रविवार, 11 अक्टूबर 2026

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16:29 IST

मणिपुर के तीन पहाड़ी जिलों में नागा-कुकी टकराव, 9 की मौत, मुख्यमंत्री ने की शांति की अपील

कामजाँग, उखरुल और कांगपोकपी में रविवार को भारी झड़प हुई। अधिकारियों के मुताबिक अब तक 9 लोगों की जान गई है और मुख्यमंत्री यमुनाम खेमचंद सिंह ने संयम रखने को कहा है।

मणिपुर के पहाड़ी इलाकों के तीन जिलों कामजाँग, उखरुल और कांगपोकपी में रविवार को भारी झड़प देखने को मिली। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि नागा और कुकी समुदायों के बीच ताज़ा हिंसक टकराव में अब तक 9 लोगों की जान जा चुकी है। मरने वालों में एक महिला भी शामिल है।

अधिकारियों के मुताबिक शुक्रवार और शनिवार की हिंसा में 6 नागा, 2 कुकी और गोरखा समुदाय के एक किसान की मौत हुई। बताया जा रहा है कि इस साल मणिपुर में हुई हिंसा की घटनाओं में यह सबसे जानलेवा है।

हिंसा की शुरुआत शुक्रवार रात कामजाँग जिले के चासाद गांव में 42 साल की एक महिला की हत्या से हुई। कामजाँग जिले में मुख्य रूप से नागा समुदाय बड़ी तादाद में रहता है, लेकिन चासाद गांव में कुकी समुदाय के लोग बहुसंख्या में हैं। इंफाल में पत्रकारों से बात करते हुए पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि पांच बच्चों की मां डोमखोनेई ताउथांग को गर्दन में गोली मारी गई और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

महिला की हत्या के बाद कुकी और नागा समुदाय के सशस्त्र गुटों के बीच बेधड़क गोलीबार शुरू हो गया, जो शनिवार तक चलता रहा। इस दौरान 23 साल के एक नौजवान की भी जान गई और 10 से ज्यादा घर जला दिए गए। कुकी-जो संगठन ने महिला की हत्या के लिए सुरक्षा बलों और नागा सशस्त्र दल को जिम्मेदार ठहराया है।

मुख्यमंत्री यमुनाम खेमचंद सिंह ने हिंसा और निर्दोष नागरिकों की हत्या की निंदा की है और लोगों से शांति व संयम रखने की अपील की है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को हालात काबू में करने और कानून व व्यवस्था बनाए रखने के लिए तुरंत जरूरी कदम उठाने के निर्देश भी दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने एक्स और फेसबुक पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि कामजाँग और कांगपोकपी जिले में निर्दोष नागरिकों की हत्या और हिंसा का वे निषेध करते हैं। उनके मुताबिक उन्होंने अधिकारियों को हालात नियंत्रण में लाने, शांति और कानून व व्यवस्था बनाए रखने और सभी नागरिकों की सुरक्षा पक्की करने के लिए तुरंत और असरदार योजना बनाने का आदेश दिया है।

मुख्यमंत्री ने अलग-अलग समुदायों, जनप्रतिनिधियों और नागरिक संगठनों से आगे आकर संयम रखने और तनाव घटाने में मदद करने की अपील की है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से यह भी कहा है कि वे शांति, बातचीत और आपसी सद्भाव को पहली प्राथमिकता दें।

अधिकारियों के मुताबिक हिंसा के असर को देखते हुए तीनों जिलों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) और मणिपुर पुलिस ने गश्त और तलाशी अभियान तेज कर दिया है, ताकि हालात और न बिगड़ें। हिंसा के बाद कामजाँग के जिला मजिस्ट्रेट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत आदेश जारी किया है। इसके तहत पांच या उससे ज्यादा लोगों के जमा होने, ज्वलनशील और खतरनाक चीजें रखने और कर्फ्यू वाली जगहों पर आने-जाने पर रोक लगा दी गई है।

कांगपोकपी जिले में शनिवार को एक अलग घटना में संदिग्ध माओवादियों ने टापोन और मकुई गांव पर हमला किया। अधिकारियों के मुताबिक इस हमले में तीन लोगों की मौत हुई, जिनमें नागा समुदाय के दो ग्राम रक्षक एम. दैमाई और आर. गंगमेई शामिल हैं। तीसरे मृतक की पहचान रिंगकांगमाई के रूप में हुई है।

नागा नागरिक संगठन वर्किंग कमेटी जेटीसी मणिपुर का दावा है कि 52 साल के ग्रामीण अजिनबौ आर. का सिर माओवादियों ने धड़ से अलग कर दिया। संगठन ने मांग की है कि परिवार को सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करने के लिए काटा गया सिर लौटाया जाए।

एक और हमले में कामजाँग जिले में भारत-म्यांमार सीमा के पास तांगखुल नागा बहुल निंगचौ गांव में संदिग्ध माओवादियों ने गोलीबारी की। इसमें 35 साल के नगाचांसो निंगशेन और 48 साल के लेइशिशान लेइशादांग की मौत हो गई। स्थानीय लोगों का दावा है कि हमले की खबर मिलने पर सुरक्षा बल गांव पहुंचे, लेकिन तब तक हमलावर माओवादी म्यांमार की तरफ भाग निकलने में कामयाब हो चुके थे।

स्थानीय लोगों के मुताबिक इस साल फरवरी में प्रभावित जिलों में कुकी और नागा समुदायों के बीच हुई हिंसा में 40 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी और कई लोगों के घर जला दिए गए थे। यह हिंसा मुख्य रूप से उखरुल, कामजाँग, कांगपोकपी, तमेंगलाँग और नोनी जिलों के साथ सेनापति जिले के कुछ हिस्सों में हुई थी।

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