खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर राज के खिलाफ सड़कों पर लोग, पुलिस फायरिंग में पांच घायल
गवर्नर राज लागू करने के फैसले के विरोध में प्रदर्शनकारी और पुलिस आमने-सामने आए, पुलिस की फायरिंग में पांच लोग घायल हुए।
खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में गवर्नर राज लागू करने के फैसले के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। इस फैसले के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए और प्रदर्शनकारियों व पुलिस के बीच जोरदार झड़प हुई। पुलिस की फायरिंग में पांच लोग घायल हुए हैं।
फैसले की वजह यह बताई गई है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के आतंकियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने में स्थानीय सरकार नाकाम रही। प्रांत में इस संगठन की गतिविधियों से सुरक्षा का सवाल गंभीर हो गया है, और प्रांतीय सरकार पर सख्त कार्रवाई न कर पाने का आरोप लगाया गया है। इसी पृष्ठभूमि में प्रांत में गवर्नर राज लागू किया गया।
इस फैसले से प्रांत के राजनीतिक माहौल में बड़ी हलचल मच गई है और स्थानीय सरकार के अधिकारों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
फैसले से नाराज पाकिस्तानी नागरिकों और प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर विरोध जताया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और लोगों के बीच जोरदार झड़प हुई। हालात काबू में करने के लिए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई, ऐसा आरोप है। इस फायरिंग में कम से कम पांच लोग घायल हुए। घटना के फौरन बाद इलाके में सन्नाटा और तनाव का माहौल बन गया है और सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है।
खैबर पख्तूनख्वा पाकिस्तान के उन प्रांतों में से है जो आतंकी वारदातों से प्रभावित हैं। अफगानिस्तान की सरहद से लगे इलाकों में सुरक्षा बलों और आतंकी संगठनों के बीच बार-बार टकराव होता रहता है। बीच-बीच में गोलियां चलती हैं और बम फटते रहते हैं।
इन वजहों से आम लोगों की नींद उड़ी हुई है। कब कहां से गोली आ जाए या चलते-फिरते अचानक कहां बम फट जाए, यह किसी को पता नहीं होता। आतंकवाद पर काबू पाते हुए स्थानीय लोगों का भरोसा जीतना अब सरकार के सामने बड़ी चुनौती होगी।
पाकिस्तान में दूसरी जगहों पर भी सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू हो गए हैं, जिनमें इमरान खान को जेल से रिहा करने की मांग प्रमुख है। दुनिया में भी कई जगह टकराव चल रहा है। यमन में सऊदी, सऊदी समर्थक यमन सरकार और हूती आपस में लड़ रहे हैं, गाजा पट्टी और लेबनान में इजरायल हमले कर रहा है, रूस और यूक्रेन की जंग को करीब चार साल हो गए हैं और अमेरिका व ईरान भी आमने-सामने हैं। पेरिस में छात्रों का आंदोलन चल रहा है और भारत में भी युवा सड़कों पर उतर रहे हैं।