश राणे को हरा दिया। इसके बाद राष्ट्रवादी के कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया। हालांकि दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजितदादा पवार के निधन को अभी एक साल पूरा नहीं हुआ है, इसलिए गुलाल उड़ाने और पटाखे फोड़ने से परहेज किया गया।
समूह क्रमांक एक के नींबूत-खंडाळा निर्वाचन क्षेत्र में प्रमोद काकडे, अभिजित काकडे और डॉ. वसंतराव दगडे साढ़े आठ हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से जीते। समूह क्रमांक दो के मुरूम-वाल्हे निर्वाचन क्षेत्र में कारखाने के पूर्व अध्यक्ष राजवर्धन शिंदे, विक्रम भोसले और ऋषिकेश गायकवाड ने 6 हजार 572 वोटों के अंतर से बाजी मारी। डॉ. दगडे को पुरंदर के विधायक विजय शिवतारे का समर्थन मिला हुआ था।
इस चुनाव में 84 प्रतिशत मतदान हुआ था। कारखाने का कार्यक्षेत्र बारामती, पुरंदर और सातारा जिले के खंडाळा तथा फलटण तक फैला है, और मैदान में कुल 83 उम्मीदवार थे। पुरुषोत्तम जगताप ने ऐन वक्त पर अलग पैनल खड़ा किया था, जबकि युगेंद्र पवार ने भी स्वतंत्र चुनौती पेश की थी। जगताप के पैनल को भाजपा के पूर्व विधायक संजय जगताप ने समर्थन दिया था। वहीं विधायक विजय शिवतारे ने सुनेत्रा पवार के पैनल का साथ दिया।
चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल था, इसलिए सुनेत्रा पवार, सांसद पार्थ पवार और जय पवार बारामती में डेरा डालकर प्रचार की मशीनरी को सक्रिय रखे हुए थे। अजितदादा की रणनीति अपनाते हुए राष्ट्रवादी ने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को एकजुट किया। अंदाजा लगाया जा रहा था कि विरोधी पैनलों के पांच से छह उम्मीदवार जीतेंगे, मगर मतगणना का रुझान राष्ट्रवादी के पक्ष में झुक गया।
शाम छह बजे तक पहले दो समूहों और 'ब' वर्ग निर्वाचन क्षेत्र के नतीजे घोषित हो चुके थे। बाकी मतगणना में देरी हो रही है, इसलिए प्रक्रिया आधी रात के बाद भी चलने की संभावना थी।