नाशिक में प्रारूप सूची से 10.27 लाख नाम कटे, शिविरों में पहुंचे बहुत कम मतदाता
नाशिक जिले की प्रारूप मतदाता सूची से नाम हटे मतदाताओं को सबूत देकर दोबारा नाम जुड़वाने का मौका है, पर शिविरों में बहुत कम लोग आ रहे हैं।
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नाशिक जिले की प्रारूप मतदाता सूची से जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें अपने सबूत देकर नाम फिर से जुड़वाने का मौका दिया गया है। इसके बावजूद ज्यादातर मतदाताओं में इसे लेकर उदासीनता दिख रही है। जिले में एसआईआर, यानी विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का दूसरा चरण इस वक्त चल रहा है। इस चरण में प्रशासन के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है।
नाम हटाए गए मतदाताओं को नोटिस भेजे गए हैं और विशेष शिविर भी लगाए गए हैं। फिर भी मतदाता जवाब नहीं दे रहे। ऐसे में बीएलओ के सामने सवाल है कि काम पूरा कैसे किया जाए।
जिले के 15 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 10 लाख 27 हजार मतदाताओं के नाम प्रारूप सूची से अलग-अलग कारणों से हटाए गए हैं। इन कारणों में पलायन, मृत्यु और दोहरा पंजीकरण शामिल हैं। लेकिन इनमें से कई मतदाताओं की आपत्ति या सबूत जांचे बिना उनके नाम मतदाता सूची से हमेशा के लिए नहीं हटाए जा सकते। इसी वजह से चुनाव आयोग ने इन मतदाताओं को जरूरी सबूत देकर सूची में दोबारा शामिल होने का मौका दिया है।
जिला प्रशासन पिछले एक महीने से निर्वाचन क्षेत्र और मतदान केंद्र के हिसाब से विशेष शिविर लगा रहा है। शनिवार और रविवार को बीएलओ को मतदान केंद्र पर मौजूद रहने के आदेश हैं। वहां उन्हें नए मतदाताओं का पंजीकरण करना है, पते या नाम में सुधार करना है और नोटिस पाने वाले मतदाताओं के कागजात जांचने हैं। नाम जुड़वाने के लिए जरूरी सबूत जमा करने की आखिरी तारीख 12 अक्टूबर है।
हकीकत यह है कि शिविरों में बहुत कम लोग पहुंच रहे हैं। शनिवार को शहर में हुए शिविर में भी ज्यादा मतदाता नहीं आए। बीएलओ ने अपनी परेशानी बताई है कि बार-बार फोन करने और घर जाकर संपर्क करने के बाद भी मतदाता जवाब नहीं देते। दूसरी तरफ, उन्हें सख्त निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी पात्र मतदाता मतदान के हक से वंचित न रहे।
शिविरों के जरिए 1 अक्टूबर 2026 को या उससे पहले 18 साल की उम्र पूरी कर चुके पात्र युवाओं को भी मतदाता के रूप में पंजीकरण का मौका दिया गया है। अब तक मिले आंकड़ों के मुताबिक 65 हजार नए मतदाताओं ने फॉर्म 6 भरकर अपना पंजीकरण पूरा करवा लिया है। यह संख्या आगे और बढ़ने की संभावना है।