अकोला में पानी की किल्लत से निर्माण कार्य रुके, मजदूर लौट रहे गांव
कलेक्टर ने पीने के पानी को तरजीह देते हुए जिले में निर्माण कार्यों पर रोक लगाई है, जिससे मजदूर और कारोबारी दोनों परेशान हैं।
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अकोला जिले में पानी की भीषण किल्लत है और हालात सूखे जैसे बने हुए हैं। इसी को देखते हुए कलेक्टर ने पीने के पानी को पहली तरजीह दी और जिले में चल रहे निर्माण कार्यों पर तुरंत रोक लगा दी। प्रशासन के इस फैसले का सीधा असर स्थानीय बांधकाम कारोबार पर पड़ा है। इस क्षेत्र पर सीधे और परोक्ष रूप से निर्भर हजारों मजदूर और कारोबारी अब आर्थिक संकट में आ गए हैं।
रोक लगने के बाद अकोला शहर और आसपास के इलाकों में दिहाड़ी पर काम करने वाले सैकड़ों मजदूरों का काम अचानक बंद हो गया। हाथ में काम नहीं है और रोज का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। इसलिए दूसरे जिलों और ग्रामीण इलाकों से आए कई मजदूरों ने अपने गांव लौटने का फैसला कर लिया है। नतीजा यह कि निर्माण क्षेत्र के कामगारों का पलायन बढ़ गया है।
काम ठप होने की मार सिर्फ सीमेंट और ईंट के कारोबारियों तक सीमित नहीं है। टाइल्स, हार्डवेयर, प्लंबिंग का सामान, रंग और सरिया बेचने वाले भी इसकी चपेट में हैं। टाइल्स की बिक्री और मांग काफी धीमी पड़ गई है। व्यापारियों के गोदामों में माल पड़ा है और करोड़ों रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है।
कलेक्टर के आदेश के बाद जो निर्माण नए शुरू हो रहे थे, और जो 70 प्रतिशत से कम पूरे हुए थे, उन्हें तुरंत रोक दिया गया है। इसलिए नए निर्माण का काम शुरू करना भी मुमकिन नहीं रहा। आखिरी चरण में पहुंचे कुछ निर्माण चालू तो हैं, लेकिन मजदूरों की कमी से उनकी रफ्तार धीमी हो गई है।
अचानक आई इस रोक से डेवलपर, ठेकेदार और छोटे बड़े व्यापारी मुश्किल में आ गए हैं। उनके सामने सवाल है कि बैंकों की किस्तें, दुकानों का किराया और कर्मचारियों की तनख्वाह कैसे भरी जाए। निर्माण कारोबारियों और इससे जुड़े व्यापारियों का कहना है कि पानी का सही इंतजाम जरूरी है, लेकिन निर्माण पर रोक से रोजगार की जो समस्या खड़ी हुई है, उसके लिए सरकार को कोई दूसरा इंतजाम करना चाहिए। यही मांग वे कर रहे हैं।
अकोला के निर्माण कारोबार में मध्य प्रदेश से आए मजदूरों की संख्या बड़ी है। खासकर बैतूल जिले के कई मजदूर यहां काम करते हैं। निर्माण बंद होने से उनके रोजगार का सवाल गंभीर हो गया है। नियमित काम और आमदनी रुक जाने से कई मजदूरों को अपने परिवार का पेट पालने की चिंता सता रही है।