नागपुर जिले में नए बोरवेल की खुदाई पर अगले आदेश तक रोक, पानी का संकट गहराने का डर
जिला आपत्ति व्यवस्थापन प्राधिकरण ने नागपुर जिले में नए बोरवेल और मौजूदा बोरवेल को गहरा करने पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है।
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नागपुर जिले में अब कोई नया बोरवेल या ट्यूबवेल नहीं खोदा जा सकेगा। इस साल बारिश कम हुई है और जलाशयों में पानी का स्टॉक लगातार घट रहा है। आने वाले दिनों में पानी की किल्लत बढ़ने का डर है, इसलिए जिला प्रशासन ने खुदाई पर अगले आदेश तक पूरी तरह रोक लगा दी है।
यह आदेश जिलाधिकारी कुमार आशीर्वाद ने जारी किया है। वे जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष भी हैं और उन्होंने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत यह फैसला लिया। रोक उसी वक्त से लागू हो गई है और जब तक नया आदेश नहीं आता, चलती रहेगी।
प्रशासन का कहना है कि इस कदम से तीन काम साधने हैं। जमीन के नीचे का पानी बचाना है, पीने के पानी के स्रोतों पर बढ़ता बोझ हल्का करना है और आगे चलकर किल्लत को और गंभीर होने से रोकना है। इसके लिए सरकारी महकमों के जरिए पहले से एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।
आदेश पूरे जिले में चलेगा, यानी शहर हो या गांव, दोनों जगह एक जैसा नियम है। नया बोरवेल खोदना मना है और जो बोरवेल पहले से बने हैं, उन्हें और गहरा करना भी मना है। यह पाबंदी आम लोगों, किसानों और खेत मालिकों, हाउसिंग सोसाइटियों, बिल्डरों, उद्योगों, दुकानों और कारोबारी ठिकानों के साथ संस्थाओं पर भी लागू है। बोरवेल की खुदाई करने वाले ठेकेदार, रिग के मालिक और मशीन चलाने वाले भी इसके दायरे में आते हैं।
प्रशासन ने साफ कहा है कि रोक सिर्फ नई खुदाई और गहराई बढ़ाने पर है। जो बोरवेल पहले से चल रहे हैं, उनका रोजमर्रा का इस्तेमाल बंद करने को नहीं कहा गया है।
सरकारी एजेंसियों को इस रोक से छूट दी गई है। पानी की किल्लत दूर करने और लोगों के लिए पीने का पानी पक्का करने के मकसद से जो काम चल रहे हैं या आगे हाथ में लिए जाएंगे, वे जारी रह सकते हैं। अगर एजेंसी यह काम ठेकेदार से करवाती है और उसके पास सरकारी कार्यादेश है, तो ठेकेदार को भी यही छूट मिलेगी।
छूट की एक शर्त है। ऐसे काम करने वाली एजेंसी को अपना सरकारी कार्यादेश या सक्षम अधिकारी की मंजूरी और वे कागज, जिनसे साबित हो कि काम पानी की किल्लत से जुड़ा है, जांच के लिए तैयार रखने होंगे। साथ ही भूजल के कानून, तकनीकी मानक और सुरक्षा के नियम मानना जरूरी रहेगा।
अमल पर नजर रखने का जिम्मा उपविभागीय अधिकारियों को सौंपा गया है। जिलाधिकारी ने उनसे कहा है कि तहसीलदार, पुलिस, स्थानीय निकायों और भूजल सर्वेक्षण व विकास एजेंसी के साथ मिलकर मौके पर जाकर जांच करें और जहां मना की गई खुदाई चल रही हो, उसे रुकवाएं।
जो भी आदेश तोड़ेगा या उस पर अमल में अड़चन डालेगा, उसके खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 51 और बाकी लागू कानूनों के तहत कार्रवाई होगी। तहसीलदारों और स्थानीय निकायों से कहा गया है कि वे आदेश का प्रचार करें और अमल की शुरुआती रिपोर्ट फौरन भेजें। आदेश की कॉपी सूचना फलकों पर लगाई जाएगी और आधिकारिक वेबसाइट पर भी डाली जाएगी।