महाराष्ट्र के 358 में से 305 तालुके सूखाग्रस्त घोषित, सोयाबीन-कपास की फसल पर सबसे ज्यादा मार
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
खरीफ 2026 में कमजोर बारिश से महाराष्ट्र के 305 तालुकों में सूखा घोषित हुआ है। सोयाबीन और कपास पर सबसे ज्यादा असर का अनुमान है।
महाराष्ट्र में इस साल खरीफ सीजन 2026 के दौरान बारिश कमजोर रही और इसका सीधा असर खेतों की फसलों पर पड़ा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुति सरकार ने राज्य के कुल 358 तालुकों में से 305 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है। कृषि और राजस्व विभाग की टीमें खेतों में जाकर पंचनामा कर रही हैं और फसल के नुकसान का आकलन कर रही हैं।
नुकसान के आंकड़े राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने एक प्रेजेंटेशन के दौरान रखे। इन आंकड़ों के मुताबिक राज्य के किसानों को करीब Rs 77 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है। इसमें मराठवाड़ा का हिस्सा Rs 35,000 करोड़, विदर्भ का Rs 22,000 करोड़ और उत्तर महाराष्ट्र, पश्चिम महाराष्ट्र तथा कोंकण का मिलाकर करीब Rs 20,000 करोड़ बताया गया है। हालांकि इस रकम की पुष्टि करने वाला कोई सरकारी आकलन उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसे अंतिम नुकसान या सरकार से मंजूर आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।
सबसे ज्यादा चोट सोयाबीन और कपास को पहुंचने का अनुमान है। खरीफ सीजन में महाराष्ट्र की ये दो सबसे अहम फसलें हैं और इनका रकबा 87.85 लाख हेक्टेयर है, यानी 64.2 प्रतिशत।
सोयाबीन की बात करें तो अगस्त और सितंबर में बारिश लंबे समय तक रुकी रही। नतीजा यह हुआ कि कटाई से पहले ही फसल खेतों में सूख गई। जब फलियां आने का नाजुक दौर था, उसी वक्त बारिश थमने से नमी खत्म हो गई और पौधे पीले पड़ गए। मराठवाड़ा और विदर्भ के किसानों के मुताबिक सोयाबीन की पैदावार में 50 से 60 फीसदी की गिरावट आई है।
कपास विदर्भ और मराठवाड़ा की प्रमुख नकदी फसलों में गिनी जाती है। बारिश की कमी और ज्यादा तापमान की वजह से पौधों के बढ़ने, फूल आने और टिंडे बनने की प्रक्रिया पर असर पड़ा है। इससे उत्पादन और कपास की क्वालिटी पर असर पड़ने की आशंका है।
खरीफ फसलों का सामान्य बुआई क्षेत्र महाराष्ट्र में करीब 1.44 करोड़ हेक्टेयर है। इस सीजन लगभग 1.37 करोड़ हेक्टेयर में बुआई हुई। सोयाबीन और कपास के अलावा तुअर, मक्का और धान भी खरीफ की अहम फसलें हैं और इन पर भी सूखे का असर पड़ा है। राज्य कृषि विभाग के अगस्त के आंकड़ों में मक्का, धान और तुअर का बुआई क्षेत्र पिछले साल के मुकाबले कम दर्ज हुआ था।
अब नजर पंचनामे और अंतिम नुकसान रिपोर्ट पर है। सूखा प्रभावित इलाकों में महाराष्ट्र सरकार के कृषि और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें खेतों का निरीक्षण कर रही हैं। इन सर्वेक्षणों से पता चलेगा कि कितने क्षेत्र में फसल को नुकसान हुआ, कितने किसान प्रभावित हैं और राहत की कितनी जरूरत पड़ेगी।
मिसाल के तौर पर, 22 अक्टूबर 2026 की एक रिपोर्ट में नासिक जिले के 10 सूखा प्रभावित तालुकों में 5.07 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में फसल नुकसान और 5.16 लाख से ज्यादा प्रभावित भूमि धारकों का आकलन बताया गया। यह आंकड़ा सिर्फ नासिक जिले का है, पूरे महाराष्ट्र का नहीं।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।