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डब्ल्यूसीएल मुख्यालय में नशे पर रोक लागू कराने वाली कोई जांच टीम नहीं, RTI में खुलासा

डब्ल्यूसीएल मुख्यालय में नशे पर रोक लागू कराने वाली कोई जांच टीम नहीं, RTI में खुलासा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कारोबार PT24 टीम

आरटीआई के जवाब में वेस्टर्न कोलफील्ड्स ने माना कि नागपुर मुख्यालय में धूम्रपान, शराब, गुटखा और पान मसाला पर रोक के लिए कोई समिति या उड़न दस्ता नहीं है।

वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) के नागपुर मुख्यालय में नियमों पर अमल को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। कर्मचारियों को वर्दी के लिए हर साल 12,500 रुपये की अग्रिम रकम मिलती है। लेकिन दफ्तर परिसर में धूम्रपान, शराब, गुटखा और पान मसाला पर पाबंदी लागू कराने के लिए मुख्यालय में कोई निरीक्षण टीम, समिति या उड़न दस्ता तैनात नहीं है। यह बात सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत मिले आधिकारिक जवाब से सामने आई है।

नागपुर के रहने वाले राजीव रंजन कुशवाहा ने 3 सितंबर 2026 को RTI अर्जी दी थी (पत्र क्रमांक: WCL/RTI/SUKAA/2026/6719)। जवाब में WCL के औद्योगिक संबंध विभाग ने जो दस्तावेज दिए, उनसे कंपनी के नियमों के अमल पर सवाल खड़े हो गए हैं।

यह जवाब WCL के वरिष्ठ प्रबंधक (HR/IR/SE) के 16 सितंबर 2026 के नोट (क्रमांक: WCL/IR/2026/346) के आधार पर तैयार हुआ और 17 सितंबर को जन सूचना अधिकारी को भेजा गया। अर्जी में पांच अहम सवाल पूछे गए थे।

पहला सवाल वर्दी से जुड़े SOP या GR का था। इसके जवाब में WCL ने कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) का संशोधित आदेश दिया। दूसरा सवाल दफ्तर और खदान परिसर में नशे पर पाबंदी का था। प्रबंधन ने कहा कि यह पाबंदी कंपनी के प्रमाणित स्थायी आदेश (Standing Order) में शामिल है, जो वेबसाइट पर उपलब्ध है। तीसरा सवाल उल्लंघन पर सजा का था। WCL के मुताबिक कार्रवाई के प्रावधान भी स्थायी आदेश में ही हैं।

चौथा सवाल निगरानी और निरीक्षण समिति का था। इस पर प्रबंधन ने साफ लिखा कि नागपुर के WCL मुख्यालय में फिलहाल कोई निरीक्षण टीम, समिति या उड़न दस्ता नियुक्त नहीं है। पांचवां सवाल सालाना निरीक्षण और सजा के ब्योरे का था। चूंकि कोई समिति या टीम बनी ही नहीं है, इसलिए इस बारे में मांगा गया ब्योरा भी नहीं दिया गया। जवाब की सबसे अहम बात यही है कि नियम और सजा के प्रावधान होने के बावजूद मुख्यालय में उन पर अमल की निगरानी के लिए कोई खास व्यवस्था नहीं बनाई गई।

RTI जवाब के साथ CIL का 28 अप्रैल 2026 का कार्यालय ज्ञापन भी लगा है (CIL/C-5B/JBCCI-XI/Uniform Dress-Code/20), जिसमें संशोधित वर्दी व्यवस्था का ब्योरा है। 6 जून 2025 के पुराने आदेश को कोल इंडिया की 490वीं बोर्ड बैठक के बाद बदला गया। नई व्यवस्था में हर कर्मचारी को तीन जोड़ी वर्दी के लिए साल में 12,500 रुपये मिलेंगे। पहले बिल एक महीने के अंदर जमा करने होते थे, अब GST बिल दो महीने में जमा करने होंगे। तय समय में बिल जमा न हुए तो रकम कर्मचारी की तनख्वाह से वसूली जा सकती है। जो कर्मचारी रिटायर होने वाले हैं, उन्हें दो महीने के अंदर या आखिरी तनख्वाह जारी होने से पहले, जो भी पहले हो, बिल जमा करने होंगे।

संशोधित आदेश के अनुलग्नक A के मुताबिक पुरुष कर्मचारियों के लिए तीन ग्रे फॉर्मल शर्ट और तीन काली फॉर्मल पैंट तय हैं। महिला कर्मचारी तीन विकल्पों में से वर्दी चुन सकती हैं: काली पैंट के साथ ग्रे या मरून शर्ट, ग्रे या मरून कुर्ता के साथ काली सलवार और दुपट्टा, या ग्रे या मरून साड़ी के साथ काला ब्लाउज। महिला कर्मचारियों के पास तय विकल्पों के हिसाब से कम से कम तीन जोड़ी वर्दी होनी चाहिए। रंग के कोड ग्रे, PMS 444, मरून, PMS 209 और काला, PMS 426 तय किए गए हैं।

वर्दी और नशामुक्त दफ्तर के आदेश होने के बावजूद उन पर असरदार अमल को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक नागपुर मुख्यालय समेत कई क्षेत्रीय मुख्यालयों में तय वर्दी न पहनने वाले कर्मचारी भी दफ्तर आते-जाते दिखते हैं। कुछ दफ्तर के कमरों में खुलेआम धूम्रपान होने के आरोप भी लगे हैं। अगर ये आरोप सही निकलते हैं, तो सवाल उठेगा कि जब कंपनी के पास नियम और सजा के प्रावधान दोनों हैं, तो निगरानी व्यवस्था कितनी कारगर है। खासकर प्रबंधन का यह आधिकारिक जवाब कि दफ्तर परिसर में धूम्रपान और दूसरी वर्जित गतिविधियों को रोकने के लिए कोई निरीक्षण टीम या उड़न दस्ता नहीं है, जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है।

अब कई सवालों के जवाब चाहिए। क्या WCL मुख्यालय में वर्दी का पालन एक समान तरीके से कराया जा रहा है? धूम्रपान और नशे से जुड़े उल्लंघन की शिकायतों पर कार्रवाई की निगरानी कौन करता है? जब नियमों में सजा है, तो असरदार निगरानी के लिए कोई खास व्यवस्था क्यों नहीं बनी? क्या CMD इस मामले की समीक्षा कर मुख्यालय में नियम पालन की स्थिति साफ करेंगे? और क्या इन तथ्यों को देखते हुए सतर्कता विभाग या कोई दूसरा सक्षम प्राधिकरण जांच पर विचार करेगा?

RTI से मिली जानकारी के बाद WCL मुख्यालय में नियमों के होने और उन पर असरदार अमल के बीच के फासले पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि निरीक्षण समिति न होने का मतलब यह नहीं कि कभी कोई कार्रवाई हुई ही नहीं। उपलब्ध रिकॉर्ड और असल हालात की अलग से पड़ताल जरूरी है।

अब देखना है कि वर्दी के नियम और धूम्रपान व नशे की पाबंदी लागू कराने के लिए WCL प्रबंधन क्या कदम उठाता है। असल सवाल यह है कि मुख्यालय में अनुशासित और धुएं से मुक्त दफ्तर के लिए निगरानी व्यवस्था बनेगी, या जवाब लिखित आदेशों तक ही सीमित रहेंगे। RTI से सामने आए तथ्यों के बाद अब सबकी नजर WCL प्रबंधन की पारदर्शिता, जवाबदेही और नियमों के एक समान अमल पर है।

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