मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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19:13 IST

नागपुर मनपा में साल भर में दूसरी बार आचार संहिता, मेयर समेत नेताओं ने लौटाई सरकारी गाड़ियां

स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीट के लिए चुनाव घोषित होते ही नागपुर मनपा में विकास कार्य फिर ठप पड़ गए, पार्षदों में नाराजगी।

नागपुर मनपा में साल भर में दूसरी बार आचार संहिता, मेयर समेत नेताओं ने लौटाई सरकारी गाड़ियां
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

नागपुर मनपा में 4 साल तक प्रशासक राज रहने के बाद आम चुनाव जीतकर भाजपा सत्ता में तो आ गई, लेकिन पहले ही साल के कार्यकाल में मंगलवार को दूसरी बार आचार संहिता का झटका लग गया। हालत यह है कि सत्ता में आने के बाद मई महीने में जब चौथे कार्यकाल का बजट बनाने की प्रक्रिया चल रही थी, उसी दौरान स्थानीय निकायों के तहत आने वाली विधान परिषद की सीट का चुनाव घोषित हो गया था। इस वजह से मई में पेश होने वाला बजट एक महीने देरी से पेश करना पड़ा था।

अब मंगलवार को स्नातक सीट के लिए भी चुनाव घोषित कर दिया गया, जिससे मनपा में दूसरी बार कामकाज ठप पड़ गया है। इसका सीधा असर विकास कार्यों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। नागपुर को लगभग डेढ़ महीने तक इस परेशानी से गुजरना पड़ेगा।

चुनाव की घोषणा होते ही कई पार्षदों ने मनपा का कामकाज ठप होने पर तीखी नाराजगी जाहिर की। पार्षदों का कहना है कि प्रभाग में विकास के लिए किसी तरह लड़-भिड़कर निधि जुगाड़ की जा रही थी, अभी पूरी निधि मिली भी नहीं थी कि आचार संहिता लग गई। अब प्रभाग में विकास कार्य करना मुमकिन नहीं होगा, जबकि बारिश के बाद प्रभागों में जो दिक्कतें खड़ी हुई हैं, उन्हें विकास कार्यों के जरिए ही सुलझाना था।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक स्थानीय निकाय और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र, दोनों सीटों पर विधान परिषद का चुनाव होना पहले से तय था। 24 घंटे चुनावी मोड में रहने वाली भारतीय जनता पार्टी को भी इसकी जानकारी अच्छी तरह थी, फिर भी पार्टी पूरी तरह बेफिक्र बनी रही। यही वजह रही कि स्थायी समिति में विकास कार्यों की फाइलें तेजी से आगे बढ़ाने को लेकर कोई ठोस कोशिश नहीं हुई। जानकारों के अनुसार पहले साल के कार्यकाल में बजट लागू करने में भी ढुलमुल रवैया ही दिखा। कुछ पदाधिकारियों को निधि मिल गई और उनकी कुछ फाइलें टेंडर तक भी पहुंच गईं, लेकिन मनपा के 160 पार्षदों में से करीब 150 पार्षद ऐसे रहे जिनके प्रभाग की विकास फाइलें टेंडर स्टेज तक भी नहीं पहुंच पाईं। अब इसी का खामियाजा इन पार्षदों को भुगतना पड़ रहा है।

चुनाव घोषित होते ही आचार संहिता लागू हो गई है और अब आदर्श आचार संहिता का पालन कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसकी जानकारी पहले से होने के कारण पदाधिकारियों ने सबसे पहले अपनी सरकारी गाड़ियां लौटा दीं। हालांकि प्रशासन ने बताया कि आदर्श आचार संहिता का असर इन पदाधिकारियों को मिलने वाली बाकी सुविधाओं पर भी पड़ेगा। मंगलवार को सूचना मिलते ही मेयर नीता ठाकरे, डिप्टी मेयर लीला हाथीबेड, सत्ता पक्ष नेता बाल्या बोरकर और विपक्ष नेता संजय महाकालकर ने अपनी गाड़ियां लौटा दीं। सत्ता पक्ष नेता ने तो पहले ही सरकारी गाड़ी लौटा दी थी, यहां तक कि मंगलवार को अपनी निजी गाड़ी पर लगा सत्ता पक्ष नेता का बोर्ड और झंडा भी उतरवा दिया।

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